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BJP विधायक संजय पाठक पर नया संकट, जज को फोन करने के मामले में कार्रवाई की मांग

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Published On: 20 March 2026
BJP MLA Sanjay Pathak Faces Fresh Controversy, Petition Demands Action for Contacting Judge
— BJP MLA Sanjay Pathak Faces Fresh Controversy, Petition Demands Action for Contacting Judge

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संजय पाठक पर आरोप और याचिका

कटनी जिले के BJP  विधायक संजय पाठक (Sanjay Pathak) इस समय एक गंभीर विवाद में फंसे हैं। उनकी मुश्किलें उस समय बढ़ गईं, जब यह सामने आया कि उन्होंने हाईकोर्ट के जज को फोन किया था। यह घटना अवैध उत्खनन से जुड़े मामलों के दौरान हुई, जिनमें पाठक परिवार की खदानों से संबंधित विवाद था।

कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित (Ashutosh Dixit) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें विधायक संजय पाठक के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जज से फोन पर संपर्क करने का प्रयास न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश माना जा सकता है।

जज ने सुनवाई से किया था इनकार

घटना की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के जज विशाल मिश्रा (Justice Vishal Mishra) ने 1 सितंबर 2025 को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। जज ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की थी।

जज विशाल मिश्रा ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया और प्रकरण को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा (Chief Justice Sanjeev Sachdeva) के समक्ष प्रशासनिक स्तर पर भेजा।

याचिकाकर्ता का पक्ष

आशुतोष दीक्षित की याचिका में कहा गया है कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण को पहले ही संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत के रूप में दर्ज कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट में विधायक के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की मांग की।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती सुनवाई के दौरान उपस्थित रहे।

जज की निष्पक्षता और न्यायपालिका की पारदर्शिता

संजय पाठक द्वारा फोन करने की कोशिश के खुलासे के बाद जज विशाल मिश्रा ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह कदम न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायिक अधिकारियों से अनधिकृत संपर्क करने का प्रयास केवल व्यक्तिगत स्तर का मामला नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और न्याय के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।

मामले की आगे की सुनवाई

चीफ जस्टिस संज़ीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई की। अगली सुनवाई अब 26 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

इस सुनवाई में यह तय होगा कि विधायक संजय पाठक के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक और कानूनी प्रभाव

इस प्रकरण से कई राजनीतिक और कानूनी निहितार्थ उभर कर सामने आए हैं:

  1. विधायक संजय पाठक की राजनीतिक छवि प्रभावित हो सकती है।
  2. अवैध उत्खनन मामले में उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप जुड़ गया है।
  3. यह मामला अन्य राजनीतिक हस्तियों और जनता के बीच नैतिक और कानूनी उदाहरण बन सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर याचिकाकर्ता की दलीलें मान ली जाती हैं, तो विधायक पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

अवैध उत्खनन और खनिज उद्योग

संजय पाठक परिवार से जुड़ी खदानों और अवैध उत्खनन की घटनाएं पहले भी मीडिया और न्यायपालिका के ध्यान में आ चुकी हैं। खनिज उद्योग में नियमों का पालन न करने और अनधिकृत उत्खनन जैसी घटनाओं ने क्षेत्र में चिंता पैदा की है।

यदि विधायक को इस मामले में दोषी पाया जाता है, तो यह न केवल उनके राजनीतिक करियर के लिए, बल्कि राज्य के खनिज उद्योग की पारदर्शिता के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत होगा।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए भी एक सशक्त संदेश है। किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

जज विशाल मिश्रा द्वारा स्वयं को मामले से अलग करना और इसे प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के पास भेजना यह दिखाता है कि न्यायपालिका के भीतर पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि है।

निष्कर्ष

भाजपा विधायक संजय पाठक का मामला कई कारणों से महत्वपूर्ण है।

  • यह राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से संवेदनशील मामला है।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा होने की स्थिति में कदम उठाना आवश्यक है।
  • अगली सुनवाई 26 मार्च 2026 को निर्धारित है, जिसमें तय होगा कि विधायक के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

यह मामला यह भी दर्शाता है कि भारत में कानून के सामने सभी समान हैं, चाहे वह किसी भी राजनीतिक पद पर क्यों न हों।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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