फिल्म शतक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित फिल्म है, जिसमें डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों को प्रस्तुत किया गया है।
फिल्म शतक: विचार, प्रेरणा और संगठन की 100 वर्ष की यात्रा
फिल्म शतक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर बनाई गई एक विशेष फिल्म है, जो केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की विचार यात्रा का जीवंत दस्तावेज़ है।
मुंबई और नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों के बाद इस फिल्म को लेकर देशभर में उत्सुकता बढ़ती जा रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि फिल्म शतक समाज जीवन, अनुशासन और राष्ट्रभाव की उस परंपरा को सामने लाती है, जिसकी शुरुआत डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।
फिल्म शतक क्या है?
फिल्म शतक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा को समर्पित एक वैचारिक और ऐतिहासिक फिल्म है।
यह फिल्म संगठन की स्थापना, संघर्ष, विस्तार और समाज जीवन में उसकी भूमिका को दर्शाती है।
इसका उद्देश्य केवल इतिहास दिखाना नहीं, बल्कि उस विचार को समझाना है जिसने संगठन को एक शताब्दी तक जीवंत बनाए रखा।
डॉ. हेडगेवार का जीवन दर्शन
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन त्याग, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का उदाहरण रहा।
उन्होंने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना इस उद्देश्य से की कि समाज संगठित हो और राष्ट्र सर्वोपरि की भावना जागृत हो।
फिल्म शतक में उनके जीवन के अनेक प्रेरक प्रसंगों को संवेदनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है — विशेष रूप से बाल्यकाल की घटनाएँ, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।
मोहन भागवत का संबोधन
नई दिल्ली स्थित केशव कुंज में आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा:
यह फिल्म केवल एक कथा नहीं, बल्कि विचारों की यात्रा का सजीव चित्रण है।
उन्होंने बताया कि फिल्म शतक आने वाली पीढ़ियों को यह समझाने का माध्यम बनेगी कि संगठन कैसे समाज परिवर्तन का आधार बनता है।
फिल्म की प्रमुख विशेषताएँ
- संघ के 100 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा का चित्रण
- डॉ. हेडगेवार के जीवन के प्रेरक प्रसंग
- राष्ट्रभाव और संगठन की विचारधारा का सिनेमाई प्रस्तुतीकरण
- युवा पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास
- सांस्कृतिक और सामाजिक जागरण का संदेश
शताब्दी वर्ष का ऐतिहासिक महत्व
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष केवल एक संगठन का उत्सव नहीं, बल्कि एक विचार की निरंतरता का प्रतीक माना जा रहा है।
फिल्म शतक इसी ऐतिहासिक पड़ाव को सांस्कृतिक माध्यम से समाज तक पहुँचाने का प्रयास है।
युवाओं के लिए प्रेरणा क्यों है फिल्म शतक?
आज की पीढ़ी इतिहास को किताबों से कम और दृश्य माध्यम से अधिक समझती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए फिल्म शतक को इस प्रकार बनाया गया है कि:
- युवाओं को राष्ट्र निर्माण की भूमिका समझ आए
- व्यक्तित्व निर्माण का महत्व स्पष्ट हो
- संगठन और समाज के संबंध का बोध हो
- प्रेरणा, अनुशासन और सेवा की भावना जागृत हो
रिलीज की जानकारी
यह फिल्म 20 फरवरी को देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।
निर्माताओं का उद्देश्य इसे व्यापक स्तर पर दर्शकों तक पहुँचाना है ताकि अधिक से अधिक लोग इस ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ सकें।
निष्कर्ष
फिल्म शतक केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि 100 वर्षों की वैचारिक साधना, संगठन शक्ति और राष्ट्र समर्पण की कहानी है।
यह फिल्म इतिहास को वर्तमान से जोड़ते हुए भविष्य के लिए प्रेरणा का माध्यम बनने का प्रयास करती है।



