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दिगम्बर जैन समाज इंदौर एकता: सामाजिक संसद की ऐतिहासिक पहल से वर्षों बाद लौटी नई उम्मीद और भाईचारा

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Published On: 18 January 2026

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दिगम्बर जैन समाज इंदौर एकता की मिसाल तब बनी जब सामाजिक संसद के मंच से वर्षों की कटुता मिटाकर समन्वय, प्रेम और सद्भावना की नई शुरुआत हुई।

राजेश जैन दद्दू इंदौर

दिगम्बर जैन समाज इंदौर एकता

दिगम्बर जैन समाज इंदौर एकता की तस्वीर उस समय पूरे शहर ने देखी, जब वर्षों बाद समाज के विभिन्न वर्ग, संस्थाएं और प्रतिनिधि एक मंच पर एक विचार और एक उद्देश्य के साथ खड़े नजर आए। यह दृश्य केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज के इतिहास में एक नई दिशा, नई सोच और नई संस्कृति की शुरुआत थी।

इंदौर में आयोजित श्रीफल गौरव दिवस के भव्य आयोजन ने यह साबित कर दिया कि अगर इच्छा शक्ति मजबूत हो, तो वर्षों की दूरी, कटुता और मतभेद भी कुछ पलों में मिट सकते हैं।

आयोजन की पृष्ठभूमि

दिगम्बर जैन समाज इंदौर एकता का यह अद्भुत दृश्य नवग्रह जिनालय, ग्रेटर बाबा परिसर में देखने को मिला। अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्यसागरजी महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय श्रीफल गौरव दिवस का आयोजन चल रहा था। इसी अवसर पर जगद्गुरु स्वस्तिश्री चारूकीर्ति भट्टारक महास्वामी जी का सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

इस आयोजन में इंदौर की विभिन्न कॉलोनियों के जैन मंदिरों के पदाधिकारी, तीर्थ क्षेत्रों के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय और स्थानीय संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

संतों का सानिध्य और उनका संदेश

मुनि श्री 108 पूज्यसागरजी महाराज और स्वामी चारूकीर्ति जी का सानिध्य इस आयोजन की आत्मा था। दोनों संतों ने समाज को एकजुट रहने, मतभेदों से ऊपर उठने और सेवा, संयम व सहयोग के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

उनके शब्दों ने मंच पर बैठे हर व्यक्ति के मन को छू लिया। ऐसा लग रहा था मानो वर्षों की दूरियां पिघलकर एकता में बदल रही हों।

सामाजिक संसद की भूमिका

दिगम्बर जैन समाज (सामाजिक संसद) के नवनियुक्त अध्यक्ष विनय बाकलीवाल, पूर्व अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी और नरेन्द्र वैद ने मिलकर इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाया।

इन तीनों ने जगद्गुरु स्वामीजी का सम्मान और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर यह संदेश दिया कि अब समाज को तोड़ने वाली नहीं, जोड़ने वाली राजनीति और सोच चलेगी।

सम्मान समारोह का दृश्य

सम्मान समारोह का दृश्य बेहद भावुक और प्रेरणादायक था। मंच पर संतों के साथ समाज के वरिष्ठ जन, युवा प्रतिनिधि और विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद थे।

स्वामी चारूकीर्ति जी का सम्मान करते समय मंच पर खड़े हर व्यक्ति के चेहरे पर गर्व, आनंद और संतोष झलक रहा था।

वर्षों की कटुता कैसे टूटी

दिगम्बर जैन समाज इंदौर एकता इसलिए विशेष है क्योंकि यह केवल औपचारिक नहीं, बल्कि दिल से निकली एकता थी। वर्षों से समाज में कुछ विषयों को लेकर मतभेद, दूरी और कटुता बनी हुई थी।

लेकिन इस मंच से एक साथ बैठकर, एक-दूसरे का सम्मान करके और संतों के सानिध्य में सबने यह तय किया कि अब पुरानी बातों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना है।

समाज में नई दिशा

इस समन्वय से समाज में नई दशा और दिशा का प्रादुर्भाव हुआ। ऐसा लगा मानो समाज ने खुद को फिर से पहचान लिया हो।

इंदौर नगर के 138 जिनालयों के पदाधिकारी और संसद प्रतिनिधियों ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे समाज के भविष्य के लिए मील का पत्थर बताया।

प्रमुख समाजसेवियों की भूमिका

इस आयोजन में कई प्रमुख समाजसेवियों की सक्रिय भूमिका रही, जिनमें शामिल हैं:

  • अमित कासलीवाल – अध्यक्ष, महावीर ट्रस्ट

  • आदित्य कासलीवाल – अध्यक्ष, अष्टापद बद्रीनाथ

  • डॉ. जैनेन्द्र जैन

  • हंसमुख गांधी

  • टी.के. वेद

  • डी.के. जैन

  • डीएसपी राजेश लारेल

  • बाहुबली पांड्या

  • नकुल पाटोदी

  • नवीन गोधा

  • प्रदीप बड़जात्या

  • जेनेश झांझरी

  • श्रीमती रेखा जैन

  • श्रीमती मुक्ता जैन

  • श्रीमती उर्मिला गांधी

इन सभी ने अपने-अपने स्तर पर समाज को जोड़ने का प्रयास किया।

इंदौर के जिनालयों की सहभागिता

दिगम्बर जैन समाज इंदौर एकता की सबसे बड़ी ताकत यह रही कि इंदौर के लगभग सभी प्रमुख जिनालयों के पदाधिकारी इसमें शामिल हुए।

138 जिनालयों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति यह बताने के लिए काफी थी कि यह केवल किसी एक संस्था या समूह का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे समाज का उत्सव था।

भविष्य की राह

इस आयोजन ने यह तय कर दिया कि अब समाज केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक और सेवा के क्षेत्रों में भी एकजुट होकर आगे बढ़ेगा।

संतों के आशीर्वाद और समाजजनों के संकल्प से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में इंदौर का दिगम्बर जैन समाज पूरे देश के लिए एक आदर्श बनेगा।

निष्कर्ष

दिगम्बर जैन समाज इंदौर एकता केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक भावना है। यह उस सोच का परिणाम है जिसमें “मैं” से “हम” तक का सफर तय किया गया।

इस आयोजन ने यह सिखा दिया कि समाज तब मजबूत होता है जब वह एक-दूसरे का सम्मान करता है, मतभेदों से ऊपर उठता है और साथ चलने का साहस दिखाता है।

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