नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहा है। HRA छूट वाले शहरों की लिस्ट बढ़ी, बच्चों की एजुकेशन छूट में बड़ा इजाफा, STT बढ़ा और Buyback पर अब लगेगा टैक्स। पूरी डिटेल यहां पढ़ें।
नया इनकम टैक्स एक्ट: 1 अप्रैल से बायबैक से लेकर HRA तक, बदल जाएंगे ये 8 बड़े नियम
नई दिल्ली। अगर आप वेतनभोगी कर्मचारी हैं, शेयर मार्केट में निवेश करते हैं, या फिर कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़े हैं, तो नया इनकम टैक्स एक्ट आपके लिए बेहद अहम है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 20 मार्च 2026 को नया इनकम टैक्स नियम-2026 का ड्राफ्ट ई-गजट में नोटिफाई कर दिया है। यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा, जो साल 1961 के पुराने आयकर अधिनियम की जगह लेगा।
इस नए कानून में करदाताओं के लिए कई राहतें तो हैं, लेकिन कुछ नियमों में सख्ती भी की गई है। आइए जानते हैं कि नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने के बाद आपकी सैलरी, निवेश और बचत पर क्या असर पड़ेगा।
1. HRA में बड़ा बदलाव: अब 8 शहरों को मिलेगा 50% छूट का फायदा
नया इनकम टैक्स एक्ट वेतनभोगी करदाताओं के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की छूट को लेकर बड़ी राहत लेकर आया है। पहले के नियमों में केवल दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों में ही कर्मचारियों को मूल वेतन का 50% HRA छूट मिल पाती थी।
नए नियमों के तहत अब आठ शहरों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। ये शहर हैं:
- मुंबई
- दिल्ली
- कोलकाता
- चेन्नई
- हैदराबाद
- पुणे
- अहमदाबाद
- बेंगलुरु
इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को अब HRA के तहत उनके वेतन का 50% हिस्सा टैक्स फ्री मिलेगा। वहीं, अन्य शहरों में यह सीमा 40% पर बनी रहेगी। यह छूट केवल ओल्ड टैक्स रिजीम में ही उपलब्ध होगी।
2. बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल खर्च: 100 रुपये से सीधे 3000 रुपये तक का इजाफा
महंगाई के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई का खर्च हर साल बढ़ रहा है। इसे देखते हुए नया इनकम टैक्स एक्ट बच्चों की शिक्षा से जुड़ी छूट में भारी वृद्धि की गई है।
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पहले: प्रति माह 100 रुपये (प्रति बच्चा) की छूट मिलती थी।
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अब: यह सीमा बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दी गई है।
इसी तरह, हॉस्टल खर्च पर भी बड़ी राहत दी गई है। पहले यह सीमा 300 रुपये प्रति माह थी, जिसे अब बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यह राहत भी केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही मिलेगी।
3. कॉरपोरेट कार और मील कार्ड्स: नए नियमों से कितना बढ़ेगा टैक्स?
कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली कारों पर भी नया इनकम टैक्स एक्ट में नियम स्पष्ट किए गए हैं। अब यह नियम नई और पुरानी दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में समान रूप से लागू होंगे।
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1.6 लीटर इंजन तक की कार: अगर कंपनी आपको 1.6 लीटर इंजन वाली कार उपलब्ध कराती है, तो आप पर 8000 रुपये प्रति माह का टैक्स लगेगा।
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1.6 लीटर से बड़ी कार: अगर कार का इंजन 1.6 लीटर से अधिक है, तो यह दर बढ़कर 10,000 रुपये प्रति माह हो जाएगी।
मील कार्ड्स (भोजन वाउचर) के मामले में भी राहत दी गई है। पहले 50 रुपये तक के मील कार्ड पर टैक्स नहीं लगता था, अब यह सीमा बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई है। यह छूट ओल्ड टैक्स रिजीम में ही मिलेगी।
4. कूपन और गिफ्ट कार्ड्स: 15,000 रुपये तक की छूट
कॉरपोरेट कल्चर में कर्मचारियों को गिफ्ट कार्ड, कूपन या गिफ्ट सर्टिफिकेट देने का चलन आम है। नया इनकम टैक्स एक्ट इस पर भी कर स्पष्टता लाया है।
ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत, अब हर वित्तीय वर्ष में कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक के कॉरपोरेट गिफ्ट कार्ड, गिफ्ट सर्टिफिकेट और कूपन पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। यह सीमा पहले कई कंपनियों में स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अब नियमों में इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया गया है।
5. सेक्टर भत्ता: ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों को बड़ी राहत
ट्रांसपोर्ट सिस्टम (जैसे रेलवे, मेट्रो, बस सेवाएं) में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नया इनकम टैक्स एक्ट बड़ी राहत लेकर आया है। उन्हें मिलने वाले भत्ते की सीमा में भारी वृद्धि की गई है।
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पहले: यह सीमा 10,000 रुपये या भत्ते का 70% थी।
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अब: यह सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये या भत्ते का 70% कर दी गई है। जो भी राशि कम हो, वह टैक्स फ्री होगी।
6. सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT): फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर बढ़ा शुल्क
शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए यह खबर कुछ खास सुखद नहीं है। नया इनकम टैक्स एक्ट के तहत सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की गई है।
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फ्यूचर्स (Futures): पहले 0.02% STT लगता था, जिसे बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
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ऑप्शंस (Options): पहले 0.1% STT लगता था, जिसे बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
यह टैक्स अब हर एक खरीद और बिक्री पर लागू होगा, जिससे एक्टिव ट्रेडर्स की लागत बढ़ सकती है।
7. बायबैक टैक्स: 1 अप्रैल से हर रुपये पर लगेगा टैक्स
नया इनकम टैक्स एक्ट का सबसे चर्चित बदलाव बायबैक पर टैक्स लगाना है। अब तक कंपनियां शेयर बायबैक के जरिए शेयरधारकों को पैसा लौटाती थीं, जिस पर शेयरधारकों को टैक्स नहीं देना पड़ता था, बल्कि कंपनियां अलग से टैक्स चुकाती थीं।
1 अप्रैल 2026 से यह नियम बदल रहा है। अब बायबैक के जरिए मिलने वाली हर राशि पर टैक्स लगेगा।
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कॉरपोरेट प्रमोटर्स (कंपनियां) को 22% टैक्स देना होगा।
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नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स (व्यक्तिगत निवेशक) को 30% टैक्स देना होगा।
यानी अब अगर कोई कंपनी बायबैक करती है, तो निवेशकों को मिलने वाली रकम पर सीधे टैक्स का बोझ पड़ेगा।
8. पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था: कौन सी है बेहतर?
नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने के बाद भी दो टैक्स व्यवस्थाएं जारी रहेंगी: पुरानी व्यवस्था (Old Regime) और नई व्यवस्था (New Regime)।
ऊपर बताए गए अधिकतर फायदे (HRA, बच्चों की शिक्षा, मील कार्ड्स, गिफ्ट कार्ड्स) केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही मिलेंगे। अगर आप नई टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो आपको ये सभी छूट नहीं मिलेंगी, हालांकि टैक्स की दरें कम होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपके पास घर का किराया, शिक्षा ऋण, या अन्य निवेश (PPF, ELSS, LIC) हैं, तो पुरानी व्यवस्था अधिक फायदेमंद रहेगी। हालांकि, नई व्यवस्था उन लोगों के लिए सरल है जो कोई निवेश नहीं करते हैं।
निष्कर्ष
नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होते ही कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने का प्रयास है। HRA में शहरों की संख्या बढ़ाने और शिक्षा भत्ते में इजाफे से मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी, वहीं STT और बायबैक टैक्स से सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।सभी करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी सैलरी स्ट्रक्चर और निवेश की समीक्षा करें और समय रहते तय करें कि उनके लिए कौन सी टैक्स व्यवस्था बेहतर है।
