श्री शिव श्रावण पदयात्रा: मां नर्मदा जल लेकर 70 से अधिक श्रद्धालु उज्जैन महाकाल के लिए रवाना
कोटेश्वर तीर्थ से शुरू हुई आस्था की यात्रा, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा क्षेत्र
कुक्षी (रिपोर्ट- नरेंद्र सिरवी)। श्रावण माह के पवित्र अवसर पर धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सिर्वी समाज नवयुवक संगठन, कुक्षी द्वारा आयोजित श्री शिव श्रावण पदयात्रा बुधवार 5 अगस्त 2026 को मां नर्मदा घाट श्री कोटेश्वर तीर्थ से विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ प्रारंभ हुई।
यात्रा के शुभारंभ अवसर पर पंडित श्री घनश्याम जी द्वारा धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए गए। मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा का पूजन किया और कावड़ में पवित्र जल भरकर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पैदल यात्रा शुरू की।
कावड़ में नर्मदा जल लेकर महाकाल धाम की ओर बढ़े श्रद्धालु
श्री शिव श्रावण पदयात्रा में 70 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए हैं। सभी श्रद्धालु कावड़ में मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर उज्जैन स्थित बाबा महाकालेश्वर मंदिर के लिए रवाना हुए।
यात्रा के प्रारंभ होते ही पूरा क्षेत्र भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ “हर-हर महादेव” और “जय बाबा महाकाल” के जयघोष किए।
श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं और क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
श्रावण मास में शिव आराधना का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस महीने में श्रद्धालु भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए विभिन्न धार्मिक यात्राएं निकालते हैं।
कांवड़ यात्रा और पदयात्रा के माध्यम से श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करते हैं। मां नर्मदा के पवित्र जल को भगवान शिव को अर्पित करने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
सिर्वी समाज नवयुवक संगठन, कुक्षी द्वारा आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य समाज में धार्मिक भावना को मजबूत करना और श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन का पुण्य अवसर प्रदान करना है।
पूजा-अर्चना के बाद हुआ यात्रा का शुभारंभ
यात्रा प्रारंभ होने से पहले मां नर्मदा घाट श्री कोटेश्वर तीर्थ पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पंडित श्री घनश्याम जी के मार्गदर्शन में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ।
इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा से आशीर्वाद लेकर अपनी यात्रा शुरू की। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और भक्ति का भाव साफ दिखाई दे रहा था।
आस्था और अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही पदयात्रा
श्रद्धालु पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान धार्मिक वातावरण बना हुआ है। जगह-जगह लोग श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहे हैं और उनकी सफल यात्रा की कामना कर रहे हैं।
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा महाकाल के प्रति उनकी अटूट आस्था ही उन्हें इस कठिन पैदल यात्रा के लिए प्रेरित करती है। वे भगवान शिव से क्षेत्र और समाज के मंगल की प्रार्थना करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
महाकाल मंदिर में अर्पित किया जाएगा नर्मदा जल
श्री शिव श्रावण पदयात्रा का समापन उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में होगा। यहां श्रद्धालु मां नर्मदा से लाए गए पवित्र जल से भगवान महाकाल का जलाभिषेक करेंगे।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान शिव की आराधना और नर्मदा जल अर्पण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
धार्मिक एकता और भक्ति का संदेश दे रही यात्रा
सिर्वी समाज नवयुवक संगठन द्वारा आयोजित यह पदयात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज में एकता, सहयोग और भक्ति भावना का संदेश दे रही है।
70 से अधिक श्रद्धालुओं का यह समूह पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ महाकाल धाम की ओर बढ़ रहा है। यात्रा के शुभारंभ के साथ ही कुक्षी क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिल रहा है।
