इंदौर Lokayukta छापेमारी: WCD जॉइंट डायरेक्टर के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई, आय से अधिक संपत्ति का खुलासा
इंदौर
मध्यप्रदेश के इंदौर में Lokayukta पुलिस ने बुधवार सुबह महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के कई ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के मामले में बड़ी छापामार कार्रवाई की। यह कार्रवाई एक साथ तीन अलग-अलग स्थानों पर की गई, जिसके बाद प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में इंदौर की सबसे बड़ी भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा
प्रारंभिक जांच में लोकायुक्त टीम को अधिकारी लक्ष्मी नारायण कंडवाल के नाम पर लगभग 10 करोड़ रुपये की संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। जबकि उनकी 30 वर्षों की सेवा अवधि में वैध आय लगभग ढाई करोड़ रुपये आंकी गई है।
इस तरह उनकी घोषित या वैध आय की तुलना में संपत्ति लगभग 300 गुना अधिक पाई जा रही है, जिसे लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और विस्तृत जांच जारी है।
सुबह 3 बजे से शुरू हुई कार्रवाई की तैयारी
लोकायुक्त को इस अधिकारी के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के सत्यापन के बाद एक गोपनीय योजना तैयार की गई।
- मंगलवार रात से टीम को अलर्ट पर रखा गया
- सुबह 3 बजे से ऑपरेशन की तैयारी शुरू हुई
- सुबह 5 बजे लोकायुक्त टीम अलग-अलग स्थानों के लिए रवाना हुई
- सुबह 6 बजे एक साथ तीन ठिकानों पर छापेमारी शुरू की गई
पहला छापा चोइथराम मंडी स्थित स्कीम नंबर-103 में डाला गया, जहां अधिकारी के आवास और अन्य संपत्तियों की जांच की गई।
एक साथ तीन ठिकानों पर छापेमारी
लोकायुक्त टीम ने विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद एक साथ तीन प्रमुख स्थानों पर कार्रवाई की। इस दौरान टीम ने:
- घर और कार्यालयों की तलाशी ली
- दस्तावेजों की गहन जांच की
- संपत्ति और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए
- डिजिटल डेटा और बैंक डिटेल्स खंगाली
छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी जांच जारी है।
आय के स्रोतों पर अधिकारी का दावा
पूछताछ के दौरान कंडवाल ने अपनी आय के कई स्रोतों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनकी आय केवल वेतन पर निर्भर नहीं है।
उनके अनुसार:
- पत्नी सिलाई-बुनाई का कार्य करती हैं
- दो बेटों का डिपार्टमेंटल स्टोर संचालित है
- बिल्डिंग में स्थित दो मंजिला जिम से किराया मिलता है
उन्होंने यह भी बताया कि बेटों के स्टोर का मासिक टर्नओवर लगभग 1 लाख रुपये है। वहीं जिम से उन्हें लगभग 1.25 लाख रुपये प्रति माह किराया प्राप्त होता है।
हालांकि, लोकायुक्त टीम इन दावों की स्वतंत्र जांच कर रही है।
लग्जरी जिम और मॉल जैसी संपत्तियों की जांच
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अधिकारी से जुड़े कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान और संपत्तियां मौजूद हैं, जिनमें एक लग्जरी जिम और अन्य व्यावसायिक संरचनाएं शामिल हैं।
इन संपत्तियों की वास्तविक लागत, निवेश स्रोत और स्वामित्व की जांच की जा रही है। लोकायुक्त टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों में किसी प्रकार की बेनामी संपत्ति तो शामिल नहीं है।
बैंक लॉकर में मिला 25 लाख का सोना
लोकायुक्त जांच में एक बड़ा खुलासा बैंक लॉकर से जुड़ा हुआ सामने आया है। लोकायुक्त निरीक्षक आशुतोष मिठास के अनुसार:
- बैंक ऑफ इंडिया, सराफा शाखा में एक लॉकर मिला
- लॉकर में लगभग 25 लाख रुपये मूल्य का सोना पाया गया
- एसबीआई और इंडियन ओवरसीज बैंक के खातों को सीज किया गया
इन सभी खातों और लॉकर की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, संपत्ति का कुल आंकड़ा और बढ़ सकता है।
सुबह की रणनीति और तेज कार्रवाई
लोकायुक्त टीम ने इस कार्रवाई को अत्यंत गोपनीय तरीके से अंजाम दिया। टीम ने सुनिश्चित किया कि:
- किसी को पहले से जानकारी न मिले
- सभी स्थानों पर एक साथ कार्रवाई हो
- दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित किया जाए
- जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए
सुबह 6 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई कई घंटों तक चली, जिसमें विभिन्न स्तरों पर जांच की गई।
प्रशासनिक हलकों में हलचल
इस छापेमारी के बाद इंदौर के प्रशासनिक और विभागीय हलकों में व्यापक हलचल देखी गई है। कई वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
लोकायुक्त की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर
जांच में सामने आया सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि:
- वैध आय: लगभग 2.5 करोड़ रुपये
- अनुमानित संपत्ति: लगभग 10 करोड़ रुपये
- अंतर: लगभग 4 गुना से अधिक (प्रारंभिक अनुमान के अनुसार)
यह अंतर ही इस पूरे मामले का मुख्य आधार है, जिसके कारण आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है।
आगे की जांच और संभावित खुलासे
लोकायुक्त टीम अब बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज, निवेश विवरण और डिजिटल डेटा की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में:
- बेनामी संपत्तियों का खुलासा हो सकता है
- निवेश के नए स्रोत सामने आ सकते हैं
- संपत्ति का कुल आंकड़ा बढ़ सकता है
- अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच हो सकती है
निष्कर्ष
इंदौर में लोकायुक्त की यह बड़ी कार्रवाई एक बार फिर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर सख्त रुख को दर्शाती है। लगभग 10 करोड़ रुपये की संपत्ति के खुलासे ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल पैदा कर दी है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना है। यह कार्रवाई सरकारी सेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी दोबारा रेखांकित करती है।
