घुवारा पंचकल्याणक महोत्सव में गर्भ कल्याणक पूर्वार्ध के दौरान देशभर से श्रद्धालु पहुंचे, भव्य शोभायात्रा, यज्ञ, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।
घुवारा पंचकल्याणक महोत्सव में उमड़ा आस्था का सागर
घुवारा पंचकल्याणक महोत्सव का महत्व
घुवारा पंचकल्याणक महोत्सव जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसमें तीर्थंकरों के जीवन के पांच प्रमुख कल्याणकों का उत्सव मनाया जाता है। गर्भ कल्याणक पूर्वार्ध इस महोत्सव का प्रारंभिक और अत्यंत पवित्र चरण होता है, जिसमें दिव्यता और आध्यात्मिकता का विशेष संचार होता है।
भव्य शोभायात्रा और मंगल कलश यात्रा
प्रातः 6:30 बजे से नांदी और व्रतदान विधि का शुभारंभ हुआ। इसके बाद 7:30 बजे तिलकार्चन और घटयात्रा शोभायात्रा निकाली गई।मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर यह शोभायात्रा वर्णी महाविद्यालय स्थित अयोध्या नगरी तक पहुंची। महिलाओं ने मंगल कलश धारण कर पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया।इस दौरान श्री जी और मुनिचतुष्टय की उपस्थिति ने वातावरण को और अधिक पवित्र बना दिया। ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन भी बड़े ही विधिवत संपन्न हुआ।
यज्ञ, मंडप और धार्मिक विधियां
घुवारा पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत मंडप यज्ञ वेदिका की शुद्धि, जिन वेदिका स्थापना और जप का शुभारंभ किया गया।यहां सहस्त्रशीर्ष स्वरूप में सात तीर्थंकरों को विराजमान किया गया। साथ ही निम्न प्रमुख धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं:
- अंगन्यास एवं इंद्र प्रतिष्ठा
- मंडप प्रतिष्ठा
- माता-पिता संस्कार
- सौधर्म, ईशान, सनत कुमार, महेंद्र इंद्र पूजन
- कुबेर यज्ञ एवं महायज्ञनायक वंश स्थापना
- गोत्र परिवर्तन क्रिया
- याग मंडल विधान
इन सभी अनुष्ठानों ने घुवारा पंचकल्याणक महोत्सव को अत्यंत दिव्य स्वरूप प्रदान किया।
देशभर से पहुंचे विशिष्ट अतिथि
इस आयोजन में देश-विदेश से अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- शरद जैन (चैनल महालक्ष्मी)
- डॉ. अखिल वंशल (जयपुर)
- डॉ. मीना जैन (उदयपुर)
- अनिल जैन (डीआईजी, जयपुर)
- शैलेन्द्र जी (अलीगढ़)
- राजमल जी (वैज्ञानिक, इसरो, अहमदाबाद)
- अरविंद जैन (बर्मिंघम, इंग्लैंड)
- पदमचंद्र जी (आसाम)
इन सभी की उपस्थिति ने घुवारा पंचकल्याणक महोत्सव की गरिमा को और बढ़ाया।
सांयकालीन महाआरती का भव्य आयोजन
सायंकाल में भव्य हाथी और बग्गी पर आरूढ़ होकर महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने हाथों में दीप लेकर महोत्सव वेदिका पर आरती की, जिससे पूरा वातावरण प्रकाश और भक्ति से भर गया।
यह दृश्य अत्यंत मनमोहक और दिव्य था, जिसने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
गर्भ कल्याणक की विशेष झलकियां
गर्भ कल्याणक पूर्वार्ध में कई महत्वपूर्ण धार्मिक घटनाओं का मंचन किया गया:
- माता के 16 स्वप्नों का वर्णन
- अष्ट कुमारियों द्वारा सेवा
- कुबेर इंद्र द्वारा रत्नवृष्टि
- अयोध्या नगरी की दिव्य रचना
प्रतिष्ठाचार्य डॉ. विमल कुमार जी (जयपुर) द्वारा शास्त्र प्रवचन भी हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को धर्म के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया।
रात्रि तक यह आयोजन हर्ष और उल्लास के साथ चलता रहा।
निष्कर्ष
घुवारा पंचकल्याणक महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। गर्भ कल्याणक पूर्वार्ध में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि धर्म के प्रति लोगों की आस्था आज भी अटूट है।यह महोत्सव समाज को एकता, शांति और आध्यात्मिकता का संदेश देता है।
नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।
