बालराई के समीप बनेगा भव्य ‘पार्श्व लेहर मधुवन तीर्थ धाम’, 17 अगस्त को होगा भूमि शुद्धिकरण महोत्सव
फालना | दीपक जैन
जैन समाज के लिए एक और ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। दक्षिण गौरव, मरुधर ज्योति अक्षयरसा श्रीजी (मधु) म.सा. के चातुर्मासार्थ बालराई में मंगल प्रवेश के साथ ही क्षेत्र को एक भव्य धार्मिक सौगात मिलने वाली है। बालराई से लगभग एक किलोमीटर दूरी पर पाली–सांडेराव राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशाल भूखंड पर ‘पार्श्व लेहर मधुवन तीर्थ धाम’ का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। यह तीर्थ धाम आने वाले समय में जैन समाज के साथ-साथ क्षेत्र के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा।
भव्य जिन मंदिर का होगा निर्माण
अक्षयरसा श्रीजी (मधु) म.सा. ने बताया कि प्रस्तावित तीर्थ धाम में एक भव्य एवं दिव्य जिन मंदिर का निर्माण किया जाएगा। मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक संरचना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह श्रद्धा, साधना, आध्यात्मिक चिंतन और संस्कारों का केंद्र बनेगा। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के साथ आत्मिक शांति और धार्मिक वातावरण का अनुभव प्राप्त होगा।
मंदिर निर्माण का पुण्य लाभ विमलाबाई जयंतीलालजी चुन्नीलालजी सुराणा (बालराई/बेंगलुरु) परिवार को प्राप्त हुआ है। परिवार ने इस पवित्र कार्य में अपनी आस्था और सेवा भावना का परिचय देते हुए मंदिर निर्माण का संकल्प लिया है।
समाजजनों का बढ़ रहा सहयोग
तीर्थ धाम के निर्माण की घोषणा के साथ ही समाज में उत्साह का माहौल है। सविताबाई अगरचंदजी सुराणा परिवार के हितेशजी सुराणा ने भी तीर्थ निर्माण में महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की है। उनके इस निर्णय का समाजजनों ने स्वागत करते हुए इसे धर्म सेवा की प्रेरणादायक मिसाल बताया।
धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में इस परियोजना से जुड़ रहे हैं। कई श्रद्धालु तन, मन और धन से सेवा का संकल्प ले रहे हैं। ट्रस्ट मंडल से जुड़कर निर्माण कार्य में सहयोग देने के लिए समाजबंधुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
17 अगस्त को होगा भूमि शुद्धिकरण महोत्सव
तीर्थ निर्माण की दिशा में पहला महत्वपूर्ण चरण 17 अगस्त को आयोजित होने वाला भूमि शुद्धिकरण महोत्सव होगा। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु एवं समाजबंधुओं के शामिल होने की संभावना है।
भूमि शुद्धिकरण को भारतीय संस्कृति में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस आयोजन के माध्यम से प्रस्तावित तीर्थ स्थल को धार्मिक विधि-विधान के साथ पवित्र किया जाएगा, जिसके बाद निर्माण कार्य औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगा।
धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र बनेगा तीर्थ
प्रस्तावित पार्श्व लेहर मधुवन तीर्थ धाम केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं होगा, बल्कि यह आध्यात्मिक साधना, प्रवचन, धार्मिक शिविर, संस्कार निर्माण और समाज सेवा की विभिन्न गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।
यहां नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन, तप, स्वाध्याय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। इससे नई पीढ़ी को जैन धर्म की परंपराओं, अहिंसा, संयम और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आयाम
पाली–सांडेराव राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनने वाला यह तीर्थ धाम धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। देशभर से श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। आसपास के क्षेत्र में होटल, धर्मशाला, भोजनालय और अन्य सुविधाओं का भी विकास होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक केंद्र सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समाज में दिख रहा उत्साह
भूमि शुद्धिकरण महोत्सव को लेकर समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। श्रद्धालु आयोजन में भाग लेने के लिए अपने स्तर पर व्यवस्थाएं कर रहे हैं। समाज के वरिष्ठजन इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धार्मिक धरोहर मान रहे हैं।
सेवा और समर्पण का अवसर
ट्रस्ट मंडल ने समाज के सभी धर्मप्रेमियों से इस पुनीत कार्य में सहयोग का आह्वान किया है। श्रद्धालु आर्थिक सहयोग, श्रमदान एवं अन्य सेवाओं के माध्यम से तीर्थ निर्माण में अपनी सहभागिता निभा सकते हैं।
धर्माचार्यों का कहना है कि ऐसे धार्मिक निर्माण कार्य केवल भवन निर्माण नहीं होते, बल्कि समाज की आस्था, संस्कार और संस्कृति को मजबूत करने वाले अभियान होते हैं। इसमें सहभागी बनना प्रत्येक श्रद्धालु के लिए पुण्य का अवसर है।
भविष्य की धार्मिक धरोहर
समाजजनों का विश्वास है कि पार्श्व लेहर मधुवन तीर्थ धाम आने वाले वर्षों में राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर के जैन श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बनेगा। यहां होने वाले धार्मिक आयोजन समाज को नई दिशा देंगे तथा आध्यात्मिक चेतना का विस्तार करेंगे।
17 अगस्त को होने वाला भूमि शुद्धिकरण महोत्सव इस ऐतिहासिक परियोजना की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक होगा। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि यह तीर्थ धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्थायी केंद्र बनेगा।
