MP Cyber Fraud: 21 करोड़ रुपये की साइबर ठगी मामले में गिरफ्तार जिला पंचायत सदस्य ने पूछताछ में खोले कई राज, 11 राज्यों की ठगी से जुड़े तार
MP में सामने आए करोड़ों रुपये के साइबर ठगी मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। ग्वालियर के चार्टर्ड अकाउंटेंट को क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा देकर की गई करीब 21 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार शाजापुर के भाजपा जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार मालवीय से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस को संदेह है कि उसके बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को आगे पहुंचाने के लिए किया।
पुलिस के अनुसार, ग्वालियर में हुई बड़ी साइबर ठगी की रकम में से करीब 50 लाख रुपये जगदीश कुमार मालवीय के खाते में ट्रांसफर हुए थे। इसी आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसके खातों में केवल ग्वालियर की ठगी ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में हुई कई अन्य साइबर ठगी की रकम भी पहुंची थी।
11 साइबर ठगी मामलों की रकम पहुंची खाते में
जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खातों में अलग-अलग राज्यों में हुई कम से कम 11 साइबर ठगी की वारदातों से जुड़ी रकम का लेनदेन हुआ है। पुलिस अब इन सभी मामलों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी सीधे तौर पर साइबर अपराधियों के संपर्क में था या फिर उसके बैंक खातों का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह द्वारा किया जा रहा था।
राज्य साइबर सेल के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
21.05 करोड़ रुपये की ठगी का मामला
यह मामला ग्वालियर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से जुड़ा है, जिसे साइबर ठगों ने क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर अपने जाल में फंसाया था। ठगों ने निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर पीड़ित से बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली। धीरे-धीरे यह रकम बढ़कर करीब 21.05 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
MP में साइबर ठगी के मामलों में यह सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और साइबर सेल ने जांच तेज कर दी है।
पहली लेयर में 77 खातों में हुआ ट्रांजेक्शन
जांच में पुलिस को पता चला है कि ठगी की रकम को कई स्तरों पर अलग-अलग खातों में भेजा गया। ग्वालियर मामले में पहली लेयर में ही 77 बैंक खातों में रकम का ट्रांजेक्शन हुआ था। इसके बाद ठगी की राशि को आगे कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया।
पुलिस के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क कई चरणों में काम कर रहा था। पहली लेयर के बाद करीब 15 अलग-अलग स्तरों में रकम को 20 हजार से ज्यादा बैंक खातों तक पहुंचाया गया। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क काफी बड़ा और संगठित हो सकता है।
खाते में मिले करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन
पुलिस जांच में जगदीश कुमार मालवीय के खाते में करीब ढाई करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच प्रारंभिक चरण में है और आगे और भी कई खुलासे हो सकते हैं।
राज्य साइबर सेल के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि आरोपी फिलहाल पुलिस रिमांड पर है। उससे साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क, अन्य आरोपियों और बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
सोसायटी के खाते से शुरू हुआ था लेनदेन
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि जगदीश कुमार मालवीय की सोसायटी से संबंधित संस्था के करंट अकाउंट में नवंबर 2025 से ठगी की रकम का लेनदेन शुरू हुआ था। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि संस्था के खाते का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।
साइबर अपराधियों के नेटवर्क की तलाश
पुलिस का मानना है कि इतनी बड़ी रकम की ठगी अकेले किसी एक व्यक्ति के जरिए संभव नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा साइबर नेटवर्क काम कर सकता है। पुलिस अब उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिन्होंने अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को इधर-उधर किया।
जांच में सामने आने वाले हर नए तथ्य के आधार पर पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
निवेश के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध
क्रिप्टो करेंसी और ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ठग लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच देकर फर्जी ऐप, वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने जाल में फंसाते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच करनी चाहिए। अनजान लोगों के कहने पर बैंक खाते की जानकारी साझा करना या बड़ी रकम ट्रांसफर करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
फिलहाल 21 करोड़ रुपये की इस साइबर ठगी मामले में पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और नाम सामने आने की संभावना है।
