अधिवक्ता ब्रजेन्द्र अहिरवार प्रकरण: निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन
महेंद्र राज जिला ब्यूरो चीफ सागर
निष्पक्ष विवेचना और निर्दोषिता पर प्रकरण समाप्त करने की मांग
अधिवक्ता श्री ब्रजेन्द्र अहिरवार के विरुद्ध दर्ज कथित झूठी एफआईआर की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शी विवेचना तथा उनकी निर्दोषिता सिद्ध होने की स्थिति में प्रकरण के खात्मे की मांग को लेकर जिले के अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास तभी कायम रह सकता है, जब प्रत्येक मामले की जांच निष्पक्षता, पारदर्शिता और साक्ष्यों के आधार पर की जाए।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे अधिवक्ताओं ने प्रशासन से आग्रह किया कि मामले की विवेचना किसी भी प्रकार के राजनीतिक, सामाजिक अथवा अन्य बाहरी दबाव से मुक्त होकर की जाए तथा यदि जांच में आरोप असत्य पाए जाते हैं तो संबंधित प्रकरण को विधि सम्मत रूप से समाप्त किया जाए।
अधिवक्ता समाज ने जताई चिंता
अधिवक्ता समाज का कहना है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे आपराधिक प्रकरण में फँसाना न केवल उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अधिवक्ताओं ने कहा कि विधि का मूल सिद्धांत यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण प्रक्रिया का अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य किसी निर्दोष को परेशान करना नहीं, बल्कि सत्य का पता लगाकर दोषी के विरुद्ध उचित कार्रवाई करना है। इसलिए विवेचना का प्रत्येक चरण पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न होना चाहिए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपा गया ज्ञापन
प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को संबोधित ज्ञापन में मांग की कि पूरे प्रकरण की पुनः गंभीरता से समीक्षा कर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विवेचना कराई जाए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जांच अधिकारी केवल उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और प्रत्यक्ष तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालें तथा किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव को स्वीकार न करें।
अधिवक्ताओं ने कहा कि निष्पक्ष जांच न केवल संबंधित पक्ष को न्याय दिलाएगी, बल्कि पुलिस और न्याय व्यवस्था के प्रति आम नागरिकों के विश्वास को भी मजबूत करेगी।

अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से अधिवक्ता समाज ने प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं—
- प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शी विवेचना सुनिश्चित की जाए।
- जांच प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या प्रभाव से मुक्त रखा जाए।
- उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाए।
- यदि विवेचना में अधिवक्ता ब्रजेन्द्र अहिरवार निर्दोष पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरण का विधि अनुसार खात्मा किया जाए।
- न्याय व्यवस्था की गरिमा एवं अधिवक्ता समुदाय के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
न्याय व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने पर जोर
अधिवक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका, पुलिस और अधिवक्ता—तीनों न्याय प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। यदि किसी भी स्तर पर निष्पक्षता प्रभावित होती है तो इसका प्रतिकूल प्रभाव संपूर्ण न्याय व्यवस्था पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस विवेचना का उद्देश्य केवल अपराध की जांच करना नहीं, बल्कि सत्य तक पहुँचना भी है। इसलिए प्रत्येक जांच निष्पक्ष और प्रमाण-आधारित होनी चाहिए। अधिवक्ता समाज ने अपेक्षा व्यक्त की कि पुलिस प्रशासन इस मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करेगा।
विधि के शासन पर जताया विश्वास
ज्ञापन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि उन्हें भारतीय संविधान, कानून और न्यायिक प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास है। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर अनावश्यक आरोप लगाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना है ताकि न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून सर्वोपरि है और प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई तथा न्याय पाने का अधिकार प्राप्त है। यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप साक्ष्यों से सिद्ध नहीं होते हैं तो उसे अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया से मुक्त किया जाना चाहिए।
बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की रही उपस्थिति
ज्ञापन सौंपने के दौरान अधिवक्ता श्री संजय द्विवेदी, श्री धन सिंह, श्री कमलेश सिंह ठाकुर, श्री कल्याण सिंह दांगी, श्री नरेन्द्र सिंह, श्री रामदास राज, श्री अंकलेश्वर दुबे, श्री दुष्यंत मिश्रा, श्री कालीचरण मिश्रा, श्री रोशन कुर्मी, श्री नरेन्द्र लोधी, श्री पुष्पेंद्र प्रजापति, श्री पंकज त्रिवेदी, श्री लखनलाल राठौर, श्री अर्जुन सिंह कुर्मी, श्री हरिशंकर गौर, श्री राजेन्द्र, श्री कोमल, श्री के.के. राज, श्री घनश्याम पटेल, श्री संजय गायकवाड़, श्री शिवा पटेल, श्री अरविंद अहिरवार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
सभी अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और अधिवक्ता समुदाय की गरिमा बनाए रखने के लिए वे सदैव संगठित रहेंगे तथा कानून के दायरे में रहकर अपनी बात प्रशासन के समक्ष रखते रहेंगे।
निष्पक्ष जांच से ही स्थापित होगा न्याय
अधिवक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि पुलिस प्रशासन इस प्रकरण में निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करेगा। उनका कहना था कि यदि जांच केवल तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी तो सत्य स्वतः सामने आएगा और न्याय व्यवस्था के प्रति समाज का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता निष्पक्ष न्याय पर निर्भर करती है। इसलिए प्रत्येक जांच एजेंसी का दायित्व है कि वह निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों का पालन करते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे।
अधिवक्ता समाज का संदेश
ज्ञापन के अंत में अधिवक्ता समाज ने स्पष्ट किया कि उनका यह प्रयास किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि न्याय, सत्य और विधि के शासन की रक्षा के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि मामले की विवेचना शीघ्र, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित तरीके से पूरी की जाएगी।
अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से कहा—
“न्याय, सत्य और विधि के सम्मान की रक्षा हेतु अधिवक्ता समाज सदैव एकजुट है। निष्पक्ष जांच ही न्याय का आधार है और कानून का शासन ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।”
