मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी मुनिराज : जीवन परिचय
(मनोज जैन नायक, मुरैना की कलम से)
आध्यात्मिक व्यक्तित्व-
दिगम्बर जैन साधु संतों की परम्परा में परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागरजी मुनिराज का नाम अत्यंत ही श्रद्धा, विनय और भक्ति के साथ लिया जाता है । मेडिटेशन गुरु के नाम से ख्याति प्राप्त उपाध्यायश्री विहसंतसागरजी मुनिराज
वर्तमान जैन समाज के उन विशिष्ट संतों में हैं, जिन्होंने ध्यान, स्वाध्याय, संयम और अध्यात्म के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन को नई दिशा प्रदान की है। उनकी सरलता, गंभीर साधना, ओजस्वी प्रवचन शैली तथा युवाओं को धर्म से जोड़ने का सतत प्रयास उन्हें विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
जन्म एवं पारिवारिक परिचय-
उपाध्यायश्री बिहसंत सागर का गृहस्थ अवस्था का नाम पंकज जैन था। आपका जन्म 12 अगस्त 1983 को जगदलपुर (बस्तर), छत्तीसगढ़ में एक धार्मिक श्रावक श्रेष्ठी दिगम्बर जैन श्री बृजेश जैन तथा श्रीमती मीना जैन के परिवार में हुआ था । आपका पैतृक ग्राम माडुमड, अतिशय क्षेत्र पपौरा जी, जिला टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) के समीप स्थित है ।

प्रारम्भिक जीवन एवं वैराग्य-
बाल्यकाल से ही धार्मिक संस्कारों का प्रभाव रहा। आप बाल्यकाल से ही देव शास्त्र गुरु के प्रति श्रद्धानवत रहे । दिगम्बर जैन मुनियों के प्रथम दर्शन मात्र से आपके अंतर्मन में वैराग्य की ऐसी ज्योति प्रज्वलित की कि सांसारिक जीवन से विरक्ति उत्पन्न हो गई। अध्ययन के साथ-साथ धर्म, ध्यान और आत्मचिंतन में आपकी विशेष रुचि रही। आपने औपचारिक शिक्षा दसवीं कक्षा तक प्राप्त की।
संयम यात्रा-
22 अप्रैल 2001 – ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण, 24 मई 2004 (श्रुत पंचमी), नागपुर (महाराष्ट्र) – क्षुल्लक दीक्षा, 27 फरवरी 2012, सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी – मुनि दीक्षा, 13 फरवरी 2023, श्री विरागोदय तीर्थ, पथरिया (जिला दमोह) – उपाध्याय पद से विभूषित हुए ।
आपकी दिगम्बरी जैनेश्वरी मुनि दीक्षा बुंदेलखंड के प्रथम दिगंबराचार्य गुरुदेव परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागरजी महाराज के कर कमलों से संपन्न हुई । आपने पूज्य गुरुदेव के चरण सान्निध्य में जैन दर्शन का गहन अध्ययन करते हुए संयम साधना की बारीकियों पर चिंतन किया ।

