मोहन कैबिनेट की बैठक आज: स्कूल ड्रेस के लिए खातों में राशि भेजने पर हो सकता है फैसला
दैनिक स्वराज वाणी | भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 29 सितंबर को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की ड्रेस से जुड़ी व्यवस्था पर फैसला हो सकता है। सरकार कक्षा पहली से आठवीं तक के 58 लाख से अधिक विद्यार्थियों को सिली हुई ड्रेस देने के स्थान पर प्रति विद्यार्थी 600 रुपये सीधे बैंक खाते में भेजने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। दमोह जिले के नए मार्ग और कुछ योजनाओं को आगे जारी रखने के लिए वित्तीय स्वीकृति से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में रखे जाने की खबर है। इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्कूल ड्रेस की व्यवस्था फिर बदल सकती है
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की ड्रेस को लेकर इस वर्ष पहले से तय व्यवस्था बदलने की संभावना है। जून में सरकार ने कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को दो-दो सिली हुई ड्रेस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने ड्रेस के बदले राशि देने का विकल्प तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार पात्र विद्यार्थियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, यानी डीबीटी के माध्यम से 600 रुपये भेजे जा सकते हैं। कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर ही इस व्यवस्था को लागू करने का रास्ता साफ होगा।
ड्रेस वितरण की योजना क्यों अटकी?
विद्यार्थियों को सिली हुई ड्रेस उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम ने जून में लगभग 350 करोड़ रुपये की निविदा जारी की थी। निविदा प्रक्रिया से जुड़ा मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद उस पर अंतरिम रोक लग गई। इसके चलते ड्रेस तैयार कराने और स्कूलों तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। सितंबर का महीना समाप्त होने को है, इसलिए विभाग के सामने समय पर ड्रेस वितरण की चुनौती है। इसी स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों के खातों में राशि भेजने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ने की स्थिति में भी ड्रेस सिलवाने और प्रदेशभर के स्कूलों तक पहुंचाने में समय लगेगा। ऐसे में बैठक का फैसला विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए अहम होगा। यदि राशि देने का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो ड्रेस खरीदने की जिम्मेदारी परिवारों के पास होगी। राशि कब भेजी जाएगी और उसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, इसकी जानकारी सरकार के औपचारिक निर्णय के बाद ही सामने आएगी।
पहले भी बदली गई है गणवेश वितरण की व्यवस्था
सरकारी स्कूलों में ड्रेस उपलब्ध कराने का तरीका पहले भी बदला गया है। कभी विद्यार्थियों को तैयार ड्रेस देने की व्यवस्था अपनाई गई, तो कभी उनके खातों में राशि भेजी गई। तैयार ड्रेस के वितरण में देरी की शिकायतें सामने आने के बाद नकद राशि देने का विकल्प चुना गया था। बाद में यह चिंता जताई गई कि ड्रेस के लिए दी गई रकम का उपयोग अन्य जरूरतों में हो सकता है। इसी आधार पर सरकार ने विद्यार्थियों को फिर से सिली हुई ड्रेस उपलब्ध कराने का फैसला किया था। अब निविदा प्रक्रिया अटकने से राशि भेजने का विकल्प दोबारा विचार के लिए आया है।
अभिभावकों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि बच्चों को ड्रेस के लिए सहायता समय पर मिले। सत्र शुरू होने के कई महीने बाद भी ड्रेस की व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने से परिवारों को खरीदारी की योजना बनाने में कठिनाई हो सकती है। कैबिनेट यदि प्रस्ताव को स्वीकृति देती है, तो विभाग को पात्र विद्यार्थियों और बैंक खातों से जुड़ी प्रक्रिया भी स्पष्ट करनी होगी।
दमोह के नए मार्ग का प्रस्ताव भी चर्चा में
बैठक में दमोह जिले के नए मार्ग से जुड़े प्रस्ताव पर भी निर्णय लिए जाने की संभावना है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मार्ग का नाम, उसकी लंबाई और प्रस्तावित लागत स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे मंजूर हो चुका काम कहना जल्दबाजी होगी। बैठक के बाद सरकार की ओर से जारी विवरण से पता चलेगा कि मार्ग के लिए क्या स्वीकृति दी गई है और उससे किन क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
इसके अलावा वर्ष 2031 तक जारी रखी जाने वाली कुछ योजनाओं की वित्तीय स्वीकृति के प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने आ सकते हैं। इन योजनाओं और उनके लिए प्रस्तावित राशि की पूरी जानकारी आधिकारिक फैसलों के बाद स्पष्ट होगी। फिलहाल बैठक का सबसे चर्चित विषय स्कूली बच्चों की ड्रेस है। प्रदेश के लाखों विद्यार्थी और उनके अभिभावक यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार तैयार ड्रेस देने की व्यवस्था जारी रखेगी या इस वर्ष खातों में राशि भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी देगी।
