नागदा (निप्र):
मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी नागदा ने एक बार फिर अध्यात्म, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखा।
गुरुवार को राजेन्द्र विहार धाम रूपेटा में आयोजित हुई भव्य परमरस विहार यात्रा ने पूरे नगर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
यह पावन यात्रा पूज्य मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी म.सा. और मुनिराज श्री पवित्ररत्नविजयजी म.सा. की पावन निश्रा में संपन्न हुई।
श्रद्धालुओं की अपार भीड़, भक्ति संगीत, अनुशासित जुलूस और धार्मिक उल्लास से भरे वातावरण ने नागदा की सुबह को दिव्य बना दिया।

प्रेरणा और आयोजन का उद्देश्य :
इस विहार यात्रा का आयोजन विश्वपूज्य श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा., राष्ट्रसंत श्रीमद् विजय जयन्तसेनसूरीश्वरजी म.सा. की कृपा तथा गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेनसूरीश्वरजी म.सा. और आचार्य देवेश श्रीमद् विजय जयरत्नसूरीश्वरजी म.सा. की प्रेरणा से किया गया।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिकता, शांति, करुणा और अनुशासन के संदेश को फैलाना था।
मुनिराजों की उपस्थिति में नागदा के जैन समाज ने एक स्वर में भक्ति गीत गाते हुए धर्म, सत्य और अहिंसा का संदेश दिया।
भोर से शुरू हुआ भक्ति का माहौल :
भोर होते ही नागदा की गलियां भक्तिमय हो उठीं।
सुबह 6:15 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ आजादबेन कान्तिलालजी नागदा के निवास, रामसहाय मार्ग पर भक्तामर पाठ के साथ हुआ।
श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष सफेद वस्त्रों में सुसज्जित होकर, भक्ति गीतों के साथ प्रभु के चरणों में अपनी आस्था अर्पित कर रहे थे।
मुनिराजों के आगमन पर पूरे क्षेत्र में “जय जिनेन्द्र” के उद्घोष गूंजने लगे।
भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ :
सुबह 6:45 बजे शुरू हुई यह भव्य परमरस विहार यात्रा, नागदा शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों से होकर गुजरी।
यात्रा का मार्ग था –
चंद्रप्रभ जिनालय, शांतिनाथ जिनालय (जैन कॉलोनी), नाकोडा पार्श्वनाथ मंदिर, और राजेन्द्रसूरी जैन दादावाड़ी महिदपुर रोड होते हुए अंत में राजेन्द्र विहार धाम रूपेटा पहुँचना।
पूरी यात्रा के दौरान भक्तों ने रास्ते में धर्मध्वजा लहराई, पुष्पवर्षा की और जगह-जगह स्वागत द्वार सजाए गए।
महिलाएं थालियों में आरती लिए खड़ी थीं, बच्चे जयकारे लगा रहे थे, और बैंड-बाजों की धुनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
धर्मसभा में मुनिश्री के मंगल प्रवचन :
विहार यात्रा के रूपेटा स्थित राजेन्द्र विहार धाम पहुँचने पर एक विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया।
यहां मुनिश्री ने अपने मंगल प्रवचन में श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और अहिंसा का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि —
“मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य आत्मशुद्धि और करुणा का विकास है। धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि आचरण की पवित्रता है।”
उनके प्रवचन के दौरान पूरा पंडाल शांत और ध्यानमग्न था।
मुनिराजों के उपदेशों ने श्रद्धालुओं के हृदय में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया।
लाभार्थी परिवार का हुआ सम्मान :
इस आयोजन के मुख्य लाभार्थी श्रीमती आजादबेन कान्तिलालजी नागदा परिवार रहे।
कार्यक्रम में नगर के सभी जिनालय ट्रस्टों ने मिलकर उन्हें शाल, श्रीफल और माला से सम्मानित किया।
धर्मसभा के दौरान चेत्य परिपाटी भी संपन्न हुई, जिसमें जैन समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए मुनिश्री का स्वागत किया।
नवकारसी और स्वामीवात्सल्य का आयोजन :
विहार यात्रा और धर्मसभा के पश्चात समाजजनों के लिए नवकारसी एवं स्वामीवात्सल्य भोज का आयोजन किया गया।
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से इस आयोजन में भाग लेकर धर्मसुख और आत्मिक आनंद का अनुभव किया।
भक्तों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकता और अध्यात्म को बढ़ावा देते हैं।
आगामी धार्मिक कार्यक्रम :
मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी म.सा. आगामी दिनों में पुनः नागदा पधारकर चातुर्मास अध्यक्ष श्री मनोज वागरेचा के निवास पर विराजेंगे।
वे शांतिनाथ जिनालय की सिल्वर जुबली वर्षगांठ के पंचानिका महोत्सव और
गुरुदेव श्री राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की 200वीं जन्म शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाली विशाल रथयात्रा में भी निश्रा प्रदान करेंगे।
यह आयोजन नागदा और आसपास के क्षेत्रों में जैन समाज के लिए ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का संगम :
पूरे आयोजन की विशेषता यह रही कि हर चरण में अनुशासन और समर्पण झलक रहा था।
श्रद्धालुओं ने गर्मी की परवाह किए बिना पूरे मार्ग में पैदल यात्रा की और प्रभु भक्ति में लीन रहे।
महिलाओं के समूहों ने भक्ति गीत गाकर वातावरण को मधुर बनाया।
यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि मानवता, सद्भाव और आस्था का पर्व बन गया।
नागदा बना भक्ति का केंद्र :
नागदा का यह आयोजन न केवल स्थानीय बल्कि आसपास के नगरों के श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा।
सैकड़ों श्रद्धालु रूपेटा पहुंचे और मुनिराजों के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव किया।
नगर प्रशासन ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
समापन:
भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा से सम्पन्न यह आयोजन नागदा की धार्मिक संस्कृति की पहचान बन गया।
मुनिश्री के प्रेरणादायी प्रवचन और समाज के सामूहिक सहयोग ने यह सिद्ध कर दिया कि जब **आस्था और सेवा एक साथ चल
