MP Police Promotion New Rule: SAF कर्मचारियों के लिए फील्ड ड्यूटी हो सकती है अनिवार्य, बिना मैदानी अनुभव अटक सकता है प्रमोशन
MP Police SAF Promotion New Rule Update: मध्यप्रदेश पुलिस की विशेष सशस्त्र बल इकाई यानी SAF में पदोन्नति की व्यवस्था बदलने की तैयारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार पुलिस मुख्यालय ने एसएएफ पदोन्नति नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। प्रस्ताव स्वीकार होने पर केवल कार्यालयीन अथवा गैर-मैदानी पदों पर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति से पहले निर्धारित फील्ड ड्यूटी पूरी करनी पड़ सकती है।
इस संभावित बदलाव का उद्देश्य पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के पास पर्याप्त व्यावहारिक, ऑपरेशनल और मैदानी अनुभव सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। हालांकि, अभी अंतिम नियम जारी नहीं हुआ है। इसलिए फील्ड ड्यूटी की अवधि, पात्र पदों और लागू होने की तारीख की आधिकारिक पुष्टि अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगी।
क्या है पुलिस मुख्यालय का प्रस्ताव?
पुलिस मुख्यालय द्वारा एसएएफ के प्रचलित पदोन्नति नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत पदोन्नति के लिए वरिष्ठता, योग्यता और सेवा अवधि के साथ फील्ड अनुभव को भी आवश्यक शर्त बनाया जा सकता है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो एसएएफ की कार्यालयीन शाखाओं, मुख्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों या अन्य गैर-मैदानी इकाइयों में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों को अगले पद पर पदोन्नति से पहले मैदान में सेवाएं देनी पड़ सकती हैं।
इसका मतलब यह होगा कि केवल निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर लेना पदोन्नति के लिए पर्याप्त नहीं होगा। कर्मचारी को यह भी प्रमाणित करना पड़ सकता है कि उसने नियमों में निर्धारित अवधि तक फील्ड अथवा ऑपरेशनल ड्यूटी की है।
क्यों बदले जा रहे हैं SAF के पदोन्नति नियम?
विशेष सशस्त्र बल की जिम्मेदारियां सामान्य कार्यालयीन कार्यों से अलग होती हैं। एसएएफ की कंपनियों और बटालियनों को कानून-व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा, चुनाव ड्यूटी, विशेष अभियान, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और आपात परिस्थितियों में तैनात किया जाता है।
ऐसे में विभाग का मानना हो सकता है कि उच्च पद पर पहुंचने वाले अधिकारी के पास वास्तविक मैदानी परिस्थितियों में काम करने का अनुभव होना चाहिए। इससे वह अधीनस्थ बल का नेतृत्व बेहतर ढंग से कर सकेगा और कठिन परिस्थितियों में व्यावहारिक निर्णय लेने में सक्षम होगा।
मैदानी अनुभव की अनिवार्यता लागू होने पर पदोन्नति को केवल वरिष्ठता से जोड़ने के बजाय नेतृत्व क्षमता तथा ऑपरेशनल अनुभव से भी जोड़ा जा सकेगा।
किनका प्रमोशन प्रभावित हो सकता है?
प्रस्ताव का सबसे अधिक असर उन एसएएफ अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिन्होंने अपनी सेवा का बड़ा हिस्सा कार्यालय, मुख्यालय, प्रशिक्षण केंद्र अथवा गैर-फील्ड शाखाओं में बिताया है।
यदि नई व्यवस्था में न्यूनतम फील्ड सेवा तय की जाती है तो ऐसे कर्मचारियों की पदोन्नति तब तक रोकी जा सकती है, जब तक वे आवश्यक मैदानी कार्यकाल पूरा नहीं कर लेते। यह शर्त किन पदों और संवर्गों पर लागू होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी संशोधित नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पहले से पदोन्नति के लिए विचाराधीन कर्मचारियों, विभागीय पदोन्नति समिति के सामने पहुंच चुके मामलों और जल्द सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए अलग संक्रमणकालीन व्यवस्था बनाई जा सकती है। फिलहाल ऐसी किसी छूट की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या कार्यालयीन पदस्थापना कर्मचारियों की गलती है?
