उमस और गर्मी से लोग बेहाल, बारिश नहीं होने से किसानों की बढ़ी चिंता
संवाददाता :मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना। मानसून की रफ्तार थमने से पड़ाना नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले 20 से 25 दिनों से क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण तेज धूप और उमस ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। सुबह और शाम आसमान में बादल तो दिखाई देते हैं, लेकिन बिना बरसे ही आगे निकल जाते हैं। बारिश की लगातार कमी के कारण जहां आम लोग भीषण गर्मी और चिपचिपी उमस से परेशान हैं, वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। खरीफ सीजन की फसलें इस समय पर्याप्त नमी की मांग कर रही हैं, लेकिन वर्षा नहीं होने से खेतों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है।
बादलों की आवाजाही, लेकिन बारिश नदारद
क्षेत्र में पिछले कई दिनों से मौसम का अजीब मिजाज देखने को मिल रहा है। सुबह हल्के बादल छाते हैं, दोपहर में तेज धूप निकल आती है और शाम तक फिर बादल दिखाई देते हैं, लेकिन बारिश नहीं होती। इस स्थिति ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। हर दिन बारिश की संभावना बनती है, लेकिन बादल बिना बरसे आगे बढ़ जाते हैं।
बारिश नहीं होने के कारण वातावरण में नमी लगातार बनी हुई है, जिससे उमस का स्तर काफी बढ़ गया है। तेज धूप और नमी के कारण दिनभर चिपचिपी गर्मी महसूस हो रही है। लोगों का कहना है कि इस बार गर्मी से ज्यादा परेशानी उमस ने बढ़ा दी है। पंखे और कूलर भी राहत नहीं दे पा रहे हैं और बिजली की खपत भी बढ़ गई है।
दिन में घर से निकलना हुआ मुश्किल
दोपहर के समय तेज धूप और उमस के कारण सड़कें लगभग सुनसान नजर आने लगी हैं। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। बाजारों में भी दोपहर के समय ग्राहकों की संख्या कम दिखाई दे रही है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि उमस और गर्मी का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है।
कामकाजी लोगों, मजदूरों और किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खुले आसमान के नीचे काम करने वालों को तेज धूप और उमस के कारण जल्दी थकान महसूस हो रही है। कई लोग सिरदर्द, कमजोरी और अत्यधिक पसीने की शिकायत कर रहे हैं।
खरीफ फसलों पर मंडराने लगा संकट
बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने खरीफ सीजन में सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग और अन्य फसलों की बुवाई समय पर कर दी थी। शुरुआती बारिश से फसलों का अंकुरण भी अच्छा हुआ, लेकिन उसके बाद लगातार बारिश नहीं होने से खेतों में नमी कम होती जा रही है।
किसानों का कहना है कि फसलों की बढ़वार के लिए इस समय नियमित वर्षा बेहद जरूरी है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो पौधों का विकास रुक जाएगा और उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। कई खेतों में फसलों की पत्तियां मुरझाने लगी हैं और मिट्टी में दरारें भी दिखाई देने लगी हैं।
किसान आसमान की ओर लगाए बैठे हैं नजर
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान रोजाना मौसम का हाल देख रहे हैं। जैसे ही बादल दिखाई देते हैं, किसानों को उम्मीद बंधती है कि शायद आज अच्छी बारिश होगी, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लग रही है।
कई किसानों ने बताया कि यदि अगले दो-तीन दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो उन्हें दोबारा सिंचाई की व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ जाएगी। जिन किसानों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, उनके सामने सबसे बड़ी चिंता फसल बचाने की है।
किसानों का कहना है कि समय पर बारिश नहीं होने से केवल इस वर्ष की फसल ही नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा। खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर होने के कारण बारिश की हर देरी चिंता बढ़ा रही है।

पशुपालकों की भी बढ़ी परेशानी
बारिश नहीं होने का असर पशुपालकों पर भी पड़ने लगा है। खेतों और चरागाहों में हरी घास कम होने लगी है, जिससे पशुओं के चारे की समस्या पैदा होने लगी है। यदि बारिश में और देरी होती है तो हरे चारे का संकट और गहरा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अच्छी वर्षा होने से ही खेतों में हरियाली लौटेगी और पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध हो सकेगा।
उमस का स्वास्थ्य पर असर
लगातार उमस और गर्मी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार इस मौसम में डिहाइड्रेशन, वायरल संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्याएं और थकान की शिकायतें बढ़ जाती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचना चाहिए और हल्का व पौष्टिक भोजन करना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
38 डिग्री तक पहुंच रहा तापमान
मौसम विभाग के अनुसार क्षेत्र में अधिकतम तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा है। हवा की गति कई बार पूरी तरह थम जाती है, जबकि कभी-कभी 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहती है। हवा में नमी अधिक होने के कारण लोगों को वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा गर्मी महसूस हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब हवा की गति कम और नमी अधिक होती है, तब शरीर से निकलने वाला पसीना जल्दी नहीं सूखता, जिससे उमस बढ़ जाती है और शरीर अधिक गर्म महसूस करता है।
मौसम में बदलाव की उम्मीद
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों में कुछ तेजी आने की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो खेतों में नमी लौट आएगी और खरीफ फसलों को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही लोगों को उमस और गर्मी से भी राहत मिल सकेगी।
हालांकि, यदि बारिश में और देरी होती है तो कृषि उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में किसान और आम लोग दोनों ही जल्द से जल्द अच्छी वर्षा की उम्मीद लगाए हुए हैं।
सभी की नजरें आसमान पर
फिलहाल पड़ाना और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हर व्यक्ति की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। किसान अच्छी बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं ताकि उनकी मेहनत रंग ला सके, वहीं आम लोग भी उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। समय पर होने वाली वर्षा न केवल खेती के लिए जीवनदायिनी साबित होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के जनजीवन को भी सा
