वरिष्ठ पत्रकार हार्दिक हुंडिया ने पत्रकारिता के 30 वर्ष और स्टार रिपोर्ट मैगजीन ने 20 वर्ष पूरे किए। जानिए उनका जीवन, सकारात्मक पत्रकारिता और समाज सेवा का सफर।
सकारात्मक पत्रकारिता के 30 वर्ष: हार्दिक हुंडिया की बेबाक कलम, ‘स्टार रिपोर्ट’ ने पूरे किए 20 साल
हीरा उद्योग से पत्रकारिता तक का प्रेरणादायक सफर, सामाजिक सेवा, जीवदया और जैन समाज को एकजुट करने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
मुंबई। सकारात्मक सोच, निर्भीक पत्रकारिता और समाज सेवा के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं स्टार रिपोर्ट मैगजीन के प्रधान संपादक हार्दिक हुंडिया ने पत्रकारिता जगत में 30 वर्षों का सफर पूरा किया है। वहीं, उनकी हिंदी पत्रिका स्टार रिपोर्ट ने प्रकाशन के 20 वर्ष पूरे किए हैं। तीन दशकों की इस यात्रा में उन्होंने हीरा उद्योग, सामाजिक सरोकारों, धर्म, संस्कृति और जनहित के मुद्दों को अपनी लेखनी के माध्यम से प्रमुखता से उठाया है।
गुजरात से मुंबई तक का प्रेरणादायक सफर
मूल रूप से राजस्थान के जालौर से संबंध रखने वाले हार्दिक हुंडिया का बचपन गुजरात के डीसा शहर में बीता। उनके पिता सोहनलाल हुंडिया और माता बक्षुबेन ने उन्हें बचपन से जैन धर्म, अहिंसा, सत्य और जीवदया के संस्कार दिए।
डीसा में शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे अपने काका सुमेरमल हुंडिया के पास मुंबई पहुंचे, जहां उन्होंने हीरा व्यापार की बारीकियां सीखीं। आकर्षक व्यक्तित्व के कारण उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में भी कदम रखा, लेकिन पारिवारिक संस्कारों और धार्मिक मान्यताओं को प्राथमिकता देते हुए फिल्मी दुनिया छोड़ दी।
‘हीरा माणेक’ से मिली पत्रकारिता को नई पहचान
हार्दिक हुंडिया ने गुजराती समाचार पत्र हीरा माणेक के माध्यम से पत्रकारिता की शुरुआत की। उन्होंने भारतीय हीरा उद्योग से जुड़ी खबरों, व्यापारियों की समस्याओं और रत्न कलाकारों के हितों को प्रमुखता दी।
उनकी पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य को सम्मान देना और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना रहा है। उन्होंने हीरा उद्योग से जुड़े कई विवादास्पद मामलों पर भी अपनी लेखनी चलाई।
हिंदी पत्रकारिता में स्टार रिपोर्ट मैगजीन के माध्यम से उन्होंने सकारात्मक समाचारों और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को विशेष स्थान दिया।
जैन समाज और जीवदया के लिए विशेष योगदान
हार्दिक हुंडिया ने ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन की स्थापना कर जैन पत्रकारों और समाज को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास किया। भगवान महावीर के अहिंसा सिद्धांतों से प्रेरित होकर वे जीवदया, धार्मिक जागरूकता और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे हैं।
उन्होंने 12 अगस्त को इंटरनेशनल डायमंड डे के रूप में मनाने की पहल भी की। इसके माध्यम से हीरा उद्योग और उससे जुड़े लोगों के योगदान को सम्मानित करने का प्रयास किया जाता है।
मातृवंदना और सामाजिक सम्मान की अनूठी पहल
हार्दिक हुंडिया ने मातृवंदना कार्यक्रम के माध्यम से माताओं के सम्मान की विशेष परंपरा शुरू की। इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों की माताओं और प्रतिभाशाली बेटियों का सम्मान किया गया।
उनके सामाजिक कार्यों में जीवदया गीत, डायमंड गीत, कला-संस्कृति को प्रोत्साहन तथा समाजसेवियों को सम्मानित करने की पहल भी शामिल है।
उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर रिपोर्टिंग की और तस्वीरों की प्रदर्शनियों के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाने का कार्य किया।
परिवार का सहयोग बना सफलता की ताकत
हार्दिक हुंडिया अपनी सफलता में पत्नी सुनीता हुंडिया का महत्वपूर्ण योगदान मानते हैं। उनके अनुसार स्टार रिपोर्ट मैगजीन की परिकल्पना और प्रेरणा में सुनीता का विशेष स्थान रहा है। उनकी बेटी निराली ने मनोविज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर बाल परामर्श के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
सकारात्मक सोच ही जीवन का मूल मंत्र
पत्रकारिता और सामाजिक सेवा में योगदान के लिए हार्दिक हुंडिया को विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। इनमें वर्ल्ड पीस अवॉर्ड, गुजरात गौरव अवॉर्ड, पॉजिटिव जर्नलिज्म अवॉर्ड और बेस्ट जर्नलिस्ट अवॉर्ड जैसे सम्मान शामिल बताए गए हैं।
हार्दिक हुंडिया का मानना है कि जीवन में सफलता के साथ विनम्रता, ईमानदारी और दूसरों के प्रति करुणा बनाए रखना आवश्यक है। उनकी 30 वर्षों की पत्रकारिता यात्रा का संदेश है कि सकारात्मक सोच और निरंतर परिश्रम से समाज में सार्थक बदलाव लाया जा सकता है।
उनके जीवन का मूल मंत्र है—“प्यार बांटते चलो, प्यार बांटते चलो।”








