जीवदया अनुकंपा योजना ने पूरे किए 50 माह, सेवा का सफर पहुंचा 51वें माह में
Nagda – प्रमोद कुमार जैन की रिपोर्ट
: नगर में जैन समाज के युवाओं द्वारा संचालित जीवदया अनुकंपा योजना ने सेवा और समर्पण के 50 माह सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए हैं। अब यह पुनीत कार्य 51वें माह में प्रवेश कर गया है। संस्था के सदस्यों द्वारा लगातार निस्वार्थ भाव से जीवों की सेवा की जा रही है, जो समाज में मानवता और करुणा का प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।
मौसम की परवाह किए बिना जारी है सेवा
जीवदया अनुकंपा योजना के प्रभारी कुशल भंसाली ने बताया कि संस्था से जुड़े सदस्य जीवों की सेवा को अपना कर्तव्य और संकल्प मानकर निरंतर कार्य कर रहे हैं। मौसम की कठिन परिस्थितियां भी उनके सेवाभाव को प्रभावित नहीं कर पाती हैं। चाहे कड़ाके की ठंड हो, तेज बारिश हो या फिर भीषण गर्मी, टीम के सदस्य प्रतिदिन सुबह समय पर पहुंचकर जीवों की सेवा में जुट जाते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले 50 माह से लगातार चल रहे इस सेवा अभियान में सदस्यों ने कभी भी परिस्थितियों को बाधा नहीं बनने दिया। उनका उद्देश्य केवल जीवों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, देखभाल और उपचार की जिम्मेदारी निभाना भी है। पशु-पक्षियों के प्रति संवेदना और दया का भाव ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है।
कुशल भंसाली ने कहा कि धीरे-धीरे जीव सेवा संस्था से जुड़े सदस्यों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई है। नियमित सेवा कार्य करने से उन्हें आत्मिक संतोष और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलता है। टीम के सदस्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जीवों की सेवा के इस अभियान में समाज के लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। जनसहयोग और युवाओं की सकारात्मक सोच के कारण यह कार्य लगातार विस्तार ले रहा है। जीवदया अनुकंपा योजना का उद्देश्य भविष्य में भी इसी समर्पण भावना के साथ जीवों की सेवा जारी रखना है।
संस्था द्वारा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री की व्यवस्था कर पशु-पक्षियों तक पहुंचाई जाती है। इसमें करीब 40 लीटर दूध, 150 पैकेट बिस्किट, 10 किलो टोस्ट, 50 पिंडियां चारा, 2 किलो शक्कर व रवा तथा 5 किलो अनाज शामिल है। इसके अलावा मछलियों के लिए प्रतिदिन आटा, चना और राजगीरे के लड्डू की व्यवस्था भी की जाती है।
सदस्यों द्वारा यह सामग्री स्वयं अपने हाथों से जीवों तक पहुंचाई जाती है। इसके साथ ही घायल और बीमार पशुओं का उपचार करवाने का कार्य भी निरंतर किया जा रहा है। गायों की देखभाल के साथ-साथ उनके प्रसव के समय भी संस्था के सदस्य पूरी तत्परता से सहयोग करते हैं।

जनसहयोग से मिल रहा सेवा कार्य को बल
जीवदया अनुकंपा योजना की व्यवस्थाओं में समाज के लोगों का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। जनसहयोग के माध्यम से अन्न और आर्थिक सहायता प्राप्त होती है, जिससे सेवा कार्यों को लगातार आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
संस्था का उद्देश्य केवल जीवों को भोजन उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और देखभाल के प्रति समाज में संवेदनशीलता बढ़ाना भी है।
सेवाभावी सदस्यों का मिल रहा निरंतर सहयोग
इस सेवा कार्य में रवि काठेड़, निलेश चौधरी, शरद जैन, कमल जैन, मनीष चपलोद और आशीष पोखरना का विशेष योगदान मिल रहा है। वहीं कुशल भंसाली के साथ यशवंत धूपिया, सौरभ भंडारी, मनीष कटकानी, नितिन जैन बुड़ावन वाले और निलेश चपलोद भी प्रतिदिन कंधे से कंधा मिलाकर सेवा कार्य में जुटे हुए हैं।
सेवा और करुणा का बना उदाहरण
50 माह की इस सफल यात्रा में जीवदया अनुकंपा योजना ने यह साबित किया है कि सामूहिक प्रयास और सेवा भावना से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। संस्था से जुड़े युवा बिना किसी स्वार्थ के लगातार जीवों की रक्षा और सेवा में लगे हुए हैं।
नागदा क्षेत्र में यह अभियान अब केवल एक सेवा कार्य नहीं, बल्कि जीवों के प्रति संवेदना और दया का संदेश देने वाला आंदोलन बनता जा रहा है। आने वाले समय में भी संस्था इसी भावना के साथ जीव सेवा का कार्य निरंतर जारी रखने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।
