जैन समाज जागरण को लेकर हार्दिक हुंडिया ने देशभर के जैन समाज से अपील की है कि करोड़ों रुपये के धार्मिक प्रोजेक्ट्स और दिखावे पर खर्च कम कर साधर्मिक भाइयों को मजबूत बनाया जाए। पढ़िए पूरा बयान।
जैन समाज जागरण: हार्दिक हुंडिया ने साधर्मिकों को मजबूत करने और धार्मिक खर्चों पर पुनर्विचार की उठाई मांग
जैन समाज जागरण: हार्दिक हुंडिया की अपील
जैन समाज जागरण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता हार्दिक हुंडिया ने देशभर के जैन समाज और चतुर्विध संघ से भावनात्मक अपील करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जब समाज को धार्मिक परियोजनाओं पर होने वाले करोड़ों और अरबों रुपये के खर्च पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।उन्होंने कहा कि मंदिर, उपाश्रय, धर्मशाला और भोजनशालाओं के निर्माण में बड़ी मात्रा में धन लगाया जा रहा है, लेकिन समाज के साधर्मिक भाइयों को मजबूत बनाने की दिशा में अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं देते।
धार्मिक खर्चों पर पुनर्विचार की जरूरत
जैन समाज जागरण के संदर्भ में हार्दिक हुंडिया ने कहा कि समाज को यह सोचना चाहिए कि जहां करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, क्या वह वास्तव में समय की मांग है।उन्होंने सवाल उठाया कि जिन स्थानों पर जैन समाज की आबादी नगण्य है, वहां भव्य मंदिर और धार्मिक परियोजनाओं पर भारी निवेश करने के बजाय समाज के लोगों को शिक्षित, संगठित और सशक्त बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।हार्दिक हुंडिया ने कहा कि आने वाले समय में इन धार्मिक परिसरों के संचालन और संरक्षण की जिम्मेदारी कौन निभाएगा, इस पर भी विचार आवश्यक है।
खिचड़ी घर और दान व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि समाज के कई दानदाता वर्षों से खिचड़ी घर और भोजन सेवा जैसी योजनाएं चला रहे हैं।उन्होंने प्रश्न किया कि क्या यह सहायता वास्तव में सुपात्र तक पहुंच रही है या नहीं।उनका मानना है कि यदि दान कुपात्र तक पहुंच रहा है तो समाज को अपनी दान नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और जरूरतमंद साधर्मिक परिवारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
वाइट पट्टी विवाद का भी किया उल्लेख
जैन समाज जागरण के मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए हार्दिक हुंडिया ने मुंबई के घाटकोपर और दादर आराधना भवन क्षेत्र में हुए वाइट पट्टी विवाद का उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि संतों और साधुओं की सुविधा के लिए बनाई गई सफेद पट्टी को कुछ लोगों द्वारा विरोध स्वरूप काले रंग से ढंक दिया गया।
हार्दिक हुंडिया का कहना है कि यदि समाज एक साधारण सफेद पट्टी की रक्षा नहीं कर पा रहा है तो भविष्य में धार्मिक और सामाजिक अधिकारों की रक्षा कैसे कर पाएगा।
साधर्मिक भाइयों को मजबूत बनाने की आवश्यकता
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में समाज को दिखावटी आयोजनों और अत्यधिक खर्च वाले कार्यक्रमों से बचना चाहिए।उन्होंने कहा कि चातुर्मास और अन्य धार्मिक आयोजनों में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम कर समाज के युवाओं, व्यवसायियों और जरूरतमंद साधर्मिक परिवारों को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।उनका मानना है कि समाज तभी सुरक्षित रहेगा जब उसका आर्थिक और सामाजिक आधार मजबूत होगा।
समाज में धर्म के प्रति खुमारी जरूरी
हार्दिक हुंडिया के अनुसार जैन समाज को धर्म के प्रति गर्व और जागरूकता की भावना विकसित करनी होगी।उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे शासन भक्तों और धर्मप्रेमियों को सामने लाना चाहिए जो जैन धर्म और जैन समाज के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभा सकें।
संत निलेश चंद्र विजय जी की सराहना
अपने वक्तव्य में हार्दिक हुंडिया ने संत निलेश चंद्र विजय जी का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि मराठी परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने महाराष्ट्र में जैन समाज की आवाज को मजबूती से उठाया है।उन्होंने कहा कि ऐसे संतों की आज समाज को आवश्यकता है जो विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित करते हुए जैन धर्म के मूल्यों को आगे बढ़ाएं।
प्रवीण भाई छेड़ा का भी किया उल्लेख
हार्दिक हुंडिया ने अपने बयान में प्रवीण भाई छेड़ा का नाम लेते हुए कहा कि जैन धर्म के खिलाफ की जाने वाली टिप्पणियों और प्रचार के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने वाले समाज के लोगों को आगे आना चाहिए।उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो जैन समाज के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़ा हो सके।
जैन समाज के लिए संदेश
हार्दिक हुंडिया ने देशभर के जैन समाज से आह्वान किया कि वे समाजहित को प्राथमिकता दें और ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित न करें जो समाज को कमजोर करते हों।उन्होंने कहा कि यदि जैन समाज को मजबूत बनाना है तो आर्थिक, सामाजिक और वैचारिक रूप से साधर्मिकों को सशक्त बनाना होगा।
निष्कर्ष
जैन समाज जागरण को लेकर हार्दिक हुंडिया का यह बयान समाज के भीतर चल रही विभिन्न चर्चाओं को नया आयाम देता है। उनका मुख्य संदेश यह है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज की संगठनात्मक और सामाजिक मजबूती पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
