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Indore बिजली कंपनी के GM वित्त के 9 ठिकानों पर लोकायुक्त की रेड, आय से 258% अधिक संपत्ति का अनुमान

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Published On: 21 July 2026
Indore
— इंदौर बिजली कंपनी के GM वित्त शिवराम सेमिल के ठिकानों पर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

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Indore बिजली कंपनी के GM वित्त के 9 ठिकानों पर लोकायुक्त की रेड, आय से 258% अधिक संपत्ति का अनुमान

Indore : मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के जनरल मैनेजर (वित्त) शिवराम सेमिल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर लोकायुक्त की टीम ने बुधवार को इंदौर, पीथमपुर, धार और मुरैना समेत कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति मिलने की जानकारी सामने आई है।

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, जांच में शिवराम सेमिल की संपत्ति उनकी ज्ञात आय से करीब 258 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। कार्रवाई लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के नेतृत्व में की गई। जांच के दौरान अधिकारियों ने कई मकान, औद्योगिक प्लांट, फैक्टरियों में निवेश और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।

बेटे के नाम ट्रांसफार्मर फैक्टरी, परिजनों के नाम औद्योगिक प्लांट

लोकायुक्त की जांच में सामने आया है कि शिवराम सेमिल के बेटे शुभम सेमिल के नाम पीथमपुर में एक ट्रांसफार्मर निर्माण फैक्टरी संचालित है। इसके अलावा बहू, दामाद और अन्य रिश्तेदारों के नाम से भी कई औद्योगिक इकाइयों और संपत्तियों की जानकारी मिली है।

जांच टीम के अनुसार, पीथमपुर और धार क्षेत्र में पांच औद्योगिक प्लांट का पता चला है, जिनमें करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है। अधिकारियों ने सभी संपत्तियों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।

मुरैना में मिला 50 लाख रुपये का मकान

लोकायुक्त टीम की कार्रवाई के दौरान मुरैना के रविदास नगर में शिवराम सेमिल के नाम से एक दो मंजिला मकान मिला है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई गई है। इस संपत्ति की जांच ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस की टीम कर रही है।

अधिकारियों के अनुसार, शिवराम सेमिल वर्तमान में इंदौर स्थित पॉलीग्राउंड कार्यालय में अधीक्षण यंत्री (वित्त) के पद पर पदस्थ हैं। उनके खिलाफ लंबे समय से आय और संपत्ति के बीच अंतर को लेकर जांच की जा रही थी।

Indore में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

लोकायुक्त टीम को इंदौर के सिलिकॉन सिटी क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण संपत्तियों की जानकारी मिली है। यहां सी-44 प्लॉट पर बना तीन मंजिला मकान मिला है, जिसकी कीमत करीब 1.20 करोड़ रुपये आंकी गई है।

इसके अलावा सिलिकॉन सिटी के सप्तश्रृंगी नगर में शुभम इलेक्ट्रिकल नाम से एक कार्यालय मिला है। इस कार्यालय की अनुमानित कीमत करीब 60 लाख रुपये बताई जा रही है।

पीथमपुर में बेटे के नाम ट्रांसफार्मर फैक्टरी

जांच में पीथमपुर सेक्टर-3 में शुभम सेमिल के नाम से शुभम इलेक्ट्रिकल फैक्टरी मिली है। इस यूनिट में ट्रांसफार्मर बनाने का काम किया जाता है।

लोकायुक्त के मुताबिक, यह फैक्टरी करीब 880 वर्गमीटर क्षेत्र में संचालित है। इस यूनिट पर लगभग 1.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी मिली है। टीम फैक्टरी से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और निवेश की जानकारी जुटा रही है।

बहू और परिजनों के नाम फर्म में निवेश

जांच के दौरान कर्निश पावरजोन नाम की एक फर्म का भी पता चला है। यह फर्म बहू और अन्य परिजनों के नाम से संचालित बताई जा रही है। इसमें करीब 50 लाख रुपये के शेयर निवेश की जानकारी मिली है।

लोकायुक्त टीम को एयरपोर्ट रोड स्थित अंजनी नगर और देवास नाका क्षेत्र में इस फर्म से जुड़े कार्यालयों की जानकारी मिली है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कर्निश पावरजोन के माध्यम से पीथमपुर में दो औद्योगिक प्लॉट खरीदे गए हैं। इनमें से एक प्लॉट पर पहले से गतिविधियां चल रही हैं, जबकि दूसरे पर निर्माण कार्य जारी है। दोनों प्लॉट में करीब 1 करोड़ रुपये तक के निवेश की जानकारी सामने आई है।

धार में भी मिले औद्योगिक प्लांट

लोकायुक्त जांच में धार जिले के उज्जैनी औद्योगिक क्षेत्र में भी कई संपत्तियों का पता चला है। यहां दामाद और बेटे के नाम से एसएस इलेक्ट्रिकल्स के तीन प्लॉट खरीदे गए हैं।

इन प्लॉटों पर करीब 1.50 करोड़ रुपये निवेश किए जाने की जानकारी मिली है। इसके अलावा कृष्णा पावर नाम से एक अन्य भूखंड पर फैक्टरी निर्माण का काम चल रहा है।

जांच टीम को एक रिश्तेदार के नाम से ए-वन इलेक्ट्रिकल नाम की फैक्टरी की जानकारी भी मिली है। इसमें करोड़ों रुपये के निवेश का अनुमान लगाया जा रहा है।

अन्य संपत्तियों की भी जांच जारी

लोकायुक्त पुलिस को ओमेक्स सिटी में बेटों के नाम प्लॉट और शुभम इलेक्ट्रिकल के नाम से करीब 15 लाख रुपये कीमत की इलेक्ट्रिक कार भी मिली है।

फिलहाल लोकायुक्त की अलग-अलग टीमें सभी स्थानों से मिले दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के कागजात और निवेश की जानकारी जुटा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही संपत्ति का वास्तविक मूल्य और आय से अधिक संपत्ति की अंतिम गणना स्पष्ट हो पाएगी।

लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हलचल मच गई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी।

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