62 वर्षीय धाविका क्षमा रेडेकर का थाईलैंड मास्टर गेम्स के लिए चयन हुआ है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण मदद की ज़रूरत है। पूरा संघर्ष पढ़ें।
संघर्ष से शिखर तक: 62 वर्षीय धाविका क्षमा रेडेकर की प्रेरक कहानी
तमाम मेडल जीत चुकीं, अब देश के लिए दौड़ने को तैयार — लेकिन आर्थिक संकट बना रोड़ा
मुंबई। क्षमा रेडेकर — यह नाम सिर्फ एक धाविका का नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल है। 62 वर्ष की उम्र में भी रोज़ाना 5 किलोमीटर दौड़ लगाने वाली यह वरिष्ठ महिला खिलाड़ी आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने के बिल्कुल करीब हैं।
थाईलैंड में आयोजित होने वाले मास्टर गेम्स और फरवरी 2026 की बॉर्डर मैराथन के लिए क्षमा रेडेकर का चयन हो चुका है। लेकिन विडंबना यह है कि आर्थिक तंगी उनके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गई है।
स्टार रिपोर्ट मैगज़ीन कार्यालय में सम्मान
स्टार रिपोर्ट मैगज़ीन कार्यालय में धाविका क्षमा रेडेकर ने प्रधान संपादक हार्दिक हुंडिया से सदिच्छा भेंट की। इस अवसर पर हार्दिक हुंडिया ने उपवस्त्र एवं सुवर्ण पुष्प भेंट कर उनका भव्य सम्मान किया।
यह सम्मान केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि एक ऐसे संघर्ष को सलाम था, जो दशकों से लगातार दौड़ता आ रहा है।
17 साल की उम्र में कांदिवली से चर्चगेट तक ऐतिहासिक मैराथन
क्षमा रेडेकर ने अपने शाला जीवन में ही असाधारण साहस दिखाया। मात्र 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने नशा मुक्त भारत के संदेश के साथ कांदिवली से चर्चगेट तक हाथ में मशाल लेकर अकेले मैराथन दौड़ पूरी की।
इस ऐतिहासिक दौड़ के बाद तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर मीरा बोरवणकर ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका सम्मान किया और पुलिस विभाग में भर्ती होने का सुझाव दिया।
क्षमा बताती हैं कि उन्हें किरण बेदी और मीरा बोरवणकर जैसी सशक्त महिलाओं से गहरी प्रेरणा मिली।
पुलिस सेवा और 16 नेशनल मेडल की उपलब्धि
साल 1991 में क्षमा रेडेकर ठाणे शहर में महिला पुलिस शिपाई (खिलाड़ी कोटा) के रूप में भर्ती हुईं।
करीब 29 वर्ष 9 माह की निष्कलंक सेवा के दौरान उन्होंने:
- गोल्ड मेडल
- सिल्वर मेडल
- ब्रॉन्ज मेडल
मिलाकर 16 राष्ट्रीय पदक जीते और मुंबई पुलिस को कई बार चैंपियनशिप दिलाई।
सेवानिवृत्ति के बाद भी दौड़ता जुनून
सन 2021 में सेवानिवृत्ति लेने के बाद भी क्षमा रेडेकर का जुनून थमा नहीं।
आज तक वे:
- लगभग 50 मेडल
- 15 ट्रॉफी
अपने नाम कर चुकी हैं।
उन्हें फिटनेस आइकन मिलिंद सोमण के हाथों विशेष सम्मान भी मिल चुका है।
2025 में उन्होंने:
- राज्य स्तरीय 4 गोल्ड मेडल
- टाटा हाफ मैराथन (21.97 किमी) सफलतापूर्वक पूरी की
थाईलैंड मास्टर गेम्स: सपना और आर्थिक संकट
अब क्षमा रेडेकर का चयन थाईलैंड में होने वाले मास्टर गेम्स के लिए हो चुका है।
लेकिन यात्रा, पंजीकरण, प्रशिक्षण और ठहराव का खर्च वहन करना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा।
वरिष्ठ नागरिक होने के बावजूद वे आज भी रोज़ सुबह-शाम दौड़ लगाकर युवाओं को प्रेरित करती हैं।
देश और सरकार से भावुक अपील
क्षमा रेडेकर कहती हैं:
“आज तक मैं अपने लिए दौड़ी, अब देश के लिए दौड़ना चाहती हूं।
आर्थिक स्थिति कमजोर है, लेकिन हौसले मजबूत हैं।
सरकार और समाज से निवेदन है कि मुझे मदद करें, ताकि मैं अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर सकूं।”
समाज के लिए संदेश
क्षमा रेडेकर का मानना है:
- रोज़ दौड़ने या चलने से BP और शुगर नियंत्रित रहती है
- शरीर की नसें सक्रिय रहती हैं
- उम्र सिर्फ एक संख्या है, हौसला असली ताकत है
