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MP बोर्ड ने पलटा ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ का फैसला, अगले साल से 10वीं में 7 और 12वीं में देने होंगे 6 पेपर

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Published On: 4 March 2026
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— मप्र बोर्ड ने खत्म किया ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ सिस्टम, अब 10वीं में 7 और 12वीं में 6 विषय होंगे अनिवार्य – शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की तैयारी में सुधार के लिए बड़ा बदलाव।

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MP बोर्ड ने पलटा ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ का फैसला, अगले साल से 10वीं में 7 और 12वीं में देने होंगे 6 पेपर

भोपाल: MP माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने अपने बोर्ड परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए पिछले नौ वर्षों से लागू ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ प्रणाली को समाप्त करने का ऐलान किया है। इस प्रणाली के तहत विद्यार्थियों को पांच में से अपने सर्वोत्तम पांच विषयों के अंकों के आधार पर कुल परिणाम दिया जाता था। हालांकि इस व्यवस्था के कारण छात्र केवल पसंदीदा विषयों पर ध्यान केंद्रित करते थे, जबकि अनिवार्य विषयों पर ध्यान कम होता था। इससे उनकी विषयगत समझ और प्रतियोगी क्षमता प्रभावित हो रही थी।

अब अगले शैक्षणिक वर्ष से कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए परीक्षा प्रणाली में बदलाव लागू होगा। नए प्रस्ताव के अनुसार कक्षा 10वीं के छात्रों को सात विषयों में परीक्षा देना होगा, जबकि 12वीं के छात्रों के लिए छह विषय अनिवार्य होंगे। माशिमं बोर्ड का कहना है कि यह बदलाव केवल परीक्षा अंकों या परिणाम प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं किया गया है, बल्कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता, विषयगत समझ और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने के लिए है।

बेस्ट ऑफ फाइव’ क्यों हुआ समाप्त:

माशिमं अधिकारियों के अनुसार ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ प्रणाली ने कई छात्रों को मुख्य विषयों में कमजोर बना दिया था। छात्र इस प्रणाली के तहत केवल पसंदीदा विषयों पर ध्यान केंद्रित करते थे और अनिवार्य विषयों की तैयारी में ढील छोड़ देते थे। परिणामस्वरूप वे सामान्य परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाते थे, लेकिन आगे की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों के लिए आवश्यक बुनियादी ज्ञान में कमी रह जाती थी।

MP बोर्ड का उद्देश्य अब छात्रों को सभी विषयों में समान रूप से सक्षम बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि सात और छह विषयों की अनिवार्यता से छात्रों का समग्र ज्ञान और अकादमिक प्रदर्शन बेहतर होगा। इससे विद्यार्थियों में विषयों के प्रति गंभीरता बढ़ेगी और वे परीक्षा और प्रतियोगी परिक्षाओं में अधिक तैयारी के साथ शामिल होंगे।

शैक्षणिक लाभ और विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा। वर्तमान में कई छात्र केवल अपने पसंदीदा विषयों पर फोकस करते हैं और कम महत्वपूर्ण विषयों में कम मेहनत करते हैं। नई प्रणाली के तहत सभी विषयों पर समान रूप से ध्यान देने से उनकी पढ़ाई में संतुलन आएगा।

कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए सात विषयों की परीक्षा में मुख्य विषयों के अलावा गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन, हिंदी और अंग्रेजी शामिल होंगे। अतिरिक्त विषय के रूप में कोई दूसरा वैकल्पिक विषय जोड़ा जाएगा। कक्षा 12वीं में छह विषयों की अनिवार्यता भी इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यहाँ विद्यार्थियों को विषयगत समझ और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका:

माशिमं बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बदलाव का उद्देश्य केवल अंकों को बढ़ाना नहीं है। बल्कि विद्यार्थियों की आलोचनात्मक सोच, विश्लेषण क्षमता और विषयगत ज्ञान को बढ़ावा देना है। इसके तहत शिक्षक और शिक्षण संस्थान भी अपने पाठ्यक्रम और शिक्षण तरीकों में सुधार करेंगे। इससे छात्र न केवल परीक्षा में बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों और करियर चुनौतियों के लिए भी तैयार होंगे।

छात्र और अभिभावकों के लिए चुनौती:

छात्रों और अभिभावकों के लिए यह बदलाव प्रारंभ में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अधिक विषयों की परीक्षा देने का मतलब अधिक तैयारी, समय प्रबंधन और रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। हालांकि, बोर्ड का मानना है कि यह कदम विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास और विषयगत दक्षता के लिए फायदेमंद रहेगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाभ:

शैक्षणिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में छात्रों को बेहतर तैयारी देने में मदद करेगा। कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं में अनिवार्य विषयों की गहरी समझ आवश्यक होती है, और ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ प्रणाली के तहत यह ज्ञान अधूरा रह जाता था। अब छात्रों को सभी विषयों में समान रूप से दक्षता हासिल करनी होगी।

संतुलित शिक्षा और दीर्घकालिक प्रभाव:

MP बोर्ड ने यह भी कहा कि यह बदलाव विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति गंभीरता, विषयों की गहन समझ और समय प्रबंधन के कौशल को बढ़ावा देगा। विद्यार्थियों को केवल अंकों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय हर विषय में ज्ञान और दक्षता हासिल करने की चुनौती दी जाएगी।

अंततः, MP बोर्ड का यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, छात्रों को संतुलित, सक्षम और प्रतियोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगले वर्ष से कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों को यह नई परीक्षा प्रणाली अपनानी होगी, जो उन्हें अधिक गहन अध्ययन, विषयगत समझ और प्रतिस्पर्धात्मक तैयारियों के लिए प्रेरित करेगी।

 

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