MP के खजाने पर असर: GST कलेक्शन में ऐतिहासिक गिरावट, 3 हजार करोड़ का नुकसान
केंद्र सरकार द्वारा GST दरों में की गई कटौती का सीधा असर अब मध्य प्रदेश सरकार के राजस्व पर साफ दिखाई देने लगा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार के खजाने में करीब 3 हजार करोड़ रुपये की कमी आने का अनुमान है। वाणिज्यिक कर विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद यह राजस्व घाटा कम होता नजर नहीं आ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, यह पहली बार है जब राज्य में GST से मिलने वाले राजस्व में दिसंबर महीने तक 2.5 से 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च 2026 तक भी इस कमी की भरपाई हो पाना मुश्किल नजर आ रहा है।
GST कलेक्शन में ऐतिहासिक गिरावट
वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश सरकार के स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स (SGST) कलेक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। दिसंबर 2025 तक SGST से राज्य को करीब ढाई हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार को SGST से कुल 26 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक यह आंकड़ा घटकर लगभग 25.5 हजार करोड़ रुपये ही पहुंच सका है। यह तब है, जब सरकार ने इस अवधि में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य तय किया था।
पिछले एक दशक में पहली बार लक्ष्य से पिछड़ा राजस्व
कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में यह पहला मौका है जब GST कलेक्शन न सिर्फ तय लक्ष्य से पीछे रह गया, बल्कि पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़े को भी छू नहीं पाया। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि GST दरों में कमी का असर राज्यों पर धीरे-धीरे लेकिन गहराई से पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से दरों में कटौती की गई, लेकिन इसका भार अब सीधे राज्य सरकारों के राजस्व पर पड़ रहा है।
वैट और पंजीयन से भी उम्मीद से कम बढ़ोतरी
मध्य प्रदेश सरकार को GST के अलावा वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) और पंजीयन शुल्क से भी राजस्व मिलता है, लेकिन इन मदों में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी है। राज्य सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसे उत्पादों पर VAT वसूलती है। इससे सरकार को प्रति वर्ष करीब 14 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। पिछले वित्तीय वर्ष में VAT से राज्य को लगभग 13,950 करोड़ रुपये मिले थे। हालांकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में VAT कलेक्शन में केवल करीब 3.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अनुमान से काफी कम है।
आबकारी और पंजीयन में दिखी राहत
जहां एक ओर GST और VAT कलेक्शन में गिरावट ने सरकार की चिंता बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर आबकारी और पंजीयन विभाग से कुछ राहत भरी खबर सामने आई है।
आंकड़ों के अनुसार:
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आबकारी राजस्व में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है
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पंजीयन शुल्क से आय में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है
हालांकि, इन दोनों मदों से हुई बढ़ोतरी भी GST से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।
केंद्र की नीति का राज्यों पर असर
वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि GST दरों में कटौती का निर्णय केंद्र सरकार का है, लेकिन इसका सीधा असर राज्यों की आर्थिक सेहत पर पड़ता है। राज्यों की अपनी आय के सीमित स्रोत हैं और GST उनमें सबसे अहम माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि GST दरों में इसी तरह कटौती जारी रही और राज्यों को किसी प्रकार का विशेष मुआवजा पैकेज नहीं मिला, तो आने वाले समय में राज्य सरकारों को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर
राजस्व में आई इस कमी का असर सरकार की विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और ग्रामीण विकास जैसी योजनाओं के लिए सरकार को अतिरिक्त संसाधन जुटाने की जरूरत पड़ेगी। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार वैकल्पिक राजस्व स्रोतों पर विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल GST कलेक्शन में आई गिरावट ने वित्तीय संतुलन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
