डॉ. विजय कुमार कोचर को स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मिला ऐतिहासिक सम्मान, 50 वर्षों की निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा बनी प्रेरणा
इंदौर। डॉ. विजय कुमार कोचर का नाम चिकित्सा जगत में सेवा, समर्पण और मानवता का पर्याय माना जाता है। गरीबों के मसीहा के रूप में पहचान बनाने वाले 82 वर्षीय वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विजय कुमार कोचर को उनकी लगभग पांच दशकों से अधिक समय तक निरंतर की गई नि:स्वार्थ चिकित्सा सेवा के लिए स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा “सर्टिफिकेट ऑफ रिकॉग्निशन” एवं “मानवता सेवा सम्मान” से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान इंदौर के बास्केटबॉल स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया। कार्यक्रम पूज्य गच्छाधिपति श्रीमद् विजय विज्ञानप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. एवं आचार्य श्री विजय राजचंद्र सूरिश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में समाजजन, चिकित्सक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
डॉ. विजय कुमार कोचर ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने पिछले 50 वर्षों से गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों का निःशुल्क उपचार किया है। उनका जीवन केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सेवा को अपना धर्म बनाया।
उन्होंने कहा कि उनका एक ही उद्देश्य रहा—
“रुपया कमाना उद्देश्य नहीं, प्राण बचाना उद्देश्य है।”
इसी सोच के साथ उन्होंने हजारों जरूरतमंद मरीजों का उपचार किया और कभी आर्थिक स्थिति को इलाज में बाधा नहीं बनने दिया।
घोड़े पर मेडिकल किट लेकर गांव-गांव पहुंचे
सम्मान समारोह में डॉ. विजय कुमार कोचर के संघर्षपूर्ण सेवा जीवन का उल्लेख किया गया। बताया गया कि उनकी चिकित्सा यात्रा सीहोर जिले के कन्नोद मिर्जी गांव से शुरू हुई।
उस समय परिवहन सुविधाएं सीमित थीं। ऐसे में वे मेडिकल किट लेकर घोड़े पर सवार होकर दूर-दराज के गांवों तक पहुंचते थे। बाद में उन्होंने मोटरसाइकिल से भी गांव-गांव जाकर मरीजों का इलाज जारी रखा।
उनकी इस सेवा भावना ने हजारों परिवारों को नया जीवन दिया और उन्हें गरीबों के मसीहा के रूप में पहचान दिलाई।
स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने किया सम्मानित
स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के संस्थापकों ने कहा कि डॉ. विजय कुमार कोचर का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने चिकित्सा सेवा को व्यवसाय नहीं बल्कि मानव सेवा का माध्यम बनाया।
इसी अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें मानवता सेवा सम्मान से अलंकृत किया गया।
सम्मान समारोह में रहे ये प्रमुख अतिथि
समारोह में अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इनमें प्रमुख रूप से—
- पूज्य गच्छाधिपति श्रीमद् विजय विज्ञानप्रभ सूरिश्वरजी म.सा.
- आचार्य श्री विजय राजचंद्र सूरिश्वरजी म.सा.
- डॉ. प्रकाश बांगानी
- यशवंत जैन
- स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के संस्थापक वीरेंद्र कुमार जैन
- कांतिलाल बम
- कीर्ति दोशी
- पुण्यपाल सुराणा
- विवेक जैन
सभी अतिथियों ने डॉ. विजय कुमार कोचर का शॉल, सम्मान-पत्र एवं अभिनंदन कर उनका सम्मान किया। पूरे सभागार में तालियों की गूंज के साथ उपस्थित लोगों ने उनके सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की।
समाज के लिए प्रेरणा
आज जब चिकित्सा क्षेत्र में व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, ऐसे समय में डॉ. विजय कुमार कोचर का जीवन यह संदेश देता है कि सेवा और संवेदनशीलता ही डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान होती है।
उनका समर्पण युवा चिकित्सकों के लिए भी प्रेरणा है कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोच्च माध्यम है।
निष्कर्ष
डॉ. विजय कुमार कोचर का स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं बल्कि उन सभी चिकित्सकों का सम्मान है जो निःस्वार्थ भाव से समाज की सेवा कर रहे हैं।
उनके 50 वर्षों के सेवा कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगे और मानवता की मिसाल के रूप में सदैव याद किए जाएंगे।

