MP में शिक्षा विभाग में 4.37 करोड़ रुपये का लघु निर्माण घोटाला 7 स्कूल प्राचार्यों समेत 14 लोगों पर कार्रवाई
MP के मैहर जिले में शिक्षा विभाग में सामने आए 4.37 करोड़ रुपये के लघु निर्माण घोटाले ने राज्य के शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह सामने आया है कि विभिन्न स्कूलों में किए जाने वाले लघु निर्माण, पार्किंग शेड और अन्य संरचनात्मक कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का भुगतान किया गया, लेकिन वास्तविक कार्य पूरी तरह से अनुपस्थित था। इस खुलासे के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए 7 प्राचार्यों को निलंबित किया है। इसके अलावा इस घोटाले में शामिल कुल 14 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, जबकि तीनों निर्माण फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
कार्रवाई की शुरुआत और निलंबन का सिलसिला
मैहर कलेक्टर ने 2 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल को विस्तृत जांच प्रतिवेदन भेजा और इसमें आरोपी प्राचार्यों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा। यह घोटाला उस राशि से जुड़ा है, जो 1 सितंबर 2025 को विभिन्न विद्यालयों में लघु निर्माण, पार्किंग शेड और अन्य संरचनात्मक कार्यों के लिए स्वीकृत की गई थी। इस राशि को स्कूलों की एमएमडीसी को इस शर्त पर जारी किया गया था कि सभी सरकारी नियमों का पालन किया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत में कार्य पूरी तरह अनुपस्थित था और भुगतान पूरा कर दिया गया।
घोटाले पर कार्रवाई की शुरुआत हाई स्कूल सुलखमा से हुई, जहां प्रभारी प्राचार्य रामलाल साकेत को निलंबित किया गया। इसके बाद रामनगर के सांदीपनि विद्यालय के चपरासी विनोद पटेल, बीईओ और प्राचार्य मिरगौती संतोष कुमार सिंह, और अन्य स्कूलों के प्राचार्यों पर भी क्रमशः कार्रवाई की गई। कार्रवाई के कारण रामनगर विकासखंड के कई स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था अस्थायी रूप से प्रभावित रही।
निलंबित प्राचार्यों और भुगतान की जानकारी
सभी निलंबित प्राचार्यों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये का भुगतान बिना कार्य पूरा किए किया। निलंबित प्राचार्यों में सात प्रमुख नाम हैं और उनके स्कूलों के भुगतान विवरण इस प्रकार हैं:
- हाई स्कूल गोविंदपुर: 22,60,303 रुपये (प्राचार्य मथुरा प्रसाद वर्मा)
- हायर सेकेंडरी गोरसरी: 24,10,448 रुपये (प्राचार्य गुलजार सिंह टेकाम)
- हायर सेकेंडरी देवराजनगर: 24,10,376 रुपये (प्राचार्य राम लखन रावत)
- गुलबार गुजारा: 22,79,991 रुपये (प्राचार्य शिवलाल बैस)
- हायर सेकेंडरी हर्रई: 21,53,950 रुपये (प्राचार्य सियंबर सिंह)
- हायर सेकेंडरी देवदहा: 24,10,367 रुपये (प्राचार्य लक्ष्मण शुक्ला)
जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश भुगतान वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर, भोपाल, श्री महाकाल ट्रेडर्स, सतना, और श्री रुद्र इंटरप्राइजेज, मैहर को किए गए। कई विद्यालयों से 23–24 लाख रुपये तक की राशि एक ही पैटर्न में जारी की गई, जिससे पूर्व नियोजित घोटाले की आशंका और बढ़ गई।
केंद्राध्यक्ष और सहायक केंद्राध्यक्ष पद से हटाए गए प्राचार्य
घोटाले में लिप्त प्राचार्यों को उनके केंद्राध्यक्ष और सहायक केंद्राध्यक्ष के दायित्वों से भी हटा दिया गया है। वहीं, देवरा मोलहाई की प्रभारी प्राचार्य रजनी पुरवार को जांच के दौरान बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाने पर जिला पंचायत सीईओ ने निलंबित किया। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घोटाले में शामिल सभी लोग न केवल स्कूल प्रशासन से, बल्कि परीक्षा और अन्य जिम्मेदारियों से भी दूर रहें।
प्रशासन की समीक्षा और गंभीर सवाल
इस घोटाले ने राज्य के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला यह दर्शाता है कि बड़ी राशि स्वीकृत होने के बावजूद, उचित निगरानी और नियमों का पालन नहीं किया गया। मैहर कलेक्टर और रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की।
इस घोटाले से जुड़े कई स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था अस्थिर हो गई, क्योंकि निलंबन और जांच के चलते कई प्रधानाध्यापक और शिक्षक temporarily अनुपस्थित रहे। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
भविष्य की कार्रवाई
जांच अधिकारियों ने बताया कि तीनों निर्माण फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह कदम भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने और शिक्षा विभाग में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए, शिक्षा विभाग ने भी अपने आंतरिक निरीक्षण तंत्र को मजबूत करने की योजना बनाई है। आगामी समय में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों में नियमित ऑडिट और वित्तीय निगरानी बढ़ाई जाएगी।
निष्कर्ष
MP में यह घोटाला न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बड़े पैमाने पर स्वीकृत राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और प्राचार्यों तथा अधिकारियों के निलंबन ने यह संदेश दिया है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस मामले ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सरकारी धन के सही उपयोग और स्कूलों की संरचनात्मक परियोजनाओं की निगरानी को मजबूत करने की आवश्यकता है। आगामी समय में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े नियम और निगरानी तंत्र लागू किए जाएंगे।
