MP Samvida Employees New Rule: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अनुबंध में प्रावधान नहीं तो संविदा कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं होगा
MP Samvida Employees New Rule
मध्यप्रदेश के लाखों Samvida कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत देने वाला फैसला सामने आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी संविदा कर्मचारी के नियुक्ति अनुबंध (Contract Agreement) में तबादले (Transfer) का कोई प्रावधान नहीं है, तो सेवा अवधि के दौरान उसका ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि संविदा नियुक्ति पूरी तरह अनुबंध आधारित होती है और सरकार अनुबंध में उल्लेखित शर्तों से बाहर जाकर कर्मचारी का स्थानांतरण नहीं कर सकती।
यह फैसला प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत दो से ढाई लाख संविदा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्मचारी संगठनों ने भी कोर्ट के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने वाला फैसला बताया है।
हाईकोर्ट ने ट्रांसफर आदेश किए निरस्त
जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने मुकेश कुमार उपाध्याय सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए संविदा कर्मचारियों के ट्रांसफर आदेशों को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब नियुक्ति अनुबंध में स्थानांतरण की कोई शर्त ही नहीं है, तब सेवा अवधि के बीच कर्मचारी का ट्रांसफर करना कानून और अनुबंध दोनों के विरुद्ध माना जाएगा।
सरकार का तर्क कोर्ट ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने 24 फरवरी 2020 को जारी एक परिपत्र (Circular) का हवाला देते हुए ट्रांसफर आदेशों को उचित ठहराने की कोशिश की। सरकार का कहना था कि प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर संविदा कर्मचारियों का तबादला किया जा सकता है।
हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति स्थायी सरकारी कर्मचारियों से पूरी तरह अलग होती है और उनके अधिकार एवं दायित्व नियुक्ति अनुबंध की शर्तों से तय होते हैं।
अनुबंध की शर्तों का पालन जरूरी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविदा कर्मचारी और नियुक्तिकर्ता के बीच किया गया अनुबंध दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है। यदि अनुबंध में ट्रांसफर का प्रावधान नहीं है, तो सरकार सेवा अवधि के दौरान एकतरफा स्थानांतरण का आदेश जारी नहीं कर सकती।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी असाधारण परिस्थिति का हवाला देकर भी अनुबंध की मूल भावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बीच सेवा अवधि में ट्रांसफर गैर-कानूनी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविदा कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त होने से पहले किया गया ट्रांसफर अनुबंध की मूल भावना के विपरीत है। इसलिए ऐसे स्थानांतरण आदेश पूरी तरह गैर-कानूनी माने जाएंगे।
इस टिप्पणी को संविदा कर्मचारियों के अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न विभागों द्वारा संविदा कर्मचारियों के तबादले किए जाते रहे हैं।
भविष्य में सरकार जोड़ सकती है ट्रांसफर की शर्त
हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण वैधानिक विकल्प भी दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद यदि सरकार नए या नवीनीकृत (Renewed) अनुबंधों में ट्रांसफर संबंधी शर्त जोड़ना चाहती है, तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र होगी।
अर्थात भविष्य में नियुक्त होने वाले या अनुबंध का नवीनीकरण कराने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार नई शर्तें लागू कर सकती है।
वर्तमान कर्मचारियों को मिलेगी राहत
हाईकोर्ट के फैसले का सबसे बड़ा लाभ वर्तमान में कार्यरत उन संविदा कर्मचारियों को मिलेगा जिनके अनुबंध में ट्रांसफर का कोई उल्लेख नहीं है।
ऐसे कर्मचारियों का कार्यकाल पूरा होने तक विभाग उन्हें दूसरे जिले या कार्यालय में स्थानांतरित नहीं कर सकेगा।
कर्मचारी संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि अदालत का निर्णय पूरी तरह न्यायसंगत है और इससे प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारियों को राहत मिलेगी। उनके अनुसार लंबे समय से कर्मचारी यह मांग कर रहे थे कि नियुक्ति अनुबंध में ट्रांसफर का प्रावधान नहीं होने के बावजूद विभाग मनमाने तरीके से तबादले कर रहे हैं।
भविष्य में नई शर्त बनी तो बढ़ेंगी परेशानियां
रमेश राठौर ने यह भी कहा कि यदि सरकार भविष्य के अनुबंधों में ट्रांसफर की अनिवार्य शर्त जोड़ती है, तो इससे संविदा कर्मचारियों की आर्थिक समस्याएं काफी बढ़ सकती हैं।
उन्होंने बताया कि अधिकांश संविदा कर्मचारियों का वेतन नियमित सरकारी कर्मचारियों की तुलना में काफी कम है। कई कर्मचारियों को मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता और अन्य सुविधाएं भी नहीं मिलती हैं।
ऐसी स्थिति में यदि उनका दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया जाता है, तो उनके लिए परिवार और नौकरी दोनों का संतुलन बनाना मुश्किल हो जाएगा।
GAD से स्पष्ट नीति बनाने की मांग
भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के प्रदेश संयोजक दिनेश सिंह तोमर ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) अब तक दो बार संविदा कर्मचारियों को लेकर नीति बना चुका है, लेकिन ट्रांसफर सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।
उनके अनुसार अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर अलग-अलग नियम बनाकर संविदा कर्मचारियों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं।
ग्रामीण विकास विभाग ने तैयार किया ड्राफ्ट
दिनेश सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश ग्रामीण विकास विभाग ने 18 जून 2026 को एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें संविदा कर्मचारियों के ट्रांसफर का भी उल्लेख किया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ट्रांसफर की शर्त लागू करनी है, तो सरकार को पहले कर्मचारियों को उचित वेतन, मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
प्रदेश में दो से ढाई लाख संविदा कर्मचारी
अनुमान के अनुसार मध्यप्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, मिशनों और परियोजनाओं में करीब दो से ढाई लाख संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं।
इन कर्मचारियों की नियुक्ति अलग-अलग अनुबंधों के आधार पर होती है, जिसके कारण कई बार सेवा शर्तों को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाते हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार को सभी संविदा कर्मचारियों के लिए एक समान और स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए ताकि भविष्य में न्यायालय जाने की आवश्यकता न पड़े।
कोर्ट के फैसले का क्या होगा प्रभाव?
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद विभागों को संविदा कर्मचारियों के ट्रांसफर आदेश जारी करने से पहले उनके अनुबंध की शर्तों का पालन करना होगा।
यदि किसी अनुबंध में स्थानांतरण का प्रावधान नहीं होगा, तो विभाग मनमाने तरीके से ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। वहीं भविष्य में सरकार यदि नई नीति लागू करती है, तो उसे नए अनुबंधों में स्पष्ट रूप से शामिल करना होगा।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि नियुक्ति अनुबंध में ट्रांसफर का प्रावधान न होने पर सेवा अवधि के दौरान स्थानांतरण नहीं किया जा सकता। साथ ही सरकार को भविष्य में नए अनुबंधों में ट्रांसफर संबंधी शर्त जोड़ने की स्वतंत्रता भी दी गई है।
अब सभी की नजर राज्य सरकार की आगामी संविदा नीति पर रहेगी। यदि सरकार नई ट्रांसफर व्यवस्था लागू करती है, तो कर्मचारियों की सुविधाओं, वेतन और भत्तों से जुड़े मुद्दों पर भी व्यापक निर्णय लेने की आवश्यकता होगी।
