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इंदौर में शास्त्री ब्रिज तोड़ने से पहले ट्रैफिक डायवर्जन की चुनौती, वैकल्पिक मार्गों पर मंथन तेज

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Published On: 8 September 2026
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इंदौर में शास्त्री ब्रिज तोड़ने से पहले ट्रैफिक डायवर्जन की चुनौती, वैकल्पिक मार्गों पर मंथन तेज

करीब दो साल चलेगा नए रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण; एमटीएच कंपाउंड से झाबुआ टावर तक दोपहिया वाहनों के लिए अलग ब्रिज बनाने का सुझाव

इंदौर। शहर की प्रमुख यातायात लाइफलाइन माने जाने वाले शास्त्री रेलवे ओवरब्रिज को तोड़कर नए सिरे से बनाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित निर्माण में करीब दो साल लग सकते हैं। इस अवधि में ब्रिज से गुजरने वाले भारी यातायात को किस मार्ग पर डायवर्ट किया जाएगा, यह रेलवे और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

शास्त्री ब्रिज पूर्वी इंदौर को रेलवे स्टेशन, मध्य क्षेत्र और पश्चिमी इंदौर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चार पहिया और सार्वजनिक वाहन इस पुल से गुजरते हैं। ऐसे में ब्रिज बंद करने से पहले वैकल्पिक रास्तों की क्षमता, यातायात का दबाव और चौराहों की व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करना जरूरी होगा।

रेलवे बोर्ड चेयरमैन ने किया निरीक्षण

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार ने रविवार को इंदौर रेलवे स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शास्त्री ब्रिज की मौजूदा स्थिति और उसके पुनर्निर्माण की प्रस्तावित योजना का भी जायजा लिया।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण शुरू करने से पहले ठोस ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया जाए। लंबे समय तक यातायात पूरी तरह रोकना संभव नहीं होगा। इसलिए शहर के विशेषज्ञों, यातायात पुलिस, नगर निगम और रेलवे अधिकारियों से चर्चा करके व्यावहारिक विकल्प खोजे जाएंगे।

दो साल तक प्रभावित हो सकता है आवागमन

शास्त्री रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में लगभग दो साल का समय लगने की संभावना है। इस अवधि में रीगल चौराहे और एमजी रोड से राजवाड़ा, जवाहर मार्ग, राजमोहल्ला एवं पश्चिमी इंदौर की तरफ जाने वाले वाहन प्रभावित होंगे।

वर्तमान में आसपास के वैकल्पिक मार्गों पर भी यातायात का काफी दबाव रहता है। यदि शास्त्री ब्रिज का पूरा ट्रैफिक एक ही रास्ते पर भेजा गया तो वहां गंभीर जाम की स्थिति बन सकती है। इसलिए अलग-अलग प्रकार के वाहनों के लिए अलग मार्ग निर्धारित करने पर विचार किया जा रहा है।

पटेल ब्रिज पर बढ़ सकता है दबाव

शास्त्री ब्रिज बंद होने के बाद वाहनों का बड़ा हिस्सा पटेल ब्रिज की ओर जा सकता है। पटेल ब्रिज पुराना होने के साथ पहले से ही भारी यातायात का दबाव झेल रहा है। यहां से जवाहर मार्ग और आसपास के बाजारों तक पहुंचने में व्यस्त समय के दौरान परेशानी होती है।

ऐसे में शास्त्री ब्रिज का अतिरिक्त ट्रैफिक पटेल ब्रिज पर भेजने से जाम की समस्या बढ़ सकती है। प्रशासन को इस मार्ग पर अतिक्रमण, पार्किंग और यातायात बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता होगी।

एमटीएच कंपाउंड से झाबुआ टावर तक नए ब्रिज का सुझाव

यातायात का दबाव कम करने के लिए एमटीएच कंपाउंड से झाबुआ टावर तक दोपहिया वाहनों के लिए नया ब्रिज बनाने का सुझाव सामने आया है। इस विकल्प पर रेलवे अधिकारियों और शहर के जानकारों के साथ विचार किया जाएगा।

यदि तकनीकी सर्वेक्षण में यह प्रस्ताव व्यावहारिक पाया जाता है तो दोपहिया वाहनों को नया वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है। इससे पटेल ब्रिज और अन्य रास्तों पर पड़ने वाला दबाव कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। हालांकि इसके लिए जमीन की उपलब्धता, लागत, डिजाइन और रेलवे की अनुमति का परीक्षण करना होगा।

राजकुमार ब्रिज सहित दूसरे मार्गों पर भी विचार

राजकुमार ब्रिज को भी वैकल्पिक रास्ते के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना है। पूर्वी इंदौर से आने वाले वाहन एलआईजी, एमआईजी, अटल द्वार, परदेशीपुरा और भंडारी ब्रिज होते हुए मध्य एवं पश्चिमी क्षेत्र की तरफ जा सकते हैं।

इन रास्तों को डायवर्जन के लिए उपयोग करने से पहले सड़क चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने और चौराहों की यातायात व्यवस्था सुधारने की जरूरत पड़ सकती है। भारी वाहनों और सिटी बसों के लिए भी अलग योजना बनाई जा सकती है।

स्टेशन भवन के ऊपर से निकलेगा नया ब्रिज

प्रस्तावित डिजाइन के अनुसार नए ब्रिज को रेलवे स्टेशन भवन और सभी प्लेटफॉर्म के ऊपर से निकाला जाना है। स्टेशन की तरफ वाली इसकी भुजा की मौजूदा संरचना में भी बड़ा बदलाव करना होगा। स्टेशन के पुनर्विकास और ओवरब्रिज के निर्माण को एक साथ समायोजित करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।

पुराने ब्रिज से जुड़ी सीवर लाइन और अन्य उपयोगिता सेवाओं को भी स्थानांतरित करना पड़ सकता है। ब्रिज की नई डिजाइन, पिलर की स्थिति और रेलवे ट्रैक के ऊपर निर्माण के लिए विस्तृत तकनीकी योजना बनाई जाएगी।

सिंहस्थ से पहले पूरा होना मुश्किल

रेलवे इस परियोजना की प्रारंभिक प्रक्रियाएं जल्द शुरू करना चाहता है। इनमें डिजाइन तैयार करना, निविदा जारी करना, निर्माण एजेंसी तय करना और प्रारंभिक पिलर निर्माण जैसे कार्य शामिल हो सकते हैं।

हालांकि ब्रिज को पूरी तरह तोड़कर सिंहस्थ से पहले नया निर्माण पूरा करना कठिन माना जा रहा है। सिंहस्थ के दौरान इंदौर आने वाले यात्रियों और वाहनों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे समय शास्त्री ब्रिज का बंद रहना यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।

अंतिम योजना के बाद शुरू होगा निर्माण

नए शास्त्री ब्रिज का निर्माण शुरू करने से पहले रेलवे, नगर निगम, यातायात पुलिस और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से ट्रैफिक डायवर्जन योजना तैयार करेंगे। इसमें वैकल्पिक रास्तों की मरम्मत, संकेतक बोर्ड, पार्किंग नियंत्रण और स्टेशन आने वाले यात्रियों के लिए अलग व्यवस्था शामिल हो सकती है।

फिलहाल ब्रिज तोड़ने की अंतिम तारीख घोषित नहीं की गई है। ठोस डायवर्जन योजना बनने के बाद ही निर्माण की समय-सारणी जारी होने की संभावना है। नया ब्रिज भविष्य में शहर को बेहतर यातायात सुविधा देगा, लेकिन निर्माण के दौरान लगभग दो साल तक यातायात को सुचारु रखना प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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