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DEd Marksheet Scam: फर्जी शिक्षक भर्ती का बड़ा खुलासा, STF की जांच में अफसरों की मिलीभगत बेनकाब

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Published On: 15 November 2025
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DEd Marksheet Scam: फर्जी शिक्षकों की भर्ती का पर्दाफाश, अब अफसरों पर भी गिर सकती है गाज | जानें पूरा घोटाला

DEd Marksheet Scam: मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में डीएड (DEd) मार्कशीट घोटाले का मामला तेजी से गहराता जा रहा है। शुरुआती जांच में यह केवल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई शिक्षक भर्ती का खेल लग रहा था, लेकिन स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की पड़ताल ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। जांच में सामने आया है कि यह सिर्फ नकली अंकसूचियों का मामला नहीं था, बल्कि विभाग के भीतर दो स्तरों पर बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि कई मामलों में चयन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की मार्कशीट को “फर्जी” बताकर रिपोर्ट भेजी गई थी, लेकिन बाद में बिना किसी कारण या कार्रवाई के उसी फर्जी दस्तावेज को “सही” घोषित कर दिया गया। यह बदलाव किस दबाव, प्रभाव या सौदेबाजी में किया गया—अब यही STF की बड़ी जांच का हिस्सा है।

फर्जी शिक्षकों की भर्ती से आगे बढ़कर अफसरों तक पहुंचा मामला

STF ने अपनी जांच में कई अनियमितताओं को स्पष्ट किया है। अब जांच का दायरा सिर्फ फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चयन समितियों में बैठे तत्कालीन अफसरों, जिला शिक्षा अधिकारियों और दस्तावेज सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों तक भी पहुंच गया है।

सूत्रों के अनुसार, ऐसे कई अधिकारी आज बड़े पदों पर बैठ चुके हैं, लेकिन उस समय चयन प्रक्रिया में वे प्रमुख भूमिका में थे। इसलिए अब वे भी जांच के घेरे में आ चुके हैं। एसटीएफ ने इन सभी की सूची मांगकर पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी है।

कैसे खेला गया यह बड़ा खेल? | DEd Marksheet Scam का पूरा मेकैनिज्म

डीएड अंकसूची का उपयोग वर्षों से शिक्षक भर्ती में होता रहा है। इसकी वजह से फर्जी मार्कशीट माफिया सक्रिय रहा और कई अभ्यर्थियों ने इसका फायदा उठाया। घोटाला कैसे चलता था, समझिए चरणवार:

1. भर्ती में DEd के नंबर का बड़ा रोल

1996 से 2003 के बीच जनपद और पंचायत स्तरीय चयन समितियों में डीएड के 20 अंक मिलते थे।

  • जितने ज्यादा अंक, उतनी ज्यादा चयन की संभावना।

  • इसी वजह से फर्जी मार्कशीट बनाने और बेचने का नेटवर्क मजबूत हुआ।

2. बाद में व्यापमं भर्ती में भी बढ़ा दुरुपयोग

व्यापमं की भर्ती में भी कई उम्मीदवारों ने फर्जी मार्कशीट लगाकर:

  • नौकरी

  • संविलियन

  • और वेतनवृद्धि
    तक हासिल कर ली।

3. 2014 के बाद DEd अनिवार्य हुआ

2014 के बाद शिक्षक भर्ती के लिए डीएड अनिवार्य कर दिया गया।

  • इसके बाद फर्जी दस्तावेजों का खेल और भी बढ़ गया।

  • कई जिलों में नकली मार्कशीट के आधार पर बड़े पैमाने पर नियुक्तियां हुईं।

STF की जांच में कैसे सामने आए फर्जीवाड़े के सबूत?

एसटीएफ के मुताबिक, जांच में कई अजीबोगरीब मामले सामने आए:

1. दो तरह की रिपोर्ट – पहले फर्जी, फिर सही

  • एक ही अभ्यर्थी की मार्कशीट को दो बार अलग-अलग रिपोर्ट दी गई।

  • पहली रिपोर्ट में दस्तावेज फर्जी बताए गए।

  • बाद में बिना किसी प्रक्रिया के वही दस्तावेज सही कर दिए गए!

  • यह परिवर्तन चयन समिति या विभाग के अंदरूनी लोगों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था।

2. सत्यापन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर

दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान:

  • रिकॉर्ड बदले गए

  • तिथियां बदली गईं

  • और फाइलों में गलत एंट्री की गई

यह सब एक संगठित तरीके से किया गया, जो बताता है कि घोटाले में जमीन स्तर से लेकर उच्च स्तर तक लोग शामिल थे।

3. वही अधिकारी—आज बड़े पदों पर

अब जिन अधिकारियों पर शक है, वे:

  • जिला शिक्षा कार्यालय

  • चयन समितियां

  • और शिक्षा विभाग के मुख्य पदों
    पर थे और अब भी प्रभावशाली पदों पर हैं।

STF क्या कह रही है?

एसटीएफ के एसपी राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार:

“हमने जिला शिक्षा अधिकारियों और चयन समितियों के सभी सदस्यों की पूरी जानकारी मांगी है। जांच में लापरवाही या मिलीभगत मिलने पर इन अधिकारियों को भी आरोपी बनाया जाएगा।”

इस बयान से साफ है कि मामला केवल फर्जी शिक्षकों की भर्ती तक सीमित नहीं है—यह एक संगठित घोटाला है जिसमें विभाग के अंदर बैठे लोग भी शामिल हो सकते हैं।

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क्यों हुआ इतना बड़ा घोटाला? | संभावित कारण

1. अंक आधारित प्रणाली

DEd के 20 अंक और बाद की भर्तियों में इसका महत्व होने से फर्जी मार्कशीट की मांग बढ़ी।

2. कमज़ोर दस्तावेज सत्यापन

कई समितियों में दस्तावेज़ जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई थी। इसका फायदा उठाया गया।

3. अंदरूनी नेटवर्क का सहयोग

बिना विभागीय सहयोग के फर्जी दस्तावेज को “सही” रिपोर्ट करना संभव नहीं।

4. बड़ी संख्या में भर्ती

शिक्षक भर्ती में लगातार पद निकलने से माफिया सक्रिय रहे।

अब आगे क्या? | आने वाली कार्रवाई

  • फर्जी शिक्षकों की सूची STF तैयार कर रही है।

  • अधिकारियों के बयान और रिकॉर्ड की जांच शुरू हो गई है।

  • कई अफसरों पर एफआईआर दर्ज होने की संभावना।

  • जिनकी मार्कशीट फर्जी पाई जाएगी, उनकी नौकरी रद्द होगी और रिकवरी प्रक्रिया भी हो सकती है।


निष्कर्ष

DEd Marksheet Scam शिक्षा विभाग में अब तक के सबसे बड़े दस्तावेज घोटालों में से एक बनता जा रहा है। यह सिर्फ फर्जी शिक्षकों को नौकरी दिलाने का मामला नहीं, बल्कि भीतर की मिलीभगत, सिस्टम की नाकामी, और भर्ती प्रक्रिया की कमजोरियों का परिणाम है।
आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है और अफसरों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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