MP Student Union Elections: मध्यप्रदेश में सितंबर 2026 में होंगे छात्र संघ चुनाव, करीब 8 साल बाद फिर लौटेगी कैंपस राजनीति
MP Student Union Elections: मध्यप्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक बार फिर छात्र राजनीति सक्रिय होने जा रही है। प्रदेश में करीब आठ साल बाद छात्र संघ चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने छात्र संघों का गठन चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस आदेश के बाद राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में लंबे समय से बंद पड़ी छात्र राजनीति को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब प्रदेश में सितंबर 2026 में छात्र संघ चुनाव आयोजित किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में छात्र संघ गठन की तारीख को भी शामिल कर लिया है। कोर्ट ने इस कैलेंडर को रिकॉर्ड पर लेते हुए सरकार को तय समय के अनुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश से साफ हुआ चुनाव का रास्ता
छात्र संघ चुनाव को लेकर लंबे समय से मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लंबित था। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में छात्र संघ चुनाव कब कराए जाएंगे।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपना पूरा एकेडमिक कैलेंडर पेश करे, जिसमें छात्र संघ चुनाव की संभावित तारीख और प्रक्रिया की जानकारी हो। इसके बाद 3 अगस्त को हुई सुनवाई में उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026-27 का पूरा शैक्षणिक कैलेंडर अदालत के सामने प्रस्तुत किया।
इस कैलेंडर में प्रवेश प्रक्रिया, कक्षाएं, परीक्षाएं, अवकाश, सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ छात्र संघ गठन का कार्यक्रम भी शामिल था। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि सितंबर 2026 में छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे और इसके बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से छात्र संघों का गठन होगा।
आठ साल बाद फिर सक्रिय होगी छात्र राजनीति
मध्यप्रदेश में छात्र संघ चुनाव पिछले कई वर्षों से नहीं हुए हैं। चुनाव प्रक्रिया बंद होने के कारण कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र संगठनों की सक्रियता सीमित हो गई थी।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद छात्र संगठनों को फिर से लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिनिधित्व हासिल करने का अवसर मिलेगा। छात्र अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर सकेंगे और कॉलेज स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक छात्र मुद्दों को उठाने के लिए एक आधिकारिक मंच तैयार होगा।
छात्र राजनीति को हमेशा से युवाओं के नेतृत्व विकास और लोकतांत्रिक भागीदारी से जोड़कर देखा जाता रहा है। ऐसे में चुनाव की वापसी को उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
सितंबर 2026 में होंगे चुनाव
उच्च शिक्षा विभाग के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार जुलाई 2026 में प्रदेश के कॉलेजों में प्रवेश उत्सव आयोजित किया जाएगा। इसके बाद सितंबर 2026 में छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कैलेंडर के मुताबिक नवंबर 2026 तक खेल प्रतियोगिताएं, एनसीसी, एनएसएस, युवा उत्सव और अन्य छात्र गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। वहीं फरवरी 2027 के पहले सप्ताह में स्नेह सम्मेलन, वार्षिकोत्सव, पुरस्कार वितरण समारोह और वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन किया जाएगा।
इस तरह सरकार ने पूरे शैक्षणिक वर्ष की गतिविधियों को पहले से निर्धारित कर दिया है, जिसमें छात्र संघ चुनाव को भी अहम स्थान दिया गया है।
पढ़ाई और परीक्षा का कार्यक्रम भी तय
उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए पढ़ाई और परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल भी तैयार किया है। इसके अनुसार स्नातकोत्तर (PG) के पहले और तीसरे सेमेस्टर की कक्षाएं 1 जुलाई 2026 से शुरू होकर 12 नवंबर 2026 तक संचालित होंगी।
छात्रों के आंतरिक मूल्यांकन यानी इंटरनल एग्जाम अगस्त के पहले सप्ताह से सितंबर के अंतिम सप्ताह तक आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 20 अक्टूबर से 5 नवंबर तक प्रैक्टिकल परीक्षाएं होंगी।
सेमेस्टर परीक्षाएं 18 नवंबर से 10 दिसंबर 2026 तक आयोजित की जाएंगी, जबकि परीक्षा परिणाम 31 दिसंबर तक जारी करने का लक्ष्य रखा गया है।
दूसरे और चौथे सेमेस्टर की शैक्षणिक गतिविधियां दिसंबर 2026 से अप्रैल 2027 तक चलेंगी। इन परीक्षाओं के परिणाम जून 2027 तक घोषित किए जाएंगे।
कानून व्यवस्था को लेकर कोर्ट ने दिया निर्देश
सुनवाई के दौरान कुछ विश्वविद्यालयों की ओर से यह आशंका जताई गई थी कि छात्र संघ चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था की चुनौती सामने आ सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता ली जा सकती है, लेकिन कानून व्यवस्था के डर से चुनाव प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।
अदालत ने कहा कि छात्र संघों का गठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए और इसके लिए चुनाव ही सबसे उचित माध्यम है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि तय कार्यक्रम के अनुसार सितंबर 2026 में चुनाव कराए जाएं।
कॉलेज परिसरों में बढ़ेगी राजनीतिक गतिविधियां
छात्र संघ चुनाव की घोषणा के बाद प्रदेश के कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। विभिन्न छात्र संगठन चुनाव की तैयारी में जुट सकते हैं और छात्र मुद्दों को लेकर अभियान शुरू कर सकते हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि चुनाव होने से छात्रों को अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए मजबूत मंच मिलेगा। वहीं, शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद मध्यप्रदेश में छात्र संघ चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। सितंबर 2026 में होने वाले चुनाव प्रदेश की छात्र राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकते हैं।
