क्या नरोत्तम मिश्रा वापसी करेंगे? जानिए क्यों बढ़ रही है कांग्रेस की टेंशन और हेमंत खंडेलवाल से बंद कमरे में हुई मुलाकात के क्या हैं मायने।
नरोत्तम मिश्रा करेंगे ‘कमबैक’? हेमंत खंडेलवाल के साथ बंद कमरे में हुई मीटिंग, कांग्रेस खेमे में बढ़ रही टेंशन
भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की संभावनाओं के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर से सक्रिय हो गए हैं। मंगलवार को भोपाल स्थित उनके आवास पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ एक बंद कमरे में गुप्त बैठक हुई, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस खेमे में टेंशन बढ़ गई है। दतिया से मौजूदा कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बैंक धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है, जिसके बाद उन्हें अयोग्य ठहरा दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
नरोत्तम मिश्रा और हेमंत खंडेलवाल के बीच क्या हुई चर्चा?
नरोत्तम मिश्रा पिछले विधानसभा चुनाव में हारने के बाद से मुख्यधारा की राजनीति से दूर थे, लेकिन दतिया में आए इस राजनीतिक भूकंप ने उनकी किस्मत के दरवाजे फिर से खोल दिए हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ हुई इस बंद कमरे की मुलाकात को काफी अहमियत के साथ देखा जा रहा है।सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में संभावित उपचुनाव की रणनीति पर मंथन हुआ। चर्चा है कि नरोत्तम मिश्रा को ही पार्टी दतिया सीट से अपना उम्मीदवार बना सकती है, क्योंकि वे इस सीट से कई बार विधायक और मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की भी अटकलें हैं, लेकिन अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
7,742 वोटों से हारे थे नरोत्तम मिश्रा: क्या है पूरा मामला?
बता दें कि 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से नरोत्तम मिश्रा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। तब कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने उन्हें 7,742 वोटों से हराया था। यह हार नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका थी, जिसके बाद वे काफी हद तक सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे।हालांकि, अब राजेंद्र भारती की सजा और अयोग्यता के बाद नरोत्तम मिश्रा के लिए न सिर्फ अपनी हार का बदला लेने का मौका है, बल्कि अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने का भी। कांग्रेस ने इस अयोग्यता को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां 15 अप्रैल को सुनवाई होनी है। अगर वहां से कांग्रेस को राहत नहीं मिलती है, तो उपचुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा।
कांग्रेस पर क्या बीत रही है? (विधानसभा में घटते आंकड़े)
राजेंद्र भारती के अयोग्य ठहराए जाने के बाद से कांग्रेस खेमे में हड़कंप मचा हुआ है। पहले से ही विजयपुर विधानसभा से विधायक मुकेश मल्होत्रा हैं, लेकिन उन्हें राज्यसभा चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं है। अब राजेंद्र भारती के अयोग्य होने के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या 63 से घटकर 61 रह गई है।विधानसभा में यह गिरती संख्या कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गई है, खासकर जल्द ही होने वाले राज्यसभा चुनावों को देखते हुए।
राज्यसभा चुनाव का समीकरण: क्रॉस वोटिंग की संभावना
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए समीकरण बेहद मुश्किल हो गए हैं। एक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है, लेकिन 61 विधायकों के साथ भी कांग्रेस की राह आसान नहीं है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने खुलकर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की आशंका जताई है।उमंग सिंघार ने कहा: “बीजेपी का इतिहास रहा है कि यह पैसे की ताकत के दम पर चुनी हुई सरकारों को गिराती है और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। हमें आशंका है कि वे हमारे विधायकों को तोड़ने की कोशिश करेंगे।”अगर क्रॉस वोटिंग हुई या कुछ विधायक बागी हुए तो कांग्रेस राज्यसभा की दूसरी सीट भी गंवा सकती है, जो पार्टी के लिए एक बड़ा झटका होगा।
नरोत्तम मिश्रा के लिए नई उम्मीदें: क्या है आगे का रास्ता?
मध्य प्रदेश के बदलते सियासी समीकरण नरोत्तम मिश्रा के लिए ‘कमबैक’ की नई उम्मीद लेकर आए हैं। एक समय था जब वे कमलनाथ सरकार के समय बीजेपी के सबसे ताकतवर चेहरे हुआ करते थे, लेकिन 2023 में हार ने उनकी रफ्तार को धीमा कर दिया था।अब संभावनाएं दो तरह से बन रही हैं:
- उपचुनाव में दावेदारी: अगर राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो दतिया में उपचुनाव होंगे। नरोत्तम मिश्रा उस सीट से सबसे मजबूत दावेदार होंगे।
- राज्यसभा भेजे जाने की संभावना: चर्चा है कि अगर उपचुनाव का रास्ता नहीं बनता या पार्टी उन्हें सीधे ऊपरी सदन में भेजना चाहती है, तो उन्हें राज्यसभा का टिकट दिया जा सकता है।
बीजेपी और कांग्रेस के बयान: क्या कहते हैं नेता?
इस पूरे मामले पर बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने कहा: “कांग्रेस को इस बात पर आत्ममंथन करना चाहिए कि उसके चुने हुए नेता या उम्मीदवार आपराधिक मामलों में क्यों फंस रहे हैं। हम किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उपचुनाव हो या राज्यसभा, बीजेपी मजबूती से तैयार है।”वहीं, कांग्रेस खेमे में मौजूदा समय में टेंशन चरम पर है। पार्टी नेताओं ने अपने विधायकों को रेवाड़ी (हरियाणा) भेज दिया है, ताकि बीजेपी उन्हें संपर्क न कर सके। यह कदम भी कांग्रेस के भीतर के डर और अविश्वास को दर्शाता है।
निष्कर्ष:फिलहाल, सबकी निगाहें 15 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। अगर फैसला बीजेपी के पक्ष में आता है, तो नरोत्तम मिश्रा का सियासी सूरज फिर से चमकता नजर आएगा, और कांग्रेस के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