प्रस्ताव को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कर्मचारी की पदस्थापना विभाग द्वारा की जाती है। कई बार कोई कर्मचारी अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि प्रशासनिक आदेश के कारण वर्षों तक मुख्यालय या कार्यालय में काम करता है।
ऐसी स्थिति में फील्ड अनुभव पूरा नहीं होने के आधार पर पदोन्नति रोकना विवाद का कारण बन सकता है। कर्मचारी संगठनों की ओर से यह मांग उठ सकती है कि नई शर्त लागू करने से पहले प्रत्येक पात्र कर्मचारी को फील्ड पोस्टिंग का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
यदि विभाग समय पर फील्ड तैनाती उपलब्ध नहीं कराता तो उसकी वजह से कर्मचारी के करियर को नुकसान नहीं होना चाहिए। प्रस्ताव को अंतिम रूप देते समय इस पहलू पर स्पष्ट प्रावधान आवश्यक होगा।
वर्ष 2012 के नियमों में संशोधन की तैयारी
जानकारी के अनुसार एसएएफ की पदोन्नति व्यवस्था से जुड़े वर्ष 2012 के नियमों में संशोधन प्रस्तावित है। नए प्रावधानों में फील्ड ड्यूटी को पदोन्नति की अनिवार्य पात्रता से जोड़ा जा सकता है।
हालांकि, प्रस्ताव का आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होने के कारण अभी यह स्पष्ट नहीं है कि फील्ड ड्यूटी कितने समय की होगी। यह भी साफ नहीं है कि पूर्व में की गई मैदानी सेवा मान्य होगी या नियम लागू होने के बाद नई अवधि पूरी करनी पड़ेगी।
इसी तरह मेडिकल आधार पर कार्यालयीन पदस्थापना पाने वाले कर्मचारियों, महिला कर्मियों, प्रशिक्षण शाखा के कर्मचारियों और विशेष परिस्थितियों में गैर-मैदानी ड्यूटी करने वालों को छूट मिलेगी या नहीं, इसका निर्णय अंतिम नियमों में होगा।
पदोन्नति से पहले हो सकती है सर्विस रिकॉर्ड की जांच
नई व्यवस्था मंजूर होने पर विभागीय पदोन्नति समिति कर्मचारी की वरिष्ठता और गोपनीय चरित्रावली के साथ उसके संपूर्ण पदस्थापना रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है।
इस रिकॉर्ड से पता लगाया जाएगा कि कर्मचारी ने किन इकाइयों में सेवा दी, उसकी मैदानी तैनाती कितनी रही और उसने आवश्यक ऑपरेशनल दायित्व पूरे किए या नहीं। फील्ड सेवा पूरी नहीं होने पर उसका नाम पदोन्नति के लिए रोककर बाद की सूची में शामिल किया जा सकता है।
पुलिस विभाग को इसके लिए फील्ड ड्यूटी की स्पष्ट परिभाषा तय करनी होगी। कानून-व्यवस्था, चुनाव, वीआईपी सुरक्षा, विशेष अभियान, नक्सल प्रभावित क्षेत्र और बटालियन में सक्रिय तैनाती में से कौन-सी सेवाएं फील्ड अनुभव में गिनी जाएंगी, यह अधिसूचना में स्पष्ट होना जरूरी है।
मैदानी अनुभव से क्या लाभ होगा?
विभागीय दृष्टि से फील्ड अनुभव को पदोन्नति से जोड़ने के कई लाभ बताए जा सकते हैं। मैदानी परिस्थितियों में काम करने वाला अधिकारी जवानों की समस्याओं, सुरक्षा चुनौतियों और ऑपरेशनल आवश्यकताओं को बेहतर समझता है।
वरिष्ठ पदों पर पहुंचने के बाद ऐसे अधिकारियों को बल प्रबंधन, तैनाती, अनुशासन और आपात स्थिति में निर्णय लेने में व्यावहारिक अनुभव का लाभ मिल सकता है। इससे केवल कार्यालयीन कार्य करने और मैदान में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास भी किया जा सकता है।
कर्मचारियों में क्यों बढ़ सकती है चिंता?
नई शर्त लागू होने पर लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को चिंता हो सकती है। जिनकी सेवा अवधि कम बची है, उनके लिए आवश्यक फील्ड कार्यकाल पूरा करना कठिन हो सकता है। इसके अलावा सीमित फील्ड पदों के कारण सभी पात्र कर्मचारियों को समय पर तैनाती देना भी विभाग के लिए चुनौती होगी।
कर्मचारी संगठन वरिष्ठता सूची, पूर्व सेवा की गणना, फील्ड पोस्टिंग उपलब्ध कराने और विशेष परिस्थितियों में छूट की मांग कर सकते हैं। अंतिम नियम से पहले विभाग को इन व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना होगा।
अभी लागू नहीं हुआ है नया नियम
पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि नई पदोन्नति व्यवस्था तत्काल लागू हो गई है। प्रस्ताव की गृह विभाग और राज्य सरकार के स्तर पर समीक्षा होगी। आवश्यक संशोधन के बाद मंजूरी और आधिकारिक अधिसूचना जारी की जा सकती है।
जब तक अंतिम अधिसूचना जारी नहीं होती, पदोन्नति की प्रक्रिया मौजूदा नियमों और लागू सरकारी निर्देशों के आधार पर ही संचालित होगी। एसएएफ अधिकारियों और कर्मचारियों को अपुष्ट सोशल मीडिया संदेशों के बजाय पुलिस मुख्यालय तथा गृह विभाग के आधिकारिक आदेश का इंतजार करना चाहिए।
