MP Health Department PF Fraud: 53 करोड़ से ज्यादा के फर्जीवाड़े का आरोप, आउटसोर्स कर्मचारियों का PF जमा नहीं
कंप्यूटर ऑपरेटर, सुरक्षा गार्ड, वार्ड बॉय और रसोइयों जैसे कर्मचारियों के PF में अनियमितता; फर्जी एडिटेड चालानों और बिना सत्यापन भुगतान के आरोप
भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) खातों में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर, सुरक्षा गार्ड, वार्ड बॉय, रसोइए और अन्य छोटे कर्मचारियों के वेतन से PF की राशि काटे जाने के बावजूद करोड़ों रुपए संबंधित खातों में जमा नहीं किए गए।
उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया गया है कि वर्ष 2022 से मई 2026 के बीच चार प्रमुख आउटसोर्स कंपनियों से जुड़े मामलों में कुल 53 करोड़ 81 लाख 12 हजार 360 रुपए की PF राशि को लेकर गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन से PF अंशदान काटने के साथ सरकार से मिलने वाला अंशदान और अन्य संबंधित भुगतान भी लिया गया, लेकिन पूरी राशि कर्मचारियों के PF खातों में नहीं पहुंची।
15 हजार से ज्यादा पन्नों के रिकॉर्ड में सामने आई अनियमितताएं
मामले से जुड़े 15,585 से अधिक पन्नों के आधिकारिक रिकॉर्ड के अध्ययन के आधार पर यह दावा किया गया है कि कई स्थानों पर PF चालानों का पर्याप्त सत्यापन किए बिना आउटसोर्स कंपनियों के बिल पास किए गए।
आरोप है कि कुछ मामलों में एडिट किए गए या संदिग्ध चालानों के आधार पर भुगतान किया गया। यदि यह आरोप जांच में सही साबित होता है तो यह केवल आउटसोर्स कंपनियों की जवाबदेही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिल और चालान सत्यापित करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
बैतूल में स्वीकृत संख्या से ज्यादा कर्मचारी दिखाने का आरोप
बैतूल जिले के मामले में भी रिकॉर्ड में बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है। बताया गया है कि संबंधित आउटसोर्स एजेंसी को दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान करीब 2.08 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
यहां कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या करीब 250 बताई गई, जबकि रिकॉर्ड में 428 से 450 तक कर्मचारी दर्शाए जाने का आरोप है। इसी आधार पर अतिरिक्त PF और अन्य मदों में सरकारी भुगतान लेने की आशंका जताई गई है।
आरोप यह भी है कि वास्तविक रूप से काम कर रहे कर्मचारियों के PF खातों में पूरी राशि जमा नहीं हुई।
मृत्युंजय ट्रेडर्स पर 10.20 करोड़ PF जमा नहीं करने का आरोप
मृत्युंजय ट्रेडर्स से जुड़े रिकॉर्ड में भी गंभीर वित्तीय अनियमितता का दावा किया गया है। कंपनी को झाबुआ और मंडला जिले में सेवाओं के बदले करीब 40.78 करोड़ रुपए का भुगतान किए जाने की बात कही गई है।
आरोप है कि कई महीनों में केवल दो या तीन कर्मचारियों के PF चालान प्रस्तुत किए गए, जबकि पूरे कर्मचारियों के आधार पर बिल पास करा लिए गए। जांच संबंधी दावों के मुताबिक इस प्रक्रिया में 10.20 करोड़ रुपए से अधिक की PF राशि जमा नहीं किए जाने की आशंका है।
गौरिका वैवर के मामले में भी सवाल
गौरिका वैवर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े रिकॉर्ड में भी अंतर का दावा किया गया है। मंडला में कंपनी को 836 कर्मचारियों के लिए काम आवंटित किया गया था।
बताया गया है कि चार महीनों के PF अंशदान के नाम पर करीब 1.17 करोड़ रुपए के बिल पास किए गए, लेकिन रिकॉर्ड में संबंधित PF जमा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इस मामले में भी वास्तविक भुगतान, चालान और कर्मचारियों के खातों में जमा राशि के मिलान की जरूरत बताई जा रही है।
सिक्योरिटी सर्विस मामले में 5 करोड़ से ज्यादा का अंतर
सिक्योरिटी सर्विस से जुड़े एक अन्य मामले में तीन से ज्यादा जिलों में लगभग 27 हजार कर्मचारियों के लिए करीब 8.44 करोड़ रुपए PF जमा होना था।
दावे के मुताबिक इसके मुकाबले करीब 3.11 करोड़ रुपए ही जमा किए गए और लगभग 5.32 करोड़ रुपए का अंतर सामने आया। यह अंतर कहां गया और किस स्तर पर भुगतान एवं सत्यापन में चूक हुई, यह जांच का अहम बिंदु हो सकता है।
CMHO और अकाउंट शाखाओं की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल भुगतान प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। आमतौर पर आउटसोर्स कंपनियों के बिल पास करने से पहले कर्मचारियों की संख्या, वेतन भुगतान, PF चालान, UAN विवरण और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जाना चाहिए।
आरोप है कि कई जगह बिना पर्याप्त सत्यापन के भुगतान किए गए। ऐसे में संबंधित CMHO कार्यालय, सिविल सर्जन कार्यालय और अकाउंट शाखाओं के अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
कर्मचारियों को सबसे बड़ा नुकसान
PF कर्मचारियों की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा होता है। कर्मचारी के वेतन से हर महीने तय अंशदान काटा जाता है, जबकि नियोक्ता की ओर से भी संबंधित हिस्सा जमा किया जाता है।
यदि वेतन से रकम काटे जाने के बाद भी PF खाते में राशि नहीं पहुंचती है, तो इसका सीधा नुकसान कर्मचारी को होता है। इससे कर्मचारी की जमा पूंजी, ब्याज और भविष्य में मिलने वाले PF लाभ प्रभावित हो सकते हैं।
वसूली से लेकर ब्लैकलिस्टिंग तक हो सकती है कार्रवाई
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कंपनियों से बकाया PF राशि की वसूली की जा सकती है। इसके अलावा हर्जाना, ब्याज, बैंक गारंटी से रिकवरी, संपत्ति जब्ती और ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई भी संभव हो सकती है।
धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की पुष्टि होने पर आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है। वहीं बिना सत्यापन भुगतान मंजूर करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय जांच, अनुशासनात्मक कार्रवाई और सरकारी नुकसान की रिकवरी की प्रक्रिया चल सकती है।
जांच के बाद साफ होगी वास्तविक तस्वीर
फिलहाल सामने आए तथ्य और आंकड़े रिकॉर्ड आधारित आरोप हैं। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति विस्तृत विभागीय जांच, PF खातों के मिलान, बैंक लेनदेन और संबंधित कंपनियों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यदि 53 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित अनियमितता की पुष्टि होती है तो यह स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों के PF से जुड़ा बड़ा वित्तीय मामला बन सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और संबंधित जांच एजेंसियां इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती हैं।
