मध्य प्रदेश में IAS और IPS के खाली पदों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा है। जानिए क्यों एमपी आईएएस रिक्त पदों में देश में दूसरे नंबर पर है और क्या है कांग्रेस की मांग।
MP देश में IAS रिक्त पदों में दूसरे, IPS में चौथे नंबर पर: उमंग सिंघार ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल, खाली पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग
भोपाल। मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान शुरू हो गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश में IAS और IPS के रिक्त पदों को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि MP देश में IAS रिक्त पदों में दूसरे और IPS रिक्त पदों में चौथे नंबर पर है।
कांग्रेस नेता ने इस स्थिति को सिस्टम की खुली विफलता करार देते हुए केंद्र और राज्य सरकार से खाली पड़े सभी पदों पर तत्काल नियुक्ति करने की मांग की है। उनका आरोप है कि अधिकारियों की भारी कमी ने प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं और कानून-व्यवस्था “भगवान भरोसे” चल रही है।
IAS-IPS रिक्तियों का आंकड़ा: MP की स्थिति क्या है?
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFS) में करीब 2,834 पद खाली पड़े हैं। यह आंकड़ा प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ी कमी को दर्शाता है। मध्य प्रदेश की स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि राज्य कई मामलों में देश में अग्रणी है।
मुख्य बिंदु:
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IAS रिक्त पद: मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। सबसे ज्यादा खाली पद उत्तर प्रदेश में हैं।
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IPS रिक्त पद: मध्य प्रदेश चौथे स्थान पर है।
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कुल रिक्तियां: प्रदेश में अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFS) के करीब 195 से 203 पद खाली बताए जा रहे हैं।
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देशभर का आंकड़ा: देशभर में IAS में लगभग 18.9% और IPS में लगभग 9.9% पद खाली हैं। संख्यात्मक रूप से यह IAS के 1300 पद और IPS के 505 पद हैं।
ये आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों की कमी गंभीर है। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि यह कमी जिला प्रशासन, पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को सीधे प्रभावित कर रही है।
उमंग सिंघार का आरोप: “सिस्टम की खुली विफलता”
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। उन्होंने कहा, “MP देश में IAS रिक्त पदों में दूसरे, IPS में चौथे नंबर पर है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की खुली विफलता का प्रमाण है।”सिंघार ने आगे कहा कि भाजपा सरकार में गृह मंत्री के पास कानून-व्यवस्था की सुध लेने की फुर्सत नहीं है। उन्होंने कहा, “प्रदेश में लगातार बढ़ते अपराध इस बात का प्रमाण हैं कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं। अधिकारियों की भारी कमी ने हालात और बदतर कर दिए हैं और सीमित अधिकारियों पर अत्यधिक दबाव बन रहा है।”कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि आरक्षित वर्गों के लिए निर्धारित कई पद वर्षों से खाली पड़े हैं, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में प्रदेश की कानून-व्यवस्था “भगवान भरोसे” चल रही है।
रिक्त पदों से कानून-व्यवस्था पर क्या असर?
किसी भी राज्य में IAS और IPS अधिकारी प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। जिला दंडाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) जैसे संवेदनशील पदों पर अधिकारियों की कमी का सीधा असर जनता पर पड़ता है।
इस कमी के कारण:
- अपराध पर प्रभावी नियंत्रण में कठिनाई: सीमित अधिकारियों पर कई जिलों की जिम्मेदारी आ जाती है, जिससे अपराध पर नियंत्रण और जांच प्रभावित होती है।
- प्रशासनिक सुस्ती: जनता की समस्याओं का निस्तारण धीमा हो जाता है। विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है।
- अधिकारियों पर बढ़ता दबाव: कम संसाधनों में काम करने के कारण अधिकारी तनाव में रहते हैं, जिससे उनके निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है।
- कानून-व्यवस्था में ढील: अपराधियों को सक्रिय होने का मौका मिलता है, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
प्रमोशन में देरी: क्यों अटकी हैं नियुक्तियां?
सवाल उठता है कि आखिर इतने सारे पद खाली क्यों हैं? विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। प्रमोशन में देरी को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय की कमी के कारण राज्य पुलिस सेवा (SPS) से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में प्रोन्नति के मामले लंबित पड़े रहते हैं।इसके अलावा, सेवा नियमों में जटिलताएं, विभागीय जांच और केंद्र सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में देरी भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इन मामलों में जानबूझकर देरी कर रही है, जबकि भाजपा सरकार का कहना है कि वे नियमानुसार प्रक्रिया को पूरा कर रहे हैं।
कांग्रेस की मांग: तत्काल भरें खाली पद
इस गंभीर मुद्दे को देखते हुए उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खाली पड़े IAS और IPS पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए।
कांग्रेस की मुख्य मांगें:
- तीन महीने के भीतर सभी रिक्त पदों को भरा जाए।
- प्रोन्नति में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए केंद्र से बातचीत की जाए।
- आरक्षित वर्गों के लिए निर्धारित पदों को प्राथमिकता से भरा जाए।
- गृह विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
सिंघार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएगी और प्रदेश में सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों की कमी अब सिर्फ एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रदेश की कानून-व्यवस्था और जनप्रशासन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। MP देश में IAS रिक्त पदों में दूसरे, IPS में चौथे नंबर पर होने का आंकड़ा सरकार के लिए एक चेतावनी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह विपक्ष की इस मांग पर जल्द से जल्द रिक्त पदों को भर पाती है।
