पानीपत (हरियाणा)। पानीपत जिले के भावड़ गांव में चार मासूम बच्चों की हत्या ने देशभर में सनसनी फैला दी है। इन बच्चों की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी मां पूनम ने की—एक ऐसी महिला जो 2023 में शादी के बाद घर आई थी तो बिल्कुल शांत, सामान्य और पारंपरिक बहू की तरह दिखती थी। हमेशा साड़ी में, कम बोलने वाली और बेहद सीधी-सादी।
लेकिन आज वही महिला चार हत्याओं की आरोपी है और पुलिस हिरासत में है।
उच्च शिक्षित—फिर भी ऐसा कदम?
पूनम ने
- पॉलिटिकल साइंस में एमए
- MA ,B.Ed की डिग्री ली है।
इतनी पढ़ी-लिखी और शांत स्वभाव की लगने वाली महिला आखिर एक साइको किलर कैसे बन गई?
यह सवाल पूरे देश में चर्चा का विषय है।
परिवार का दावा—“आवाज़ बदल जाती थी, अजीब हरकतें करती थी”
पूनम के जेठ ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं:
- कभी-कभी उसकी आवाज़ बदल जाती थी, जैसे कोई और बोल रहा हो।
- वह अचानक कह देती—“सबका नाश कर दूंगी।”
- पिछले कुछ महीनों से वह अजीब हरकतें करने लगी थी।
परिवार के कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि “उस पर काली छाया या प्रेत आत्मा का असर” लगता था।
हालाँकि, पुलिस और मनोवैज्ञानिक दोनों इस कोण को अंधविश्वास मानते हुए मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति की जांच को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
क्या मानसिक बीमारी थी? विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे मामलों में अक्सर कारण होते हैं—
- तीव्र डिप्रेशन
- प्रसवोत्तर मानसिक विकार (Postpartum Psychosis)
- स्किज़ोफ्रेनिया, जिसमें आवाज़ें सुनाई दे सकती हैं
- लंबे समय से दबा हुआ पारिवारिक तनाव
- अत्यधिक भावनात्मक दबाव या हिंसक मनोवृत्ति का धीरे-धीरे विकसित होना
पुलिस अब मेडिकल बोर्ड से पूनम की मनोवैज्ञानिक जांच कराने की तैयारी में है।

“सबका नाश कर दूंगी”—क्या संकेत थे पहले से?
परिवार का कहना है कि पूनम कई महीनों से बदले हुए व्यवहार के संकेत दिखा रही थी, जिसे उन्होंने नजरअंदाज किया।
- कम बोलना
- अचानक चुप हो जाना
- अपने बच्चों से दूरी
- बड़बड़ाना
ये सब लक्षण किसी गंभीर मानसिक समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

चार मासूमों की मौत ने खड़े किए कई सवाल
इस हत्याकांड ने तमाम सवालों को जन्म दिया है—
- क्या परिवार ने उसके बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए था?
- क्या पूनम मानसिक बीमारी से जूझ रही थी?
- क्या माता-पिता या गृहिणियों का मानसिक स्वास्थ्य अक्सर अनदेखा रह जाता है?
- क्या गांवों में साइकोलॉजिकल समस्याओं को “भूत-प्रेत” कहकर टाल दिया जाता है?
इन सभी प्रश्नों के जवाब पुलिस जांच और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होंगे।।
