—Advertisement—

इंदौर में बस बॉडी और इंटीरियर के नाम पर दो करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप, 18 से ज्यादा संचालकों ने की शिकायत

Author Picture
Published On: 9 October 2026
sdsdsdsdsdsdsdsdsdsdsdsdsdsdsd

—Advertisement—

इंदौर में बस बॉडी और इंटीरियर के नाम पर दो करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप, 18 से ज्यादा संचालकों ने की शिकायत

इंदौर। बसों की बॉडी बनाने और इंटीरियर तैयार करने वाले एक गैरेज संचालक पर दो करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संचालक ने अलग-अलग कामों के लिए एडवांस भुगतान लिया, लेकिन काम पूरा किए बिना संपर्क से बाहर हो गया। मामले में 18 से अधिक बस संचालकों की शिकायत सामने आई है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपी की तलाश और आरोपों की जांच शुरू की है।

बॉडी निर्माण, एसी और सीट कवर के लिए दिया भुगतान

बस मालिकों के अनुसार, गैरेज संचालक को बसों की बॉडी बिल्डिंग, सीट कवर, एयर कंडीशनिंग और कस्टम इंटीरियर तैयार करने के लिए रकम दी गई थी। आरोप है कि भुगतान लेने के बाद कई काम अधूरे छोड़ दिए गए।

शिकायत में बताई गई कुल राशि दो करोड़ रुपये से अधिक है। यह शिकायतकर्ताओं का दावा है; प्रत्येक भुगतान और संबंधित काम का विवरण जांच के बाद स्पष्ट होगा। रकम किस तारीख को, किस माध्यम से और किस कार्य के लिए दी गई, इसका रिकॉर्ड मामले में महत्वपूर्ण होगा।

मोहित उर्फ मन्नू दीक्षित के खिलाफ शिकायत

प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, आरोपी का नाम मोहित उर्फ मन्नू, पिता सत्यनारायण दीक्षित बताया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, वह ‘एमबी बस’ नाम से बसों की बॉडी बनाने और उन्हें जरूरत के अनुसार तैयार करने का काम करता था।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष शिकायत देने वालों में राजा दिव्यांशु बर्मन, प्रथम गुप्ता, सूरज भारद्वाज और शमशेर सिंह सहित अन्य बस संचालकों के नाम सामने आए हैं। उन्होंने लिखित शिकायत के माध्यम से भुगतान और अधूरे काम की जानकारी अधिकारियों को दी।

पुराने कारोबारी संबंधों के कारण किया भरोसा

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरोपी के साथ पहले से व्यावसायिक लेन-देन होने के कारण उन्हें उस पर विश्वास था। इसी भरोसे के चलते बसों का काम शुरू कराने के लिए एडवांस राशि दी गई।

कुछ मामलों में सप्लायरों और कारीगरों का भुगतान नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों और बस मालिकों द्वारा दिए गए भुगतान के बीच संबंध की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों से होगी। अलग-अलग शिकायतों में काम की स्थिति भी भिन्न हो सकती है।

संपर्क नहीं होने पर अधिकारियों तक पहुँचा मामला

बस संचालकों के मुताबिक, काम पूरा नहीं होने और संचालक से संपर्क नहीं हो पाने पर उन्हें गड़बड़ी का संदेह हुआ। उन्होंने गैरेज और उसके संभावित ठिकानों पर तलाश करने की बात भी शिकायत में कही है।

इसके बाद मामला जनसुनवाई में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुँचा। शिकायतकर्ताओं ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी राशि और काम से संबंधित विवरण प्रस्तुत किया। उनका आरोप है कि संचालक अधूरे काम छोड़कर गायब हो गया।

थाना संबंधी जानकारी में अंतर

उपलब्ध खबरों में संबंधित थाने का नाम अलग-अलग बताया गया है। आपके दिए समाचार अंश में भंवरकुआं थाना पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने की जानकारी है, जबकि एक अन्य प्रकाशित रिपोर्ट में विजय नगर थाना लिखा गया है। इसलिए थाने के नाम की अंतिम पुष्टि पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड से आवश्यक है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में प्रकरण दर्ज होने और आरोपी की तलाश की जानकारी सामने आई है। गिरफ्तारी की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

लेन-देन के रिकॉर्ड से स्पष्ट होंगे आरोप

जांच में शिकायतकर्ताओं के आरोपों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा। एडवांस राशि, तय काम और वास्तव में पूरे हुए कार्य का मिलान होने से कथित नुकसान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आरोपी का पक्ष उपलब्ध रिपोर्टों में शामिल नहीं है। पुलिस जांच के निष्कर्षों से उसकी भूमिका और शिकायतों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। अभी मामले को शिकायतों तथा दर्ज प्रकरण के आधार पर सामने आए धोखाधड़ी के आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp