MP में छात्र संघ चुनाव से पहले आचार संहिता लागू करने की मांग
छात्र नेता राजकुमार विश्वकर्मा बोले—धनबल और बाहुबल पर लगे रोक, लिंगदोह समिति की सिफारिशों का हो सख्ती से पालन
विदिशा। MP में आगामी छात्र संघ चुनावों को लेकर छात्र राजनीति में गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच छात्र नेता राजकुमार विश्वकर्मा ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव से पहले सख्त आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, अनुशासन और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियमों का होना जरूरी है।
राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि छात्र संघ चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन कई बार चुनावी गतिविधियों में बढ़ता खर्च, बाहरी तत्वों की भूमिका और शक्ति प्रदर्शन परिसर के शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित करता है। उन्होंने शासन और प्रशासन से चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले स्पष्ट आचार संहिता लागू करने की मांग की।
धनबल और बाहुबल पर रोक की मांग
छात्र नेता ने चुनाव के दौरान अत्यधिक खर्च और लग्जरी वाहनों के काफिलों पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि छात्र संघ चुनाव में धन का अत्यधिक इस्तेमाल होने से आर्थिक रूप से कमजोर और सामान्य पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव में उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा और नियम स्पष्ट होने चाहिए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना है कि छात्र राजनीति में चुनाव मुद्दों और योग्यता के आधार पर लड़े जाने चाहिए, न कि धनबल या बाहुबल के आधार पर।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों के पालन पर जोर
राजकुमार विश्वकर्मा ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप पर रोक लगाई जानी चाहिए और परिसर की व्यवस्था बनाए रखने के लिए संस्थानों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए।
उनका कहना है कि छात्र संघ चुनाव विद्यार्थियों के बीच लोकतांत्रिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का माध्यम हैं। इसलिए चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें सभी विद्यार्थियों को समान अवसर मिले और किसी भी प्रकार का दबाव या अनुचित प्रभाव न हो।
पोस्टर और दीवारों पर प्रचार को लेकर भी नियम की मांग
छात्र नेता ने चुनाव प्रचार के दौरान दीवारों पर पेंटिंग, पोस्टर और पर्चे चिपकाने से होने वाली गंदगी पर भी सख्त नियम लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के नाम पर विश्वविद्यालय और महाविद्यालय की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
उन्होंने ऐसे उम्मीदवारों पर जुर्माना लगाने की मांग की, जो निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए दीवारों पर प्रचार सामग्री लगाते हैं या परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि चुनाव समाप्त होने के बाद प्रचार सामग्री हटाने और परिसर को पूर्व स्थिति में लाने की जिम्मेदारी भी संबंधित उम्मीदवारों और संगठनों की होनी चाहिए।
पढ़ाई प्रभावित न हो, तय हो चुनावी गतिविधियों की समय-सीमा
राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि छात्र संघ चुनाव के दौरान चुनावी गतिविधियों के कारण कक्षाएं और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए प्रचार, बैठक, रैली और अन्य गतिविधियों के लिए समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय मूल रूप से शिक्षा के केंद्र हैं। इसलिए चुनावी प्रक्रिया के दौरान भी शैक्षणिक गतिविधियां सुचारु रूप से चलती रहें, यह सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की मांग
राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि छात्र संघ चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी उम्मीदवारों के लिए समान नियम होने चाहिए। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े नियमों की जानकारी विद्यार्थियों को पहले से दी जानी चाहिए और उल्लंघन की स्थिति में निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि चुनाव से पहले आचार संहिता जारी कर उसे सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
छात्र राजनीति में चर्चा तेज
छात्र नेता की इस मांग के बाद छात्र राजनीति से जुड़े विभिन्न वर्गों में चर्चा शुरू हो गई है। मांग के समर्थकों का कहना है कि यदि छात्र संघ चुनाव में धनबल और बाहुबल पर नियंत्रण रखा जाता है तो सामान्य विद्यार्थी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी कर सकेंगे।
वहीं, चुनाव प्रक्रिया को लेकर आगे शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन क्या निर्णय लेते हैं, इस पर छात्र संगठनों की नजर बनी हुई है।
राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि समय रहते यदि स्पष्ट और प्रभावी आचार संहिता लागू की जाती है तो छात्र संघ चुनाव अधिक व्यवस्थित, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकते हैं। उनका कहना है कि छात्र राजनीति में स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों के हित और शिक्षा का वातावरण प्राथमिकता में बना रहे।