साधना एवं विशेषताएँ-
उपाध्याय श्री की विशेष रुचि- मेडिटेशन (ध्यान), स्वाध्याय, मनन एवं युवाओं को धर्म के प्रति जागृत करने में रही है। यही कारण है कि समाज उन्हें स्नेहपूर्वक “मेडिटेशन गुरु” के नाम से जानता है।
संयम जीवन में आपने आजीवन तेल, दही, मीठा एवं समस्त मीठे पदार्थों का त्याग कर कठोर तप और अनुशासन का आदर्श प्रस्तुत किया है।
संयम पथ यात्रा में चातुर्मास यात्रा-
संयम पथ की यात्रा में अभी तक आपने ब्रह्मचारी अवस्था में 2001 – जगदलपुर, 2002 – राजनांदगांव, 2003 – झांसी । क्षुल्लक अवस्था में 2004 – बीना, 2005 – भिण्ड, 2006 – आगरा, 2007 – ग्वालियर, 2008 – गाजियाबाद, 2009 – बड़ौत, 2010 – ज्योति नगर, दिल्ली, 2011 – कैलाश नगर, दिल्ली । मुनि अवस्था में 2012 – गुड़गांव, 2013 – विवेक विहार, दिल्ली, 2014 – इन्दिरापुरम (गाजियाबाद), 2015 – लक्ष्मीनगर, दिल्ली, 2016 – बड़ौत उ प्र, 2017 – गाजियाबाद, 2018 – मौजपुर, दिल्ली, 2019 – अतिशय क्षेत्र महातीर्थ बरासो जी (भिण्ड), 2020 – इटावा, 2021 – करहल (उत्तर प्रदेश), 2022 – जैन नगर, नंदीश्वर द्वीप, भोपाल, 2023 – डबरा मप्र, 2024 – आगरा, 2025 – भिण्ड में एवं वर्ष 2026 का मंगल चतुर्मास श्री दिगम्बर जैन मंदिर आशियाना लखनऊ में हो रहा है ।

विशेष उपलब्धि-
उपाध्याय श्री का एक विशिष्ट गौरव यह है कि वे नक्सल प्रभावित जगदलपुर (बस्तर), छत्तीसगढ़ से दीक्षित होने वाले प्रथम दिगम्बर जैन मुनि हैं। यह उपलब्धि न केवल बस्तर क्षेत्र, बल्कि सम्पूर्ण जैन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
पावन प्रेरणा से संचालित निर्माण एवं सेवा प्रकल्प-
उपाध्याय श्री की प्रेरणा से देश के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक धार्मिक, शैक्षणिक एवं सेवा परियोजनाएँ संचालित अथवा निर्माणाधीन हैं, जिनमें अतिशय क्षेत्र महातीर्थ बरासो जी (भिण्ड), विहसंतसागर तीर्थ, जैतपुरा (इटावा), श्री विमल-विराग आरोग्य धाम हॉस्पिटल, महातीर्थ शान्तिधाम, आसई (इटावा), श्री शान्तिनाथ चेरिटेबल हॉस्पिटल, फूफ (भिण्ड), मुनिराज विहसंतसागर भोजनालय, लाल घाटी (भोपाल), श्री शांतिनाथ चैरिटेबल हॉस्पिटल, मौजपुर (दिल्ली), विरागोदय अहिंसा औषधालय, करहल (मैनपुरी), विरागोदय गुरुकुल, पथरिया (दमोह), श्री जी गुरुकुल, मंगलगिरि (सागर), विहसंतसागर पब्लिक स्कूल (VSPS), आगरा, विहसंतसागर हॉस्पिटल, सोनागिर, सम्यग्ज्ञान विराग विद्यापीठ स्कूल, भिण्ड प्रमुख हैं।
उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी मुनिराज का संपूर्ण जीवन संयम, साधना, ध्यान, सेवा और आत्मकल्याण का जीवंत संदेश है। वे अपने प्रवचनों के माध्यम से आत्मचिंतन, ध्यान, अहिंसा, नैतिकता और संस्कारों का संदेश देकर समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी को धर्म और अध्यात्म की ओर अग्रसर कर रहे हैं। उनका व्यक्तित्व आज लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा, आस्था और आत्मजागरण का केंद्र बना हुआ है ।

अवतरण दिवस पर कोटि कोटि नमन
वर्तमान में पूज्य गुरुदेव का 2026 का मंगल चतुर्मास श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर आशियाना, लखनऊ में अति धार्मिक प्रभावनबके साथ चल रहा है । दिगम्बर जैन संत मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंतसागरजी मुनिराज के अवतरण दिवस (12 अगस्त) पर पूज्यश्री के चरणों में मनोज जैन नायक, मुरैना का कोटि कोटि नमन ।
भाव लेखक
मनोज जैन नायक
(स्वतंत्र पत्रकार) मुरैना
