Bhopal Commercial Shops Case:अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर फिलहाल रोक, पूरे शहर का होगा सर्वे
नगर निगम ने 101 दुकानों और शोरूम पर कार्रवाई टाली
राजधानी Bhopal के आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विरुद्ध संचालित किए जा रहे कमर्शियल प्रतिष्ठानों के मामले में नगर निगम ने फिलहाल कार्रवाई रोक दी है। अरेरा कॉलोनी और बावड़िया कला क्षेत्र में जिन 101 शोरूम और दुकानों को सील करने के बाद दोबारा खोल दिया गया था, उन्हें अभी फिर से बंद नहीं कराया जाएगा।
नगर निगम का कहना है कि अब पूरे भोपाल शहर का व्यापक सर्वे कराया जाएगा। सर्वे के आधार पर आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों, भवन अनुमति के उल्लंघन और वास्तविक स्थिति की जांच की जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पुराने सर्वे को माना अपर्याप्त
नगर निगम द्वारा सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए गए करीब एक हजार संपत्तियों के सर्वे को अदालत ने पर्याप्त नहीं माना है। कोर्ट ने सर्वे के सैंपल साइज को छोटा बताते हुए नई रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
अब नगर निगम को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके लिए पूरे शहर में नए सिरे से सर्वे किया जाएगा, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि किन आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
हर विधानसभा क्षेत्र में नियुक्त होंगे नोडल अधिकारी
नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर एवं कॉलोनी सेल प्रभारी भुवन गुप्ता के अनुसार, नए सर्वे को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
ये अधिकारी बिल्डिंग परमिशन, भू-उपयोग परिवर्तन, अवैध निर्माण और आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक संस्थानों की जानकारी जुटाएंगे। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय होगी।
पहले चरण में जारी हुए थे 429 नोटिस
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने पहले चरण में शहर के प्रमुख क्षेत्रों में कार्रवाई शुरू की थी। अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़िया कला क्षेत्र में संचालित 429 कमर्शियल प्रॉपर्टी को नोटिस जारी किए गए थे।
इसके बाद दूसरे चरण में बैरागढ़, कोलार, चुनाभट्टी, इंद्रपुरी, अशोका गार्डन और कोहेफिजा सहित कई इलाकों में 1,250 से अधिक नोटिस जारी किए गए।
इन नोटिसों के माध्यम से संबंधित संपत्ति मालिकों से दस्तावेज, अनुमति और व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन से जुड़े प्रमाण मांगे गए थे।
Bhopal के पुराने मास्टर प्लान पर भी उठे सवाल
आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों का विवाद अब भोपाल की शहरी योजना और मास्टर प्लान से भी जुड़ गया है। शहर में वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका है।
इस दौरान दो बार नए ड्राफ्ट तैयार किए गए, लेकिन आपत्तियों और अन्य प्रक्रियाओं के चलते वे लागू नहीं हो पाए। वहीं, मास्टर प्लान-2047 भी पिछले लंबे समय से मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
शहरी विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक स्पष्ट योजना नहीं होने के कारण शहर के कई आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती गईं।
आवासीय क्षेत्रों में कैसे बढ़ीं कमर्शियल गतिविधियां
पिछले करीब दो दशकों में भोपाल के कई आवासीय इलाकों में धीरे-धीरे बड़े अस्पताल, शोरूम, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक संस्थान खुलते गए।
हालांकि, इन क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक, पार्किंग की समस्या, जल आपूर्ति, सीवेज व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हो पाया।
विशेषज्ञों के अनुसार, समय के साथ नियमों के पालन में ढिलाई और प्रभावी निगरानी की कमी के कारण यह समस्या बढ़ती गई।
पुरानी कॉलोनियों पर बढ़ा सुविधाओं का दबाव
अरेरा कॉलोनी के ई-1 से ई-5 क्षेत्र और चार इमली जैसे इलाके मूल रूप से सीमित आबादी और आवासीय उपयोग को ध्यान में रखकर विकसित किए गए थे।
लेकिन समय के साथ यहां बड़े संस्थानों और व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से यातायात, पार्किंग, पानी और सीवेज जैसी सुविधाओं पर दबाव बढ़ गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कॉलोनियों के मूल स्वरूप को बनाए रखना जरूरी है, ताकि रहवासियों को बेहतर जीवन सुविधाएं मिल सकें।
नई शहरी योजना में तय होंगे संस्थानों के मानक
भविष्य की शहरी योजना में केवल किसी क्षेत्र को आवासीय या व्यावसायिक घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा। अब इस बात पर भी ध्यान दिया जाएगा कि किस क्षेत्र में किस प्रकार के और कितने बड़े संस्थानों को अनुमति दी जा सकती है।
नई नीति में कॉलोनी स्तर और पूरे शहर की जरूरत वाले संस्थानों के लिए अलग-अलग मानक तय किए जाने की संभावना है।
इसके साथ ही पहले से संचालित संस्थानों के लिए भी स्पष्ट नीति बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि आम नागरिकों, व्यापारियों और प्रशासन के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
सर्वे रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की रणनीति
नगर निगम का कहना है कि वर्तमान में प्राथमिकता पूरे शहर की वास्तविक स्थिति को समझना है। नए सर्वे के बाद यह स्पष्ट होगा कि कहां नियमों का उल्लंघन हुआ है और किन क्षेत्रों में नियमानुसार व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
इसके बाद ही सीलिंग, अनुमति, नियमितीकरण या अन्य कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायिक उपयोग का यह मामला अब केवल दुकानों और शोरूम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर के भविष्य के विकास, ट्रैफिक व्यवस्था और बेहतर शहरी नियोजन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
