दुख की घड़ी में मानवता की मिसाल: स्व. नारायण आचार्य के निधन पर परिवार ने कराया नेत्रदान,
स्वराज वाणी संवाददाता जिला गौतम साल्वे ब्यूरो चीफ मंडलेश्वर
समाजसेवी नारायण आचार्य ने जीवनभर किया समाजहित में कार्य, परिवार ने पूरी की अंतिम इच्छा
मंडलेश्वर। नेत्रदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से किसी व्यक्ति के जीवन में दोबारा रोशनी लाई जा सकती है। इसी भावना को मंडलेश्वर के आचार्य परिवार ने साकार कर दिखाया है। नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी 75 वर्षीय स्व. नारायण गौरीशंकर आचार्य के निधन के बाद परिवारजनों ने दुख की घड़ी में भी संवेदनशीलता और मानवता का परिचय देते हुए उनका नेत्रदान कराया। परिवार के इस निर्णय से दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई रोशनी आने की उम्मीद जगी है।
स्व. नारायण आचार्य का मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को वृद्धावस्था के कारण सामान्य निधन हो गया। उनके देवलोकगमन से परिवार और समाज में शोक की लहर फैल गई। लेकिन इस कठिन समय में परिवार ने उनके विचारों और इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया और समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
जीवनभर समाजसेवा को समर्पित रहा व्यक्तित्व
स्व. नारायण गौरीशंकर आचार्य नगर के प्रतिष्ठित नागरिक और समाजसेवी के रूप में पहचाने जाते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे लगातार समाजसेवा से जुड़े रहे और जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्पर रहते थे।
उन्होंने अपने जीवनकाल में ही परिवार के सामने अंगदान और नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की थी। परिवारजनों ने उनके इस संकल्प को याद रखते हुए उनके निधन के बाद इसे पूरा करने का निर्णय लिया।
परिवार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कराया नेत्रदान
स्व. नारायण आचार्य के निधन के बाद उनकी धर्मपत्नी श्रीमती त्रिवेणी आचार्य, पुत्र राहुल आचार्य, बड़े भाई बबन आचार्य एवं अन्य परिवारजनों ने आपसी सहमति से नेत्रदान कराने का निर्णय लिया।
परिवार का कहना है कि स्व. आचार्य हमेशा मानव सेवा और समाजहित के कार्यों को प्राथमिकता देते थे। इसलिए उनके जाने के बाद भी उनकी सोच और सेवा भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया।
चिकित्सकीय टीम ने पूरी की नेत्रदान प्रक्रिया
नेत्रदान की सूचना मिलने के बाद शासकीय जिला चिकित्सालय खरगोन की मेडिकल टीम मंडलेश्वर पहुंची। डॉ. उदयसिंह राठौर के मार्गदर्शन में नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया संवेदनशीलता और सावधानी के साथ संपन्न कराई गई।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों नेत्रों को सुरक्षित रूप से जिला चिकित्सालय खरगोन भेजा गया, जहां से इन्हें जरूरतमंद व्यक्तियों को प्रत्यारोपित किया जाएगा। इससे किसी नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन में प्रकाश आने की संभावना है।

आचार्य परिवार में पहली बार हुआ नेत्रदान
परिवार के अनुसार यह पहला अवसर है जब आचार्य परिवार के किसी सदस्य का नेत्रदान किया गया है। परिवार ने इस पुण्य कार्य से प्रेरणा लेते हुए भविष्य में भी समाज में अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया है।
परिवारजनों ने कहा कि नेत्रदान केवल एक व्यक्ति की आंखें दान करना नहीं है, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति को नया जीवन और नई उम्मीद देना है।
समाज से की नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील
परिवार ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि नेत्रदान और अंगदान से बड़ा कोई दान नहीं है। मृत्यु के बाद भी यदि किसी के अंग किसी जरूरतमंद के काम आ सकें तो इससे बड़ा मानव सेवा का कार्य कोई नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि दुख की घड़ी में संयम और सकारात्मक सोच रखते हुए परिवारों को ऐसे निर्णय लेने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि किसी की जिंदगी में फिर से उजाला लौट सके।
नर्मदा तट पर हुआ अंतिम संस्कार
स्व. नारायण आचार्य का अंतिम संस्कार मंगलवार को मंडलेश्वर स्थित नर्मदा तट पर किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में नगरवासी, सामाजिक कार्यकर्ता और परिचित शामिल हुए। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी और उनके समाजसेवा के कार्यों को याद किया।
स्व. नारायण आचार्य का जीवन समाजसेवा, संवेदनशीलता और मानव कल्याण के प्रति समर्पित रहा। उनके परिवार द्वारा लिया गया नेत्रदान का निर्णय उनकी सेवा भावना को आगे बढ़ाने वाला कदम साबित हुआ है। यह पहल समाज के लिए प्रेरणा है कि जीवन के बाद भी मानवता की सेवा की जा सकती है।
