Indore-Dahod Rail Line: जमीन के नीचे दौड़ेगी ट्रेन, ऊपर विकसित होगा सिटी फॉरेस्ट; Tihi Tunnel का 50% काम पूरा
Indore-Dahod Rail Line: इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत पीथमपुर के पास स्थित टीही क्षेत्र में जल्द ही एक अनोखा नजारा देखने को मिल सकता है। यहां जमीन के नीचे ट्रेनें दौड़ेंगी, जबकि उसी सुरंग के ऊपर हरियाली से भरपूर सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जाएगा। रेलवे ने टीही टनल के निर्माण से प्रभावित पर्यावरण की भरपाई के साथ-साथ सुरंग की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसके ऊपर की जमीन को भी अधिग्रहित किया है।
टीही की पहाड़ियों में बनाई जा रही यह सुरंग इंदौर-दाहोद रेल लाइन के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल है। परियोजना के तहत टनल निर्माण के कारण प्रभावित हुए क्षेत्र में हरियाली को फिर से विकसित करने की योजना बनाई गई है। रेलवे का उद्देश्य केवल पर्यावरणीय क्षति की भरपाई करना नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र को आकर्षक और हराभरा स्वरूप देना भी है।
सुरंग के ऊपर बनेगा सिटी फॉरेस्ट
रेलवे ने टीही टनल के दोनों तरफ करीब 7.5-7.5 मीटर अतिरिक्त जमीन अधिग्रहित की है। इसी अतिरिक्त हिस्से को शामिल करते हुए टनल के ऊपर सिटी फॉरेस्ट विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है।
इस योजना की खास बात यह होगी कि यहां पौधों और पेड़ों का चयन सामान्य तरीके से नहीं किया जाएगा। सुरंग की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, जिनकी जड़ें जमीन में अधिक गहराई तक न जाती हों।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि गहरी जड़ों वाले पेड़ों से भविष्य में सुरंग की संरचना पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए पौधों का चयन तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इस तरह ऊपर की जमीन पर हरियाली बढ़ेगी और नीचे बनी रेल सुरंग की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहेगी।
पर्यावरण की भरपाई पर जोर
रेल परियोजनाओं के निर्माण के दौरान जमीन की खुदाई, पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक क्षेत्र में बदलाव जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। टीही टनल के निर्माण के दौरान भी पर्यावरण पर प्रभाव पड़ा है। इसी प्रभाव की भरपाई के लिए रेलवे ने सिटी फॉरेस्ट विकसित करने की योजना बनाई है।
यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। रेलवे की योजना के मुताबिक, सुरंग के ऊपर हरित क्षेत्र विकसित होने के बाद इलाके की खूबसूरती भी बढ़ेगी और स्थानीय पर्यावरण को भी फायदा मिल सकता है।
सिटी फॉरेस्ट में लगाए जाने वाले पौधों को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जाएगी। ऐसे पौधे चुने जाएंगे जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों और जिनकी जड़ें टनल की संरचना तक पहुंचने की संभावना कम हो।
टीही टनल का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा
Indore-दाहोद रेल लाइन की टीही टनल का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार टनल का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। निर्माण में लाइनिंग, फ्लोरिंग और बीएलटी यानी बैलास्टलेस ट्रैक से जुड़े कार्य शामिल हैं।
रेलवे की योजना के अनुसार सितंबर 2026 तक टनल सेक्शन का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद इसे निरीक्षण के अगले चरण में ले जाने की तैयारी है। निरीक्षण और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस सेक्शन से ट्रेनों के संचालन का रास्ता साफ हो सकेगा।
टनल के भीतर रेल ट्रैक का निर्माण सामान्य बैलास्ट वाले ट्रैक के बजाय बीएलटी तकनीक से किया जा रहा है। इससे ट्रैक को सुरंग के भीतर स्थिरता देने में मदद मिलती है और रखरखाव से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
एक ही जगह दिखेगा विकास और हरियाली का संगम
टीही क्षेत्र में इस परियोजना के पूरा होने के बाद एक तरफ आधुनिक रेल बुनियादी ढांचा दिखाई देगा तो दूसरी तरफ उसके ऊपर विकसित हरित क्षेत्र नजर आएगा। यानी नीचे रेल लाइन और ऊपर सिटी फॉरेस्ट—एक ही स्थान पर विकास और पर्यावरण का अनोखा संयोजन देखने को मिलेगा।
रेलवे इस योजना को क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के अवसर के तौर पर भी देख रहा है। सिटी फॉरेस्ट तैयार होने के बाद टीही की पहाड़ियों और आसपास के इलाके का स्वरूप पहले की तुलना में अधिक आकर्षक हो सकता है।
इसके अलावा हरित क्षेत्र विकसित होने से क्षेत्र में पेड़-पौधों की संख्या बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर हरियाली को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
Indore-दाहोद रेल परियोजना के लिए महत्वपूर्ण हिस्सा
Indore -दाहोद रेल लाइन परियोजना मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच रेल संपर्क को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस रेल लाइन से इंदौर और आसपास के क्षेत्रों को पश्चिमी भारत के महत्वपूर्ण हिस्सों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
परियोजना के कई हिस्सों में अलग-अलग तरह के निर्माण कार्य चल रहे हैं। टीही टनल इनमें सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक है। पहाड़ी क्षेत्र में टनल का निर्माण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इसके निर्माण के साथ सुरक्षा और पर्यावरण दोनों पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
रेलवे की योजना के मुताबिक, टनल का निर्माण पूरा होने के बाद निरीक्षण और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के बाद इसे रेल परिचालन के लिए तैयार किया जाएगा। यदि निर्धारित समय के अनुसार काम आगे बढ़ता है तो सितंबर 2026 तक टनल सेक्शन को अगले चरण में पहुंचाने की तैयारी है।
कुल मिलाकर टीही में तैयार होने वाला यह मॉडल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का उदाहरण बन सकता है। जमीन के नीचे आधुनिक रेल लाइन और उसके ऊपर हरियाली से विकसित सिटी फॉरेस्ट आने वाले समय में इस क्षेत्र की पहचान बदल सकता है।
