मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का संगठन सूत्र समाज को एकता और संगठन का संदेश देता है। इंदौर चातुर्मास को लेकर उमड़ी जनभावनाओं के बीच मुनि श्री ने 99 विचारों की एकता को समाज की असली शक्ति बताया।
मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का संगठन सूत्र: 99 विचारों की एकता ही समाज का असली संगठन
राजेश जैन दद्दू
इंदौर/गुना।
मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का संगठन सूत्र बना समाज के लिए प्रेरणा
मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का संगठन सूत्र इन दिनों जैन समाज में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। मां अहिल्या की धर्म नगरी इंदौर में आगामी चातुर्मास को लेकर उमड़ रही जनभावनाओं के बीच श्रमण संस्कृति के महाश्रमण, तीर्थ उद्धारक एवं जिन शासन के शेर निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने समाज को एकता और संगठन का अत्यंत व्यावहारिक संदेश दिया।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन शासन एकता संघ के मयंक जैन द्वारा पूछी गई जिज्ञासा का समाधान करते हुए मुनि श्री ने समाज के संगठन और उसके भविष्य पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज का कल्याण, विकास और उद्धार तभी संभव है जब व्यक्ति अपने अहंकार और व्यक्तिगत मतभेदों को पीछे छोड़कर संगठन और एकता के मार्ग पर आगे बढ़े।
प्रतिद्वंद्विता केवल विचारों में हो, मन में नहीं
सभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि समाज में किसी पद, जिम्मेदारी या चुनाव को लेकर विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है। लेकिन यह मतभेद मनभेद में नहीं बदलना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि किसी विषय को लेकर प्रतिस्पर्धा या चुनावी मुकाबला हो भी जाए, तो समाज, धर्म और संस्कृति से जुड़े बड़े कार्यों में सभी को एक साथ खड़ा दिखाई देना चाहिए।
मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति के विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन समाज का हित सर्वोपरि होना चाहिए। यदि समाज के लोग व्यक्तिगत मतभेदों को लेकर अलग-अलग समूहों में बंट जाएंगे, तो समाज की सामूहिक शक्ति कमजोर हो जाएगी।
99 विचारों की एकता ही समाज का असली संगठन
मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का संगठन सूत्र
अपने उद्बोधन के दौरान मुनि श्री ने संगठन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सूत्र दिया।उन्होंने कहा—
“यदि किसी एक विचार को लेकर हमारे बीच मतभेद है, तो उस मतभेद को केवल उसी एक बिंदु तक सीमित रखें। बाकी के जिन 99 विचारों पर हम सब एक मत और एक हैं, उसके लिए हमें हमेशा साथ रहना चाहिए। एक विचार के मतभेद के कारण हम अपने बाकी के 99 विचारों में मतभेद पैदा न करें।”
मुनि श्री ने कहा कि तात्कालिक रूप से विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन सामाजिक और धार्मिक कार्यों में एकजुटता हमेशा बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यही संगठन की सबसे बड़ी पहचान है और यही किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति होती है।
दुश्मन के साथ भी बैठना सीखें
संगठन का वास्तविक अर्थ समझाया
मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने संगठन की परिभाषा को और व्यापक बनाते हुए कहा कि संगठन केवल मित्रों के साथ बैठने का नाम नहीं है।उन्होंने कहा कि यदि कोई विरोधी या दुश्मन भी हो, तो समाज और धर्म के हित में उसके साथ बैठना सीखना चाहिए।
मुनि श्री ने कहा कि ऐसा करना व्यक्तिगत मित्रता का प्रमाण नहीं होता, बल्कि यह समाज को यह संदेश देता है कि जब धर्म, संस्कृति और समाज की बात आएगी, तब सभी लोग एकजुट होकर खड़े होंगे।उन्होंने कहा कि समाज की शक्ति उसकी संख्या में नहीं बल्कि उसकी एकता में होती है।
इंदौर चातुर्मास के लिए उमड़ी जनभावनाएँ
मुनि श्री के चरणों में अर्पित की त्रिवार नमोस्तु
कार्यक्रम के दौरान इंदौर से दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के आह्वान पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाजजन उपस्थित हुए।सभी ने मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के चरणों में त्रिवार नमोस्तु अर्पित करते हुए इंदौर में आगामी चातुर्मास की मंगल कामना की।इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिला।समाज के लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि मुनि श्री का चातुर्मास इंदौर में होता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक जागरण का केंद्र बनेगा।
आनंद नवीन गोधा ने व्यक्त की भावनाएँ
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर के सर्वमान्य अध्यक्ष आनंद नवीन गोधा एवं अन्य प्रतिनिधियों ने भावुक होते हुए कहा कि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की अमृतमयी वाणी आज के समय में समाज को एकजुट और सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को जिस नेतृत्व, मार्गदर्शन और संगठन की आवश्यकता है, वह मुनि श्री के विचारों में स्पष्ट दिखाई देता है।
समाज ने लिया संगठन सूत्र अपनाने का संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों और विभिन्न जैन संगठनों के पदाधिकारियों ने मुनि श्री द्वारा बताए गए संगठन सूत्र को अपने जीवन और समाज में अपनाने का संकल्प लिया।सभी ने माना कि यदि समाज के लोग 99 विचारों की एकता को प्राथमिकता देंगे और एक मतभेद को पूरे समाज पर हावी नहीं होने देंगे, तो समाज और अधिक मजबूत तथा संगठित बन सकेगा।
निष्कर्ष
मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का संगठन सूत्र केवल जैन समाज के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। आज जब छोटी-छोटी बातों पर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं, तब “99 विचारों की एकता” का यह संदेश सामाजिक समरसता, संगठन और विकास का मार्ग दिखाता है।इंदौर चातुर्मास को लेकर उमड़ी जनभावनाएँ और मुनि श्री के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास यह दर्शाता है कि उनके विचार समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।
