आबकारी अधिकारी की गाड़ी से शराब ले जाने का आरोप, एसपी कार्यालय के सामने रिकॉर्ड हुआ वीडियो
महेंद्र राज की रिपोर्ट
छतरपुर में आबकारी विभाग पर उठे सवाल, अधिकारी की गाड़ी को लेकर मचा हड़कंप
Chhatarpur। जिले में आबकारी विभाग से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिला आबकारी अधिकारी अमृता जैन की गाड़ी का उपयोग शराब ले जाने के लिए किया गया। कथित रूप से ड्राइवर द्वारा शराब को दूसरी गाड़ी में रखा गया। इस पूरी घटना का वीडियो मौके पर मौजूद पत्रकारों के कैमरे में रिकॉर्ड होने का दावा किया जा रहा है।
घटना पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने होने की बात सामने आई है। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और सोशल मीडिया सहित विभिन्न स्तरों पर इसकी चर्चा शुरू हो गई है।
गाड़ी से शराब दूसरी गाड़ी में ले जाने का आरोप
जानकारी के अनुसार, जिला आबकारी अधिकारी अमृता जैन की गाड़ी क्रमांक एमपी 36 सी 6183 से शराब ले जाने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि ड्राइवर ने कथित रूप से शराब को दूसरी गाड़ी क्रमांक एमपी 16 जेडजे 9278 में रखा।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, गाड़ी से शराब उतारने और दूसरी गाड़ी में रखने की गतिविधि दिखाई दी, जिसके बाद पत्रकारों ने पूरे घटनाक्रम को कैमरे में कैद कर लिया।

वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
घटना का वीडियो सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि शराब निजी उपयोग के लिए थी तो उसे इस तरह एक वाहन से दूसरे वाहन में ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
इसके अलावा यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि सरकारी अधिकारी के वाहन का उपयोग किस परिस्थिति में किया गया और शराब परिवहन के दौरान नियमों का पालन किया गया या नहीं।
अधिकारी ने दी सफाई
मामले को लेकर जिला आबकारी अधिकारी अमृता जैन ने सफाई देते हुए कहा कि संभव है कि शराब उनके निजी उपयोग के लिए ली गई हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ड्राइवर की ओर से कोई अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, अधिकारी के बयान के बाद भी मामले को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। अब जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि घटना में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

निष्पक्ष जांच की उठ रही मांग
मामले में अब वायरल वीडियो और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि शराब कहां से लाई गई थी, उसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और इस प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
प्रशासनिक स्तर पर जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, नियमों का उल्लंघन या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासन और विभागीय जांच की दिशा में टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि छतरपुर जिले में अवैध शराब बिक्री और निर्धारित कीमत से अधिक वसूली जैसे मामलों को लेकर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जिला आबकारी अधिकारी की गाड़ी से जुड़े इस मामले ने विभाग की भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल निजी उपयोग तक सीमित था या फिर शराब परिवहन में किसी प्रकार के नियमों का उल्लंघन हुआ। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

