गायकवाड़ म्यूजिक क्लासेस आठनेर में गुरु पूर्णिमा का भव्य आयोजन, शिष्यों ने गुरु का किया सम्मान
संवाददाता : आशीष ठाकरे
आठनेर।
आठनेर नगर में वर्षों से संगीत की शिक्षा प्रदान कर रहे श्री गायकवाड़ जी के म्यूजिक क्लासेस में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उनके सैकड़ों शिष्य एकत्रित हुए और अपने गुरु का तिलक लगाकर, शॉल, श्रीफल एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुई। इसके बाद संगीत शिष्यों द्वारा गुरु वंदना प्रस्तुत की गई। पूरे कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की सुंदर झलक देखने को मिली।
शिष्यों ने गुरु को समर्पित किए गीत
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गायकवाड़ म्यूजिक क्लासेस के विद्यार्थियों ने विभिन्न मनमोहक गीतों की प्रस्तुतियां दीं। अपने मधुर स्वरों के माध्यम से शिष्यों ने गुरु के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया। गीतों के माध्यम से गुरु की महिमा का गुणगान किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
गुरुजी ने दिया आशीर्वाद
सम्मान समारोह के दौरान श्री गायकवाड़ जी ने अपने सभी शिष्यों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि साधना है और निरंतर अभ्यास एवं समर्पण से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने अपने शिष्यों को संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया।

बड़ी संख्या में शिष्य रहे उपस्थित
गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में गायकवाड़ जी के कई पुराने और नए शिष्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से प्रोफेसर डॉ. निर्मल विश्वास, प्रोफेसर प्रमोद गायकवाड, श्रीमती जगताप मैडम, कविता पांडे, श्रीमती किरण गायकवाड, सुनील ढोमने सर, देवेंद्र जावलकर सर, किरण पांडे, गीता मरकाम, साईं जगताप, ओम तायवड़े, ऋषभ झरबड़े, मुकुल मगरदे, संतोष मगरदे, राहुल घोरसे, अभिलाषा, सतीश दवंडे, रोशन मगरदे, शिवदास इवने, देशमुख सहित अनेक शिष्य मौजूद रहे।
इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से संगीत शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों में श्रीमती वंदना आथनकर, श्रीमती वीणा मानेकर, प्रोफेसर सुरेंद्र, श्रीमती सुनंदा वाईकर, श्रीमती कल्पना झरबड़े, गीता अतुलकर सहित कई विद्यार्थी भी कार्यक्रम से जुड़े रहे।
गुरु-शिष्य परंपरा का दिखा अनूठा संगम
कार्यक्रम में शिष्यों का अपने गुरु के प्रति समर्पण और सम्मान देखते ही बन रहा था। सभी ने गुरुजी के मार्गदर्शन को अपने जीवन की महत्वपूर्ण प्रेरणा बताया। उपस्थित लोगों ने कहा कि गुरु ही वह मार्गदर्शक होते हैं जो व्यक्ति की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा प्रदान करते हैं।
प्रमोद गायकवाड ने किया मंच संचालन
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर प्रमोद गायकवाड द्वारा किया गया। उन्होंने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुरु के स्थान को जीवन में सर्वोच्च बताया।
गायकवाड़ म्यूजिक क्लासेस में आयोजित यह गुरु पूर्णिमा समारोह संगीत, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।
