साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी की पांचवीं पुण्यतिथि पर झाबुआ में गुणानुवाद सभा आयोजित
साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्रीजी ने कहा— संयम साधना में सुमेरु शिखर और श्रमणी समुदाय में ‘मुकुट मणि’ के समान थीं साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी
झाबुआ। झाबुआ जैन श्री संघ की प्रेरणापुंज एवं परम उपकारी साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी की पांचवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया। पूज्य साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्रीजी महाराज साहेब आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में आयोजित कार्यक्रम में साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी के संयममय जीवन, गुरु भक्ति, चारित्र साधना और समाज के प्रति उनके वात्सल्य को स्मरण किया गया। इस अवसर पर सामूहिक सामायिक और आयम्बिल तप का आयोजन भी हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने सहभागिता की।
शासनपति भगवान महावीर स्वामी के जिनशासन और श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरीजी की गुरु परंपरा से जुड़ी साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी, श्रीमद् विजय हेमेन्द्रसूरीजी से दीक्षित तथा आचार्य श्रीमद् विजय जयानंदसूरीजी की आज्ञानुवर्तिनी परम विदुषी साध्वी श्री मणीप्रभाश्रीजी की प्रथम विनयवंत शिष्या थीं। उनके जीवन को सुविशुद्ध चारित्र, आत्मसाधना और गुरु समर्पण का उदाहरण बताते हुए वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का गुणानुवाद किया।
गुरु भक्ति की विशिष्ट झलक थी उनके जीवन में

श्री संघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि गुणानुवाद सभा में साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्रीजी महाराज साहेब ने साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी के जीवन और उनकी साधना पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी का अपनी गुरुणी साध्वी श्री मणीप्रभाश्रीजी के प्रति समर्पण और अनुराग अद्भुत था। वे ‘गुरुमैया… गुरुमैया…’ कहते हुए जिस भाव से अपनी गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करती थीं, उसमें गुरु भक्ति और स्वामिभक्ति की विशिष्ट झलक दिखाई देती थी।
उन्होंने कहा कि साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी संयम साधना में सुमेरु शिखर के समान और श्रमणी समुदाय में ‘मुकुट मणि’ जैसी थीं। उनकी उत्कृष्ट चारित्र क्रिया और गुणों के प्रति अनुराग प्रेरणादायी था।
सभी के प्रति रहती थी मैत्री और वात्सल्य की भावना
साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्रीजी ने कहा कि साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी के हृदय में बालक से लेकर वृद्ध तक और जैन से लेकर जैनेत्तर समाज तक सभी के प्रति मैत्री एवं वात्सल्य का भाव रहता था। उनकी यही सरलता और आत्मीयता उन्हें समाज के प्रत्येक वर्ग से जोड़ती थी।
उन्होंने अपने संयमित जीवन के माध्यम से धर्म और साधना का संदेश दिया। उनके जीवन का प्रभाव केवल प्रवचनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने उनकी प्रेरणा से धार्मिक नियमों को अपने जीवन में अपनाया।
झाबुआ में हुए दो यशस्वी चातुर्मास
श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी का गुणानुवाद करते हुए कहा कि उनके सान्निध्य में झाबुआ में वर्ष 2008 और वर्ष 2018 में दो यशस्वी चातुर्मास संपन्न हुए थे।
उन्होंने कहा कि साध्वी श्रीजी की चारित्र के प्रति दृढ़ता और अरिहंत परमात्मा के प्रति असीम श्रद्धा समाज के लिए सदैव प्रेरणादायी रही। उनके द्वारा व्यक्त किए जाने वाले भावपूर्ण उद्गार आज भी झाबुआ जैन समाज के लोगों के मन में श्रद्धा और भक्ति का संचार करते हैं।
उनके दोनों चातुर्मास के दौरान झाबुआ में अनेक धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियां आयोजित हुईं, जिनकी स्मृतियां आज भी समाजजनों के मन में जीवंत हैं।
अनेक श्रावक-श्राविकाओं के जीवन में आया बदलाव

गुणानुवाद सभा में श्रीमती प्रभा मुथा ने साध्वी श्रीजी की मंगल भावना का स्मरण करते हुए कहा कि वे प्रत्येक जीव के कल्याण और मोक्ष की कामना करती थीं।
उन्होंने कहा कि साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी के प्रेरणादायी उद्बोधनों को सुनकर झाबुआ के अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने अपने जीवन में धार्मिक नियम और संयम अपनाए। उनके द्वारा प्रेरित किए गए अनेक लोग आज भी श्रद्धा के साथ उन नियमों का पालन कर रहे हैं।
‘धर्मरूपी बीज आज वटवृक्ष बन चुका’
यशवंत भंडारी ने साध्वी श्रीजी का गुणानुवाद करते हुए कहा कि उन्होंने झाबुआ श्री संघ पर अनेक उपकार किए। उनका संपूर्ण जीवन संयम और आध्यात्मिक साधना की भावना से ओतप्रोत था।
उन्होंने कहा कि साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी ने झाबुआ श्री संघ में धर्म और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के जिन बीजों का रोपण किया था, वे आज वटवृक्ष का स्वरूप लेकर जिनशासन की प्रभावना को आगे बढ़ा रहे हैं। नई पीढ़ी को भी उनके जीवन और विचारों से धर्म, संयम और गुरु भक्ति की प्रेरणा मिल रही है।
सामूहिक सामायिक और आयम्बिल तप में उमड़े श्रद्धालु
साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी की पांचवीं पुण्य स्मृति के अवसर पर बावन जिनालय में सामूहिक सामायिक और आयम्बिल तप का विशेष आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं एवं समाजजनों ने भाग लेकर साध्वी श्रीजी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
गुणानुवाद सभा के दौरान वक्ताओं ने उनके संयम, तप, त्याग, गुरु भक्ति और धर्म प्रभावना के कार्यों को याद किया। पूरा आयोजन श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। समाजजनों ने साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्रीजी के जीवन आदर्शों को स्मरण करते हुए उनके बताए धर्म और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली।
