केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने साझा किया राजनीतिक सफर और MP कनेक्शन
केंद्रीय जनजातीय मंत्री जुएल ओराम ने दिल्ली में अपने राजनीतिक करियर, संघर्ष और मध्यप्रदेश से जुड़े अनुभवों को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे भोपाल में बीएचईएल में नौकरी करते हुए उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा मिली। उस समय उन्होंने MP के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को देखा और उनसे प्रभावित होकर सोचा कि राजनीति में कदम रखा जा सकता है। इसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ा और विधायक बनने के बाद केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया।
जुएल ओराम के अनुभवों में यह बताया गया कि राजनीति में आने के लिए केवल इच्छाशक्ति पर्याप्त नहीं होती। कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना और लगातार सीखते रहना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी-कभी मौके अप्रत्याशित रूप से मिलते हैं और उन्हें चुनाव जीतने का अवसर जनता ने दिया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के 23वें स्थापना दिवस में अनुभव साझा
जुएल ओराम ने यह कहानी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के 23वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान सुनाई। इस कार्यक्रम में आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य और केंद्रीय जनजातीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके भी मौजूद थे। तीनों ही प्रमुख अतिथियों का मध्यप्रदेश से गहरा कनेक्शन रहा। कार्यक्रम में जुएल ओराम ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के साथ राजनीति में आने के संघर्ष और चुनौतियों के बारे में भी बताया।
उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि राजनीति में शुरुआत में सभी कुछ सरल नहीं होता। उन्हें भी शुरुआती दौर में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन से सफलता मिलती है।
दुर्गादास उईके के भाषण पर व्यंग्य
कार्यक्रम में दुर्गादास उईके ने रामायण, महाभारत और सतयुग से लेकर वर्तमान समय तक के उदाहरणों के माध्यम से लंबा भाषण दिया। इसके तुरंत बाद भाषण देने आए जुएल ओराम ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इतना भाषण सुनने के बाद अब और भाषण सुनने की जरूरत है क्या। इसके बाद उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत की और राजनीतिक करियर के अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि राजनीति में हास्य और व्यंग्य का भी महत्व होता है। कभी-कभी गंभीर मुद्दों के बीच हल्का फुल्का संवाद माहौल को संतुलित करता है और नेताओं के बीच संबंध मजबूत करता है।
अटल बिहारी वाजपेयी से कक्ष आवंटन का किस्सा
जुएल ओराम ने बताया कि जब वे केंद्रीय मंत्री नहीं बने थे, तब लोग उन्हें चिढ़ाते थे कि कुछ नहीं बना। बाद में उन्हें डिफेंस विभाग में चेयरमैन बनाया गया। मंत्री बनने के बाद भी शुरुआत में किसी सचिव या अफसर से मिलने में कठिनाई आई। तीन दिन बाद दो अफसर आए और स्थिति स्पष्ट की।
कुछ समय बाद नए पदस्थ भूरेलालजी उनके सचिव बने। उन्होंने कहा कि जो भी काम करना हो, पहले उन्हें बताना होगा ताकि फाइल तैयार की जा सके। यह अनुभव बताता है कि राजनीतिक सफर में धैर्य और समझदारी की कितनी अहमियत होती है।
जुएल ओराम ने यह भी साझा किया कि शुरुआती दिनों में निराशा और चुनौतियों का सामना करना सामान्य है। जब तक सही मार्गदर्शन और संसाधनों का समर्थन नहीं मिलता, कई बार काम का प्रबंधन मुश्किल हो सकता है।
PM Atal Bihari Vajpayee से मुलाकात
केंद्रीय मंत्री बनने के बाद ओराम को प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee से मिलने का अवसर मिला। भूरेलालजी ने बैठक का समय तय किया और पीएम ऑफिस में मिलने के बाद कैबिनेट सचिव प्रभात कुमार और ज्वाइंट सेकेट्री के माध्यम से शास्त्री भवन में कक्ष आवंटन सुनिश्चित हुआ।
इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि राजनीति में पद मिलने के साथ ही काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक सहयोग कितनी अहम भूमिका निभाता है। जुएल ओराम के अनुभव दर्शाते हैं कि राजनीति और प्रशासनिक कामकाज में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
राजनीति में संघर्ष और सीख
जुएल ओराम ने बताया कि राजनीति में कदम रखने के बाद उन्हें कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी साझा किया कि बिना फल की चिंता किए काम करना चाहिए। उनका अनुभव यह बताता है कि मेहनत, निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन से कोई भी व्यक्ति राजनीतिक सफलता प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने बताया कि जब वे नए मंत्रालय में नियुक्त हुए, तब किसी ने उनका मार्गदर्शन नहीं किया। उन्हें स्वयं ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझना और अधिकारियों से समन्वय करना पड़ा। यह अनुभव युवा नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मध्यप्रदेश से जुड़ा राजनीतिक सफर
जुएल ओराम का जीवन और राजनीतिक सफर मध्यप्रदेश से गहराई से जुड़ा है। भोपाल में नौकरी करते हुए उन्हें प्रेरणा मिली, बाबूलाल गौर से प्रभावित होकर राजनीति में कदम रखा और विधायक बनने के बाद केंद्रीय मंत्री बने। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य केंद्रीय और राज्य मंत्री भी मध्यप्रदेश से जुड़े हुए थे, जो इस कनेक्शन को और मजबूत बनाते हैं।
ओराम के अनुभव यह दिखाते हैं कि राजनीतिक मार्ग में सफलता केवल प्रतिभा और मेहनत से नहीं आती, बल्कि धैर्य, समय की समझ और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है।
भविष्य के लिए संदेश
जुएल ओराम ने अपने अनुभवों से यह संदेश दिया कि राजनीति में आने का फैसला कठिन हो सकता है, लेकिन धैर्य, मेहनत और सही मार्गदर्शन से सभी बाधाओं को पार किया जा सकता है। उन्होंने युवा और नए नेताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि बिना किसी लाभ की चिंता किए केवल जनता की सेवा और कार्य में लगना ही सही रास्ता है।
उन्होंने जोर दिया कि नेताओं को अपने लक्ष्य पर फोकस करना चाहिए और चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उनका राजनीतिक सफर यह दिखाता है कि प्रेरणा, मेहनत और सही दिशा में प्रयास से किसी भी व्यक्ति को उच्च पद और जिम्मेदारियाँ मिल सकती हैं।
