Badawada सहनशीलता ही सच्ची पूजा का आधार: मुनिराज संयम रत्न विजय
Badawada । जिर्णोद्धार प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज संयम रत्न विजय ने सहनशीलता, संयम और गुरु के महत्व पर गहन विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस संसार में उसी व्यक्ति की सच्ची पूजा होती है, जो सहनशील होता है। जीवन में जो सहन करना सीख लेता है, वही स्थिर रहता है और आगे बढ़ता है।
अयोध्या नगरी स्थित सभा मंडप में आयोजित इस धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुनिश्री ने अपने प्रवचन में जीवन को एक वाहन के रूप में उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बिना ब्रेक का वाहन चाहे कितना ही महंगा क्यों न हो, वह सुरक्षित नहीं माना जाता और कोई भी उसमें सफर करना पसंद नहीं करता। उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में गुरु ब्रेक के समान होते हैं। यदि जीवन में गुरु का मार्गदर्शन नहीं हो, तो जीवन की दिशा भटक सकती है।
गुरु के मार्गदर्शन से संवरता है जीवन
मुनिराज संयम रत्न विजय ने कहा कि आज के समय में लोग बाहरी सौंदर्य पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन असली आवश्यकता मन को सुंदर बनाने की है। उन्होंने कहा कि “तन का मेकअप करने से पहले मन का मेकअप जरूरी है, और यह कार्य केवल गुरु ही कर सकते हैं।”
उन्होंने समझाया कि शरीर को चाहे जितना सजा लिया जाए, वह कुछ समय बाद फिर पहले जैसा हो जाता है, लेकिन यदि मन को शुद्ध और निर्मल बना लिया जाए, तो जीवन पूरी तरह बदल सकता है। मन को पवित्र और उज्ज्वल बनाने के लिए मंदिर और जिनालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वहां व्यक्ति आत्मचिंतन और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करता है।
सहनशीलता और सकारात्मकता का महत्व
अपने प्रवचन में मुनिश्री ने सहनशीलता को जीवन का सबसे बड़ा गुण बताया। उन्होंने कहा कि दूसरों की आलोचना करना या उन पर हंसना बहुत आसान है, लेकिन किसी को खुशी देना और हंसाना बहुत कठिन कार्य है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने व्यवहार में सकारात्मकता लानी चाहिए और दूसरों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सहनशीलता केवल एक गुण नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रहने की शक्ति देती है और उसे मानसिक रूप से मजबूत बनाती है।
जिर्णोद्धार प्रतिष्ठा 8 मई को
कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी गई कि जिर्णोद्धार प्रतिष्ठा महोत्सव का मुख्य आयोजन 8 मई को संपन्न होगा। इस अवसर को लेकर समाज में उत्साह का माहौल है और विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन लगातार किया जा रहा है।
