नागदा में भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम
Nagda । जैन समाज में तप, त्याग और आध्यात्मिक साधना की गौरवशाली परंपरा को साकार करते हुए नागदा में वर्षीतप आराधकों के सम्मान में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम बनकर सामने आया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन, श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आध्यात्मिक आयोजन को यादगार बना दिया।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
नवकार सोशल ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर सकल जैन श्री संघ अध्यक्ष राजेन्द्र काठेड, विभिन्न ट्रस्ट मंडलों के प्रतिनिधि—पार्श्व प्रधान पाठशाला ट्रस्ट, चन्दा प्रभु ट्रस्ट, शान्तिनाथ जिनालय ट्रस्ट, राजेन्द्र सुरि दादावाड़ी ट्रस्ट एवं नाकोड़ा पार्श्वनाथ ट्रस्ट—के साथ मुतिपूजक संघ अध्यक्ष मनीष व्होरा एवं नागदा परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया।
मंगलाचरण और भक्ति गीतों से सजी शाम
कार्यक्रम की शुरुआत सोनम कोलन द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुई, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति भाव में सराबोर कर दिया।
इसके बाद दिलीप सिसोदिया ने अपने मधुर भक्ति गीतों से माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया।
संगीत की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति में डूबते नजर आए।
वर्षीतप आराधकों का भावपूर्ण स्वागत
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वर्षीतप आराधकों का वधावना (स्वागत) रहा।
जैसे ही आराधकों का स्वागत किया गया, पूरा परिसर “वर्धमान वीर प्रभु की जय” के जयघोष से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने खड़े होकर तालियों के साथ उनका स्वागत किया और उनके तप, संयम और त्याग को नमन किया।
पग पखार परंपरा ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
इस कार्यक्रम की सबसे विशेष और भावनात्मक झलक रही पग पखार (चरण पूजन) की परंपरा।
समाज के वरिष्ठजनों और गणमान्य व्यक्तियों ने आराधकों के चरण धोकर उनका सम्मान किया।
यह दृश्य अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक था, जिसने सभी के हृदय को छू लिया।
बहुमान के साथ किया गया सम्मान
आराधकों को शॉल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर वक्ताओं ने वर्षीतप की महिमा और उसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि वर्षीतप केवल एक तप नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मसंयम का सर्वोच्च मार्ग है।
नागदा परिवार बना मुख्य लाभार्थी
इस आयोजन में नागदा परिवार—मधु जी, सुभाष जी एवं ऋषभ जी नागदा—मुख्य लाभार्थी के रूप में सामने आए।
स्वर्गीय मन्नालाल जी, राजमल जी एवं सुभाष जी नागदा की धर्म भावना को आगे बढ़ाते हुए परिवार ने इस आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताते हुए समाज के प्रति आभार व्यक्त किया।
जैन समाज में पहली बार ऐसा आयोजन
यह आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा।
नवकार सोशल ग्रुप के बैनर तले इस प्रकार का भव्य, संगठित और भावनात्मक कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया गया।
इसमें आध्यात्मिकता के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी सुंदर समावेश देखने को मिला।
सम्मानित तपस्वियों की उपस्थिति
इस अवसर पर कई वर्षीतप आराधकों को मंच पर सम्मानित किया गया।
इनमें प्रमुख रूप से सुदिक्षा चपलोत, कीर्ति काकरिया, मोहन बाई कोठारी, सुनीता सकलेचा, कमलनयन चपलोत, डॉ. विपीन वागरेचा, राजेश धाकड़ ,रचना चपलोत, प्राची भटेवरा, प्रतिभा बुरड़ एवं हीरामणी ओरा शामिल रहे।
इन सभी तपस्वियों ने अपने तप और संयम से समाज को प्रेरित किया है।
भावुक माहौल में हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन अत्यंत भावुक वातावरण में हुआ।
सकल जैन श्री संघ की उपस्थिति में वर्षीतप आराधकों को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।
श्रद्धालुओं ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके मार्गदर्शन की कामना की।
आभार और भविष्य का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगियों, दानदाताओं और उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
राजेश सकलेचा, शरद जैन, अमित बम, दीपक गांग, कमलेश नागदा, सिद्धार्थ कांठेड, हर्षित नागदा, प्रथम काठेड एवं रितेश नागदा ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का धन्यवाद किया।
साथ ही यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक और प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन लगातार किया जाएगा।
निष्कर्ष
नागदा में आयोजित यह वर्षीतप आराधकों का सम्मान समारोह न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक आयोजन बनकर सामने आया।
इसने यह संदेश दिया कि तप, त्याग और संयम की परंपरा आज भी समाज में जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देने में सक्षम है।
