Bhopal मास्टर प्लान ड्राफ्ट के खिलाफ किसान सड़क पर, 66 गांवों की खेती पर संकट, मुगालिया छाप से निकलेगी पदयात्रा
ड्राफ्ट जारी होते ही शुरू हुआ विरोध
मध्य प्रदेश में Bhopal मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी होने के बाद किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि इस ड्राफ्ट से 66 गांवों की खेती पर संकट मंडराने लगा है। इसी पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किसान भोपाल पहुंच रहे हैं। गुरुवार, 22 अक्टूबर को किसान मुगालिया छाप से पदयात्रा निकालेंगे और नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) के संयुक्त संचालक कार्यालय पहुंचेंगे। वहां वे अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराएंगे।
क्या हैं किसानों के आरोप
मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी होने के बाद किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित प्लान में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इससे हजारों किसानों की खेती और आजीविका पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि उन्होंने विरोध का रास्ता अपनाया है और पैदल मार्च निकाल रहे हैं।
बड़ा तालाब के आसपास भू-उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव
नए ड्राफ्ट के अनुसार बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने का प्रस्ताव है। किसानों को इसी प्रस्ताव पर आपत्ति है। वे टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचकर इस संबंध में अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराएंगे।
किसानों की मांग
किसानों की मांग है कि कृषि भूमि का लैंडयूज पहले की तरह कृषि ही रखा जाए। उनका यह भी कहना है कि किसी भी बदलाव से पहले सरकार को संबंधित गांवों में ग्रामसभाएं कराकर किसानों की सहमति लेनी चाहिए। किसानों की अपील है कि अपने अनुसार लिया गया कोई भी निर्णय उन पर थोपा न जाए।
क्या है Bhopal मास्टर प्लान-2047
भोपाल मास्टर प्लान-2047 भोपाल के वर्ष 2047 तक के विकास की प्रस्तावित योजना है। ड्राफ्ट में 1,016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 254 गांवों को शामिल किया गया है। इसमें 45 लाख की अनुमानित आबादी को आधार बनाकर आवास, परिवहन, ग्रीन एरिया, रोजगार, मिक्स्ड लैंड यूज और इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना प्रस्तावित की गई है। हालांकि यह अभी अंतिम मास्टर प्लान नहीं है।
1995 के बाद नहीं आया नया मास्टर प्लान
भोपाल के लिए नया मास्टर प्लान इसलिए भी अहम है, क्योंकि 1995 के बाद कोई नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ। पुरानी योजना यानी भोपाल विकास योजना-2005 की अवधि 2005 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद मास्टर प्लान-2021 और मास्टर प्लान-2031 के लिए प्रक्रिया चली, लेकिन दोनों अंतिम रूप लेकर लागू नहीं हो सके। विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार भोपाल विकास योजना-2005 ही प्रभावशील रही और बाद में 2047 के ड्राफ्ट पर काम किया गया।
2005 की योजना से कितना अलग है 2047 का प्लान
2005 की योजना में तत्कालीन विकास और भूमि उपयोग को व्यवस्थित करने पर जोर था। वहीं 2047 के ड्राफ्ट में 45 लाख की अनुमानित आबादी, 1,016.90 वर्ग किमी के प्लानिंग क्षेत्र और 254 गांवों को ध्यान में रखकर शहर के भविष्य के विस्तार की योजना बनाई गई है।
नए ड्राफ्ट में आवासीय विकास के साथ 27.01 प्रतिशत ग्रीन एरिया, 51 किमी का ग्रोथ कॉरिडोर, मेट्रो और मोबिलिटी, मिक्स्ड लैंड यूज, ग्रीन टीडीआर, डिजिटल ट्विन सिटी, एकाई सिटी, रीडेवलपमेंट और किफायती-किराये के आवास जैसे प्रावधान शामिल हैं। यानी यह प्लान सिर्फ जमीन के इस्तेमाल की योजना नहीं, बल्कि पर्यावरण, परिवहन, रोजगार, तकनीक और आर्थिक विकास को साथ लेकर चलने का प्रस्ताव है।
मुख्य आंकड़े
ड्राफ्ट के अनुसार कुल विकास योग्य भूमि 61,017.02 हेक्टेयर है। इसमें से 26,755.50 हेक्टेयर यानी 43.85 प्रतिशत भूमि आवासीय उपयोग के लिए प्रस्तावित है। ग्रीन एरिया के लिए 16,489.94 हेक्टेयर (27.01 प्रतिशत), परिवहन के लिए 5,793.82 हेक्टेयर (9.53 प्रतिशत) और सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक उपयोग के लिए 4,897.97 हेक्टेयर (8.01 प्रतिशत) भूमि प्रस्तावित है। ग्रोथ कॉरिडोर करीब 51 किलोमीटर का होगा।
