Digvijaya Singh: राम मंदिर चंदा विवाद पर दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, अयोध्या में करेंगे कानूनी कार्रवाई,
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Digvijaya Singh ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चंदा और चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर बड़ा बयान देकर राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने घोषणा की है कि वे 5 और 6 जुलाई को अयोध्या जाएंगे और कथित चंदा गड़बड़ी के मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का भी ऐलान किया है।
कोर्ट में दायर करेंगे मुकदमा
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था। उनका कहना है कि एक दानदाता होने के नाते उन्हें यह जानने का अधिकार है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे और चढ़ावे का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने कहा कि वे अयोध्या जाकर इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया अपनाएंगे और आवश्यक होने पर न्यायालय में मुकदमा भी दायर करेंगे।
श्रद्धालुओं के साथ पहुंचेंगे अयोध्या
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अकेले नहीं, बल्कि उन श्रद्धालुओं के साथ अयोध्या जाएंगे जिन्होंने मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। उनका कहना है कि दान देने वाले लोगों को मंदिर ट्रस्ट से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए सभी वित्तीय मामलों का स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा का ऐलान
दिग्विजय सिंह ने 2 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चंदे और चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता की मांग उठाना होगा। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान जहां भी चंदा या चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले सामने आएंगे, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर की मांग की जाएगी।
कांग्रेस का झंडा नहीं रहेगा
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं निकाली जाएगी। यात्रा में कांग्रेस का झंडा नहीं रहेगा और इसे आम श्रद्धालुओं तथा नागरिकों की भागीदारी वाली जनयात्रा के रूप में आयोजित किया जाएगा। उनका कहना है कि यह अभियान किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से होगा।
बंगले के बाहर लगाया पोस्टर
दिग्विजय सिंह ने अपने भोपाल स्थित सरकारी आवास के बाहर “चंदा और चढ़ावा चोरों का प्रवेश निषेध” लिखा एक पोस्टर भी लगाया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पोस्टर सामने आने के बाद इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं और इस पर पक्ष-विपक्ष के नेताओं सहित आम लोगों की भी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पोस्टर उनके अभियान का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं में मिलने वाले चंदे और चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाना है।
उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि यदि वे इस मुहिम का समर्थन करते हैं और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता के पक्षधर हैं, तो अपने घरों, कार्यालयों और प्रतिष्ठानों पर भी इसी तरह के पोस्टर लगाकर इस अभियान से जुड़ें। दिग्विजय सिंह का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है और उससे जुड़े किसी भी आर्थिक मामले में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। अयोध्या में कथित चंदा और चढ़ावा अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर उनके कानूनी कदम और उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा की घोषणा ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। विशेष रूप से यात्रा में कांग्रेस का झंडा शामिल नहीं करने के फैसले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और विश्लेषकों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था और पारदर्शिता से जुड़ा जन अभियान मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे आगामी राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देख रहे हैं।
दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का प्रचार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे और चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाना है। आने वाले दिनों में उनके अयोध्या दौरे, प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई और 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली पदयात्रा पर सभी की नजर रहेगी। माना जा रहा है कि इस अभियान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है तथा यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
पारदर्शिता की मांग पर दिया जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं में आने वाला चंदा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी धार्मिक ट्रस्ट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
हालांकि, जिन आरोपों का दिग्विजय सिंह ने उल्लेख किया है, वे राजनीतिक विवाद का विषय हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और किसी भी जांच या न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष के बाद ही तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होगी।
