MCU की PG प्रवेश प्रक्रिया पर उठे सवाल, RTI में स्कोर शीट नहीं होने का दावा; UGC में शिकायत
छात्र तनय शर्मा ने इंटरव्यू रिकॉर्ड, मेरिट सूची और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर लगाए आरोप; हाई कोर्ट जाने की तैयारी
भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) की शैक्षणिक सत्र 2026-27 की स्नातकोत्तर प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। विश्वविद्यालय के छात्र और NSUI के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता तनय शर्मा ने प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले जवाब में विश्वविद्यालय ने इंटरव्यू से संबंधित इवैल्युएशन शीट, स्कोर शीट और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग संधारित नहीं होने की जानकारी दी है।
तनय शर्मा का कहना है कि जब चयन प्रक्रिया में इंटरव्यू के अंकों को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया, तब उन अंकों के निर्धारण से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड का उपलब्ध नहीं होना गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इस मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से शिकायत की है और राहत नहीं मिलने पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड की जांच और विश्वविद्यालय के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
एमए एमसी और एमए एपीआर के लिए किया था आवेदन
तनय शर्मा ने विश्वविद्यालय के एमए मास कम्युनिकेशन (एमए एमसी) और एमए एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस (एमए एपीआर) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। उनका कहना है कि बेहतर शैक्षणिक रिकॉर्ड होने के बावजूद इंटरव्यू में उन्हें अपेक्षाकृत कम अंक दिए गए, जिसके कारण प्रारंभिक चयन सूची में उनका नाम नहीं आया।
इसके बाद उन्हें एमए एपीआर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए दस्तावेज सत्यापन से संबंधित ई-मेल प्राप्त हुआ। शर्मा का आरोप है कि प्रवेश प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में उन्हें विरोधाभासी स्थितियों का सामना करना पड़ा। इसी के बाद उन्होंने चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों और इंटरव्यू के रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त करने के लिए RTI आवेदन लगाया।
इंटरव्यू में अंक दिए गए तो स्कोर शीट कहां?
तनय शर्मा का प्रमुख सवाल इंटरव्यू के मूल्यांकन रिकॉर्ड से जुड़ा है। उनका कहना है कि चयन के दौरान अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के आधार पर अंक दिए गए, लेकिन RTI के जवाब में कथित रूप से बताया गया कि इंटरव्यू की इवैल्युएशन और स्कोर शीट संधारित नहीं की गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इंटरव्यू के अंक अंतिम चयन को प्रभावित करते हैं तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि अभ्यर्थियों का मूल्यांकन किन मानकों के आधार पर किया गया। प्रत्येक उम्मीदवार को मिले अंकों का रिकॉर्ड और संबंधित मूल्यांकनकर्ताओं की टिप्पणियां भी उपलब्ध होनी चाहिए।
शर्मा के मुताबिक, मूल्यांकन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में यह सत्यापित करना कठिन हो जाता है कि सभी अभ्यर्थियों का आकलन समान मापदंडों के अनुसार किया गया था या नहीं।
मेरिट और चयन सूची में अंक नहीं दिखाने का आरोप
तनय शर्मा ने विश्वविद्यालय द्वारा जारी मेरिट और चयन सूची पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि सूची में उम्मीदवारों के प्राप्तांक प्रदर्शित नहीं किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चयन सूची पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर दिखाई नहीं दिए।
उनका कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया में मेरिट निर्धारण का आधार स्पष्ट होना चाहिए। यदि शैक्षणिक योग्यता, इंटरव्यू और अन्य मापदंडों के आधार पर अंतिम सूची बनाई गई है तो प्रत्येक चरण के अंकों की जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
शर्मा के अनुसार, प्राप्तांक सार्वजनिक नहीं होने से अभ्यर्थियों को यह समझने में कठिनाई होती है कि वे किस आधार पर चयनित या असफल घोषित किए गए। उन्होंने विश्वविद्यालय से विस्तृत और प्रमाणित मेरिट रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की है।
इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने का दावा
RTI के जवाब का हवाला देते हुए शर्मा ने दावा किया कि इंटरव्यू की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि रिकॉर्डिंग नहीं होने से इंटरव्यू के दौरान पूछे गए प्रश्नों और उम्मीदवारों के प्रदर्शन का बाद में निष्पक्ष सत्यापन संभव नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि विवाद की स्थिति में रिकॉर्डिंग चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता जांचने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती थी। हालांकि, विश्वविद्यालय के नियमों में इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग अनिवार्य है या नहीं, इसे लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
पैनल के सदस्यों की जानकारी नहीं देने का आरोप
तनय शर्मा ने यह आरोप भी लगाया कि RTI के माध्यम से इंटरव्यू पैनल के सदस्यों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय ने इसे कथित रूप से ‘संवेदनशील विषय’ बताते हुए उपलब्ध नहीं कराया।
उनका कहना है कि प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों का इंटरव्यू लेने वाले विशेषज्ञों की योग्यता और भूमिका की बुनियादी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसके अभाव में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो सकता है।
इस मामले में यह भी देखा जाना आवश्यक होगा कि मांगी गई जानकारी RTI अधिनियम के किस प्रावधान के तहत रोकी गई और विश्वविद्यालय ने अपने जवाब में इसका क्या कानूनी आधार बताया है।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान ‘माफीनामा’ मांगने का दावा
विवाद का एक अन्य हिस्सा 14 अगस्त को हुई दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया से जुड़ा है। तनय शर्मा का दावा है कि एमए एपीआर पाठ्यक्रम में दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनसे पहले से तैयार एक कथित ‘माफीनामा’ पर हस्ताक्षर करने को कहा गया।
उनके अनुसार, उस दस्तावेज में “कृपापूर्वक प्रवेश दिया जाए” जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने इसे अनुचित मानते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। शर्मा का कहना है कि किसी विद्यार्थी को प्रवेश निर्धारित नियमों, पात्रता और मेरिट के आधार पर मिलना चाहिए। इसे किसी प्रकार की कृपा के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित दस्तावेज वास्तव में माफीनामा था, अभ्यर्थी का घोषणा पत्र था या प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित कोई निर्धारित आवेदन प्रारूप।
UGC में शिकायत, हाई कोर्ट जाने की तैयारी
तनय शर्मा ने प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी अपनी आपत्तियों को लेकर UGC के समक्ष शिकायत दर्ज कराने का दावा किया है। उन्होंने स्कोर शीट, इंटरव्यू रिकॉर्ड, चयन सूची और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि शिकायत पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती तो वह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत करेंगे। वे न्यायालय से प्रवेश प्रक्रिया के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, चयन के मानदंड स्पष्ट करने और कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग कर सकते हैं।
व्यक्ति नहीं, व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल
तनय शर्मा ने कहा है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। वह पूरी प्रवेश व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनके अनुसार, किसी सार्वजनिक विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसकी जांच होने पर प्रत्येक निर्णय का दस्तावेजी आधार उपलब्ध हो।
उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय सभी अभ्यर्थियों के प्राप्तांक, इंटरव्यू मूल्यांकन का आधार, चयन समिति से संबंधित आवश्यक जानकारी और अंतिम मेरिट निर्धारण की प्रक्रिया स्पष्ट करे।
फिलहाल मामला आरोपों और RTI के कथित जवाबों पर आधारित है। विश्वविद्यालय प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। UGC की कार्रवाई और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर भी विद्यार्थियों तथा शिक्षा जगत की नजर बनी हुई है।
