Jhaknavada शोक में डूबा: जिनशासन के सेवक कनकमल मांडोत का निधन, परिवार ने किया नेत्रदान
Jhaknavada । नगर के श्रद्धालु और जिनशासन के समर्पित सेवक, श्री कनकमल मांडोत (पूर्व व्यवस्थापक) का शुक्रवार-शनिवार की मध्यरात्रि में आकस्मिक निधन हो गया। उनकी आकस्मिक विदाई ने नगर में गहरा शोक पैदा कर दिया। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय मांडोत के जाने से झकनावदा समुदाय को अपूरणीय क्षति हुई है।
जीवन और सेवाकार्य
कनकमल मांडोत ने लंबे समय तक श्री केसरियानाथ देरासर में व्यवस्थापक के रूप में सेवाएँ दीं। इस दौरान उन्होंने भगवान श्री आदिनाथ एवं जिनशासन के प्रति गहरी निष्ठा और समर्पण का परिचय दिया। उनका जीवन सदैव धर्म और समाज सेवा के मार्ग पर केंद्रित रहा।
मांडोत नगर के लगभग सभी मंदिरों में नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते थे। वे केवल व्यवस्थापक नहीं थे, बल्कि जिनशासन के लिए उनके समर्पण और निष्ठा का प्रतीक थे। धार्मिक आयोजनों में उनकी भागीदारी और प्रेरक नेतृत्व ने अनेक अनुयायियों और श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया।
समाज और सेवा में योगदान
कनकमल मांडोत ने अपने जीवन में जीवदया और सेवा कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने नगर के कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभाई। उनका योगदान केवल धार्मिक नहीं था, बल्कि सामाजिक उत्थान और मानवीय सहायता में भी अद्वितीय था।
उनकी जीवन शैली और कार्यों ने यह संदेश दिया कि सेवा और समर्पण के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। नगर चौरासी जैसे पुण्य कार्यों में उनकी भागीदारी उनके धर्मप्रेम और अनुशासन की स्पष्ट झलक देती थी।

नेत्रदान: एक प्रेरणादायक निर्णय
कनकमल मांडोत के निधन के पश्चात परिवार ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद और तेरापंथ युवक परिषद झकनावदा प्रयास के माध्यम से नेत्रदान का निर्णय लिया। इस पुण्य कार्य से दो लोगों को नई दृष्टि मिलने की संभावना है।
यह कदम न केवल उनके जीवन की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी फैलाता है। उनके इस निर्णय ने यह साबित किया कि सेवा केवल जीवन में ही सीमित नहीं रहती, बल्कि मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में प्रकाश ला सकती है।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
शनिवार को आयोजित उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समाजजन, रिश्तेदार और नगरवासी उपस्थित हुए। नम आंखों और श्रद्धापूर्ण भावों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उपस्थित लोगों ने उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
समाज के वरिष्ठ नागरिकों, धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय समुदाय के लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उनके द्वारा किए गए सेवा कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज के लिए आदर्श रहेगा।
धार्मिक और सामाजिक छवि
मांडोत की जीवन यात्रा इस बात का प्रमाण है कि धर्म और समाज सेवा का मार्ग केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होता। उनका दृष्टिकोण और कार्य समाज में प्रेरणा का स्रोत बने। उन्होंने यह सिखाया कि जीवन का उद्देश्य केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज और मानवता के लिए होना चाहिए।
वे अपनी विनम्रता, ईमानदारी और निष्ठा के कारण नगर में अत्यंत लोकप्रिय थे। उनकी सोच और योगदान ने कई युवाओं को भी समाज सेवा और धार्मिक जिम्मेदारी की ओर प्रेरित किया।
परिवार और व्यक्तिगत जीवन
कनकमल मांडोत अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए। उनके परिवार के सदस्य उनके आदर्शों और मार्गदर्शन को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। परिवार की दृष्टि से यह समय भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उनके द्वारा किए गए धर्म और सेवा कार्य समाज के लिए प्रेरक बने रहेंगे।
सेवा का संदेश
मांडोत ने अपने जीवन में दिखाया कि सेवा और समर्पण ही सच्ची महानता का आधार हैं। उन्होंने नगर और समुदाय में यह संदेश फैलाया कि किसी भी व्यक्ति का जीवन समाज के लिए लाभकारी होना चाहिए। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।
निष्कर्ष
कनकमल मांडोत का जीवन और उनके द्वारा किए गए सेवा कार्य समाज और धार्मिक समुदाय के लिए एक अमूल्य विरासत है। उनकी प्रेरणा और आदर्श हमेशा स्मरणीय रहेंगे। नेत्रदान का उनका निर्णय उनके समर्पण और मानवता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का प्रतीक है।
उनकी यादें और सेवा का संदेश आने वाली पीढ़ियों को धर्म और समाज सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा। झकनावदा नगर उनके योगदान को सदैव स्मरण करेगा और उनका जीवन समाज के लिए आदर्श बना रहेगा।
