पुण्य करोगे तो पुण्य मिलेगा, पाप करोगे तो पाप ही मिलेगा: साध्वी डॉ. अमृत रसा श्री जी
जीवन में वाणी संयम और सत्कर्मों का महत्व बताया, धर्मसभा में श्रद्धालुओं को दिया प्रेरणादायी संदेश
महिदपुर रोड। जीवन में किए गए कर्मों का फल व्यक्ति को अवश्य मिलता है। यदि मनुष्य अच्छे कर्म करता है तो उसे पुण्य की प्राप्ति होती है और गलत कार्यों का परिणाम भी उसे भुगतना पड़ता है। हमें अपने जीवन में सदैव सत्कर्मों को अपनाना चाहिए और अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। यह प्रेरणादायी संदेश बुधवार को राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य साध्वी डॉ. अमृत रसा श्री जी महाराज साहब ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिया।
शब्दों को सोच-समझकर बोलने की दी प्रेरणा
साध्वी श्री ने कहा कि जीवन में हमेशा शब्दों को तोल-मोल कर बोलना चाहिए। बिना आवश्यकता के अधिक बोलने से बचना चाहिए। वाणी में संयम रखना व्यक्ति के व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बनाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कब बोलना है, कहां बोलना है और कितना बोलना है। सही समय और सही शब्दों का चयन जीवन में कई समस्याओं को दूर कर सकता है।
गलती होने पर विनम्रता अपनाने का संदेश
साध्वी डॉ. अमृत रसा श्री जी ने कहा कि यदि जीवन में कोई गलती हो जाए तो व्यक्ति को अहंकार छोड़कर झुक जाना चाहिए। समय रहते अपनी भूल स्वीकार करना ही समझदारी है। यदि मनुष्य स्वयं नहीं झुकता तो कर्मों का प्रभाव उसे परिस्थितियों के सामने झुकने के लिए मजबूर कर देता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने व्यवहार में विनम्रता और सरलता अपनाने की अपील की।
कर्मों के अनुसार मिलता है जीवन में फल
धर्मसभा में साध्वी श्री ने कर्म सिद्धांत को समझाते हुए कहा कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल प्राप्त होता है। पुण्य कार्य करने वाले को पुण्य मिलता है और पाप कर्म करने वाले को उसके परिणामों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि अच्छे विचारों और अच्छे कर्मों के माध्यम से आत्मकल्याण करना भी है।

प्रेम में है शत्रु को मित्र बनाने की शक्ति
साध्वी श्री ने कहा कि प्रेम में इतनी शक्ति होती है कि वह शत्रु को भी मित्र बना सकता है। मनुष्य को द्वेष और क्रोध का त्याग कर प्रेम, करुणा और सद्भावना के मार्ग पर चलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दूसरों को दुख पहुंचाकर कोई भी व्यक्ति सच्ची शांति प्राप्त नहीं कर सकता। सभी जीवों के प्रति दया और अहिंसा का भाव रखना ही धर्म का मूल संदेश है।
संसार में रहते हुए धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा
साध्वी डॉ. अमृत रसा श्री जी ने कहा कि संसार में दुख हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि संसार से भाग जाना चाहिए। हमें संसार में रहते हुए अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाना चाहिए और किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाए बिना जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सच्चा धर्म वही है, जिसमें मनुष्य अपने विचारों, वाणी और कर्मों को पवित्र बनाता है।
साधार्मिक भक्ति प्रभावना का हुआ आयोजन
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि धर्मसभा के अवसर पर साधार्मिक भक्ति प्रभावना का आयोजन किया गया। संपूर्ण दिवस के आयोजन का लाभ मनोहर लाल, हेमंत कुमार, सिद्धार्थ कुमार कोचर मावा वाला परिवार द्वारा लिया गया।
वहीं सिद्धि तपस्वियों के धारणे एवं प्रभावना का लाभ विजय कुमार, पीयूष कुमार बरडिया परिवार ने प्राप्त किया।

विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने लिया लाभ
प्रथम सुबह के पारणे एवं प्रभावना का लाभ सुभाष चंद्र, संदीप कुमार, गौरव कुमार भंडारी परिवार द्वारा लिया गया। शाम के बियासने एवं प्रभावना का लाभ रमेश चंद, दिनेश जैन बौस, राजेश कुमार, राहुल कुमार बोथरा विधायक परिवार द्वारा लिया गया।
तपस्वियों के पारणे पर प्रभावना का लाभ रमेश चंद, वर्धमान कुमार, रिचिन राज, अव्यान गादिया परिवार महिदपुर सिटी द्वारा लिया गया।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
पारणा एवं प्रवचन के मंगलकारी अवसर पर सकल जैन श्री संघ, क्षेत्रीय विधायक एवं जैन समाज गौरव दिनेश जैन बौस, महिदपुर रोड सरपंच रितु सत्यनारायण पाटीदार, वर्धमान गादिया परिवार महिदपुर, जैन श्री संघ अध्यक्ष अजय चौरडिया, चातुर्मास समिति अध्यक्ष परेश चत्तर सहित समाज एवं नगर के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने साध्वी श्री के मंगल प्रवचन सुनकर धर्म लाभ प्राप्त किया और जीवन में सदाचार, संयम एवं सत्कर्म अपनाने का संकल्प लिया।
