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काश में पुराने समय में लौट पाती: 01 अपूर्ण सपनों की माँ के पास लौटने की सशक्त कोशिश, पढ़िए काजल की दर्द भरी कविता

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Published On: 2 April 2026
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काश में पुराने समय में लौट पाती – यह सिर्फ एक ख्वाब नहीं, बल्कि हर उस बच्चे की आवाज है जिसने माँ को खोया। पढ़िए राजस्थान की काजल की मार्मिक रचना।

काश में पुराने समय में लौट पाती: एक भावनात्मक आत्मचिंतन

आज की भागती-दौड़ती ज़िंदगी में एक शब्द बहुत छोटा है, लेकिन उसका दर्द बहुत गहरा है – ‘काश’। 02 अप्रैल 2026 को राजस्थान की रहने वाली काजल मनीष जैन ने एक कविता के माध्यम से अपने मन की पीड़ा लिखी। इस कविता का शीर्षक है “काश में पुराने समय में लौट पाती”। यह सिर्फ एक कविता नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति की दास्तान है जिसने अपनी माँ की गोद की गर्माहट को समय के आगे खो दिया।

क्यों हर इंसान के मन में ये ‘काश’ रह जाता है?

समय का पहिया जब चलता है, तो वह पीछे मुड़कर नहीं देखता। हर इंसान के जीवन में कुछ अधूरी इच्छाएँ, कुछ अनकही बातें और कुछ टूटे सपने होते हैं। माँ के साथ का रिश्ता सबसे अनमोल होता है। जब वह नहीं रहती, तो घर की हर नन्हीं चीज़ उसकी याद दिलाती है। काजल लिखती हैं, “माँ की हर छोटी चीज़ भी कहीं दिखे तू नज़र आती है।”

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काजल और मनीष जैन की लेखनी से: माँ के लिए एक चिट्ठी

काजल ने इस कविता में माँ को संबोधित करते हुए लिखा है कि अगर वह समय में पीछे लौट सकें, तो माँ की सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी करें। वह कहती हैं कि माँ के साथ का सफर अधूरा रह गया। यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि लाखों लोगों की व्यथा है।

काश में पुराने समय में लौट पाती -बचपन की गोद और अधूरी बातें

“काश में पुराने समय में लौट पाती” – यह वाक्य इस पूरे लेख का मूलभूत सार है। काजल कहती हैं कि वह टाइम मशीन चाहती हैं, जैसी कहानियों में होती है। वह चाहती हैं कि माँ उन्हें फिर से छू लें और वह माँ की गोद में सो सकें। यह चित्र-आधारित भावना हर उस तस्वीर में छिपी है जहाँ बच्चा अपनी माँ से लिपटा हो।

क्या टाइम मशीन वाकई जवाब है?

हालाँकि विज्ञान कहता है कि समय यात्रा (Time Travel) संभव नहीं है, लेकिन काजल की यह कविता हमें यह सिखाती है कि हमें अपने वर्तमान को बेहतर बनाना चाहिए। हम ‘काश’ में नहीं, बल्कि ‘अब’ में जीना सीखें। काजल के शब्द हमें याद दिलाते हैं कि जब तक माँ साथ है, हर पल उसे अपना बनाएँ।

6. अंतिम भाव: मिस यू माँ

कविता के अंत में काजल लिखती हैं, “तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगता, घर सूना लगता है।” यह पंक्तियाँ किसी का भी दिल पिघला सकती हैं। उन्होंने इस पूरी करुणा को ‘राजस्थान’ की माटी की सोंधी खुशबू के साथ जोड़ा है।

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